हिंदी सिनेमा के जाने-माने स्क्रीनराइटर सलीम खान मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती हैं। डॉक्टर ने बताया कि उन्हें माइनर ब्रेन हैमरेज हुआ था। 18 फरवरी को डॉक्टर ने बताया था कि सलीम खान का DSA नाम का एक प्रोसीजर किया गया, जो बिना किसी परेशानी के और सफल रहा। इसमें कोई सर्जरी नहीं हुई। सलीम खान से मिलने अस्पताल में उनके परिवार के अलावा बॉलीवुड इंडस्ट्री के भी कई लोग पहुंचे। इसमें रितेश देशमुख, संगीता बिजलानी समेत कई नाम शामिल हैं। सलमान खान के पिता सलीम 90 साल के हो गए हैं और उन्होंने अपने करियर में एक से बढ़कर एक कई क्लासिक फिल्मों की कहानी लिखी।
जब टूट गई सलीम-जावेद की जोड़ी
सिर्फ इतना ही नहीं, उन्होंने 1970 और 1980 के दशक में हिंदी फिल्मों की दुनिया को बदल दिया और अमिताभ बच्चन जैसे सितारों को एक अलग पहचान दी। 70s-80s के दशक में सलीम-जावेद की जोड़ी इंडस्ट्री के सबसे बड़े स्क्रीनराइटर माना जाता था। दोनों ने मिलकर ‘दीवार’, ‘शोले’, ‘त्रिशूल’, ‘काला पत्थर’ समेत कई फिल्में दी और खूब नाम कमाया। हालांकि, 1982 में इस मशहूर राइटर की जोड़ी टूट गई और दोनों ने अलग होकर इंडिपेंडेंट करियर बनाने का फैसला किया।
खुद को साबित करना जरूरी था: सलीम
सालों तक जावेद अख्तर के साथ काम करने और नाम कमाने के बाद अलग होकर अकेले काम करना सलीम खान के लिए आसान नहीं था। एक बार सलीम खान ने कोमल नाहटा को दिए इंटरव्यू में बताया था कि कैसे जब सलीम-जावेद की जोड़ी टूटी, तो उन्हें काफी दिक्कतें हुई थी। उनके पास चार साल तक काम नहीं था। सलमान खान के पिता ने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में कई लोगों का मानना था कि जावेद अख्तर पार्टनरशिप में मेन क्रिएटिव फोर्स थे।
जिससे उनके लिए एक सोलो राइटर के तौर पर अपनी काबिलियत साबित करना बहुत जरूरी हो गया। उन्होंने कहा, “मेरी पर्सनैलिटी में जरूर कोई प्रॉब्लम रही होगी, क्योंकि बहुत से लोगों को लगता था कि जावेद अख्तर ज्यादातर चीजें लिखते थे। ऐसे में मेरे लिए खुद को साबित करना जरूरी था। इंडस्ट्री के लोग मुझसे पूछते थे कि तुम दोनों में से कौन लिखता था?”
इसके आगे उन्होंने कहा, “हम दोनों ही आइडिया देते थे और स्क्रिप्ट लिखते थे। जो लोग जावेद अख्तर को पसंद नहीं करते थे, वे कहते थे कि मैं स्क्रिप्ट लिखता हूं और जो लोग मुझे पसंद नहीं करते थे, वे कहते थे कि जावेद साहब स्क्रिप्ट लिखते हैं। मैंने बहुत सारी फिल्में छोड़ दीं और लोगों ने मुझ पर इल्जाम लगाया कि मैं हिम्मत हार जाता हूं। इसलिए मेरे लिए नाम की सफलता बहुत जरूरी थी।”
सलीम खान को नहीं मिला इतने साल काम
सलीम ने आगे बताया कि जब वह जावेद अख्तर के साथ अपने करियर के पीक पर थे, तो बैक-टू-बैक सक्सेस की वजह से उनका फोन बजना बंद नहीं होता था। हालांकि, दोनों के अलग होने के बाद सिचुएशन बदल गई। उन्होंने कहा, “एक समय था जब हमारी फिल्में ‘शोले’, ‘दीवार’, ‘त्रिशूल’ सभी हिट थीं।
लगभग 10 फिल्में एक के बाद एक हिट हुईं, उस समय मुझे शाम को ड्रिंक लेते समय अपने फोन का रिसीवर बंद रखना पड़ता था, क्योंकि मुझे बहुत सारे कॉल आते थे। फिर मेरे और जावेद अख्तर के अलग होने के बाद उन चार सालों में जब मुझे काम नहीं मिलता था, तो मैं अपना फोन सिर्फ यह देखने के लिए उठाता था कि वह काम कर रहा है या नहीं।”
स्क्रीन पर अपना नाम देखकर रो पड़े सलीम खान
इंटरव्यू में सलीम खान ने आगे बताया कि चार साल बाद जब मेरा नाम स्क्रीन पर आया और सोलो ‘स्टोरी, स्क्रीन पेज और डायलॉग सलीम खान ने लिखे’ यह देखकर मेरी आंखों में आंसू आ गए। मैं स्क्रीन की तरफ देख भी नहीं पा रहा था। मैंने चार साल बाद स्क्रीन पर अपना नाम सोलो देखा।
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मशहूर पटकथा लेखक और सलमान खान के पिता सलीम खान ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में यह खुलासा किया था कि उन्होंने फिल्म ‘शोले’ के लिए सबसे पहले अमिताभ बच्चन का नाम रमेश सिप्पी को सुझाया था। इस खबर को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
