बॉलीवुड में अक्सर कहा जाता है कि किस्मत और सही समय किसी कलाकार का करियर बदल सकते हैं। कई बार एक अभिनेता जिस फिल्म को ठुकरा देता है, वही फिल्म किसी दूसरे कलाकार के लिए मील का पत्थर साबित हो जाती है। हिंदी सिनेमा के दो बड़े सितारे राजेश खन्ना और विनोद खन्ना भी ऐसे फैसले ले चुके हैं, जिनका फायदा दूसरे अभिनेताओं को मिला और उनकी स्टारडम की कहानी बदल गई।
जब विनोद खन्ना ने छोड़ीं बड़ी फिल्में
70 और 80 के दशक में विनोद खन्ना इंडस्ट्री के सबसे लोकप्रिय सितारों में गिने जाते थे। उनके पास फिल्मों की भरमार थी, लेकिन व्यस्त शेड्यूल और अन्य कारणों से उन्होंने कई बड़ी फिल्मों को मना कर दिया। बाद में यही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुईं।
‘जंजीर’ ने बदल दी अमिताभ बच्चन की किस्मत
प्रकाश मेहरा की फिल्म ‘जंजीर’ (1973) पहले विनोद खन्ना को ऑफर की गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने यह फिल्म नहीं की और बाद में यह रोल अमिताभ बच्चन के पास पहुंचा। फिल्म जब रिलीज हुई तो उसने अमिताभ को “एंग्री यंग मैन” की नई पहचान दिला दी और उनके करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।
विनोद खन्ना ने कथित तौर पर ‘नमक हलाल’ और ‘देस प्रेमी’ जैसी फिल्मों को भी ठुकराया था। बाद में इन फिल्मों में अमिताभ बच्चन और शशि कपूर जैसे सितारे नजर आए और फिल्में बड़ी सफल रहीं।
यह भी पढ़ें: Batwara 1947 First Look: ‘लाहौर 1947’ बनी ‘बंटवारा 1947’, मेकर्स ने बदले नाम के साथ जारी किया दमदार मोशन पोस्टर
‘दोस्ताना’ और ‘नसीब’ का भी मिला था ऑफर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ‘दोस्ताना’ और ‘नसीब’ जैसी मल्टीस्टारर फिल्मों में भी विनोद खन्ना को लेने की योजना थी, लेकिन उनके बाहर होने के बाद दूसरे कलाकारों को मौका मिला। दोनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल साबित हुईं और इनके कलाकारों को जबरदस्त लोकप्रियता मिली।
राजेश खन्ना ने भी छोड़े ऐसे मौके
राजेश खन्ना को हिंदी सिनेमा का पहला सुपरस्टार कहा जाता है। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि उनके नाम पर फिल्में हिट हो जाती थीं। हालांकि करियर के दौरान उन्होंने भी कुछ ऐसे प्रोजेक्ट्स को न कहा, जो आगे चलकर दूसरे सितारों के लिए बड़े मौके साबित हुए।
सबसे चर्चित उदाहरण ‘जंजीर’ का ही माना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह फिल्म कई बड़े सितारों को ऑफर हुई थी, जिनमें राजेश खन्ना का नाम भी शामिल बताया जाता है। कई कलाकारों के इंकार के बाद फिल्म अमिताभ बच्चन तक पहुंची और इतिहास बन गया।
विडंबना यह रही कि जिस दौर में राजेश खन्ना सुपरस्टार थे, उसी दौर में अमिताभ बच्चन का उभार शुरू हुआ और बाद में वे बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों में शामिल हो गए।
यह भी पढ़ें: एम. एफ. हुसैन: जब पेंटिंग में उतर आया बॉलीवुड और कैनवास ने कही सिनेमा की बात
बॉलीवुड का सबसे बड़ा सबक
फिल्म इंडस्ट्री में कोई भी फैसला छोटा नहीं होता। एक अभिनेता की ठुकराई हुई फिल्म दूसरे अभिनेता के लिए करियर का टर्निंग पॉइंट बन सकती है। विनोद खन्ना द्वारा छोड़ी गई कई फिल्मों ने अमिताभ बच्चन और अन्य कलाकारों को फायदा पहुंचाया, जबकि राजेश खन्ना के दौर में भी कुछ ऐसे मौके आए जिन्होंने नए सितारों के लिए रास्ते खोले।
यही वजह है कि बॉलीवुड में आज भी कहा जाता है, कभी-कभी एक ना किसी दूसरे के लिए सुपरस्टार बनने का रास्ता तैयार कर देती है।
