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दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन की फिल्म से हट गए थे शाहरुख, जानिए क्या थी वजह

निर्देशक सुभाष घई ने बताया कि उन्होंने फिल्म का शीर्षक भी सोच लिया था। यह फिल्म ‘मदर लैंड’ नाम से बनने वाली थी।

सुषाष घई इससे पहले साल 1997 में आई ‘परदेस’ में शाहरुख के साथ काम कर चुके हैं।

निर्देशक सुभाष घई ने युद्ध की पृष्ठभूमि वाली अपनी एक महत्वकांक्षी फिल्म के लिए बॉलीवुड के तीन दिग्गज सुपरस्टा – दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान को लेने की योजना बनायी थी, लेकिन उन्हें अपना यह ख्याल छोड़ना पड़ा। निर्देशक ने बताया कि उन्होंने फिल्म का शीर्षक भी सोच लिया था। यह फिल्म ‘मदर लैंड’ नाम से बनने वाली थी। पीटीआई (भाषा) के साथ साक्षात्कार में उन्होंने कहा, ‘वर्ष 2003 में मैं ‘मदर लैंड’ नाम से युद्ध आधारित फिल्म बनाना चाहता था, जिसके लिए मैंने दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान को चुना था। फिल्म की पटकथा तैयार थी यहां तक कि गाने भी रिकॉर्ड हो गये थे लेकिन आखिरी वक्त में शाहरुख इससे पीछे हट गये।’

सुषाष घई इससे पहले साल 1997 में आई ‘परदेस’ में शाहरुख के साथ काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि शाहरुख तब किसी नायक प्रधान फिल्म में काम करना चाहते थे और इसलिए उनकी इस महत्वकांक्षी फिल्म की शूंटिंग शुरू नहीं हो सकी। उन्होंने कहा, ‘उनका मानना था कि फिल्म में काफी सारे किरदार हैं। तब वह कोई नायक प्रधान फिल्म करना चाहते थे, लेकिन मेरी फिल्म ऐसी नहीं थी। यह दिलीप साहब, अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान की कहानी थी। फिल्म के लिये मेरे पसंदीदा कलाकारों की सूची में ऐश्वर्या राय, प्रीति जिंटा और महिमा चौधरी का भी नाम था। लेकिन यही इसकी नियती थी।’ घई ने कहा कि ‘मदर लैंड’ का काम शुरू नहीं हो पाया लेकिन एक और ऐसी फिल्म थी ‘शिखर’ जिसे वह शाहरुख के साथ बनाना चाहते थे और इस फिल्म पर भी काम आगे नहीं बढ़ सका जिसके बाद ‘परदेस’ की शुरुआत हुई थी।

उन्होंने कहा कि ‘परदेस’ से पहले मैंने ‘शिखर’ की योजना बनायी थी जिसमें मैं जैकी श्रॉफ और शाहरुख को लेने वाला था। यह फिल्म भी युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित थी और इसमें हम किसी नयी लड़की को लेने वाले थे। हमने मुहुर्त भी पूरा कर लिया था और ए आर रहमान को साइन करने के बाद हम एक गीत भी रिकॉर्ड कर चुके थे। फिल्म ‘ताल’ के गीत ‘इश्क बिना क्या जीना यारो’ को फिल्म ‘शिखर’ से ही लिया गया था। ‘शिखर’ एक बहुत बड़े बजट की युद्ध आधारित फिल्म थी। मेरी टीम ने सोचा कि हमें कोई कम बजट की फिल्म बनानी चाहिए। मैंने भी सोचा चलो कोई छोटी फिल्म बनाते हैं और इस तरह ‘परदेस’ बनी, जिसकी शूटिंग सिर्फ एक साल के अंदर पूरी हो गयी।

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