आर. माधवन ने हाल ही में अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद किया है। उन्होंने बताया कि अपनी पहली फिल्म ‘अलाई पायुथे’ के बाद उन्हें सलाह दी गई थी कि अगर वह रजनीकांत जैसे बड़े सुपरस्टार बनना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसी फिल्में करनी होंगी जो छोटे शहरों और गांवों के दर्शकों को भी पसंद आएं।
ब्रूट इंडिया से बात करते हुए माधवन ने कहा, “जो भी लोग मुझसे मिल रहे थे, वे कह रहे थे कि आप तब तक रजनीकांत नहीं बन सकते जब तक आप ऐसी फिल्में न करें जो B और C सेंटर्स (छोटे शहरों और कस्बों) में चलें। गांवों को आपको अपनाना होगा। जब वे आपको ‘थलाइवा’ कहेंगे, तभी आप साउथ के सुपरस्टार बनेंगे।” उन्होंने आगे बताया कि उन्हें बार-बार यही सलाह दी जाती थी कि गांवों के दर्शकों को ध्यान में रखकर फिल्में करें, गांव के लोगों जैसी छवि अपनाएं और उसी तरह के किरदार निभाएं।
पूरा स्टूडियो ही बंद हो गया: माधवन
माधवन ने आगे कहा कि उस सलाह को गंभीरता से लेते हुए मैंने एक ऐसी फिल्म साइन की जो लगा कि उनकी उम्मीदों पर खरी उतरेगी। अभिनेता बोले, “तो मैंने एक ऐसी फिल्म स्वीकार की जिसमें मैं एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभा रहा था जो अपना पेट भरने के लिए संघर्ष कर रहा था, जो कमजोर था, अशिक्षित था, पढ़ाई नहीं कर रहा था, लेकिन क्रिकेटर बनने का सपना देखता था। यही वह फिल्म थी जो मैं कर रहा था। फिल्म इतनी बुरी तरह फ्लॉप हुई कि उसके बाद पूरा स्टूडियो ही बंद हो गया।”
हालांकि, इस असफलता ने एक्टर को बहुत कुछ सिखाया। इस असफलता से मिली सीख के बारे में बात करते हुए माधवन ने कहा, “मुझे अचानक एहसास हुआ कि मुझे कभी भी वैसा नहीं बनना चाहिए जिसे मैं अब हिंदी में ‘डेटा के टट्टू’ कहता हूं। यानी ऐसे बेवकूफ जिन्हें डेटा को समझना नहीं आता। डेटा तो सबके पास होता है। आप उस डेटा को कैसे समझते हैं और उससे क्या नतीजे निकालते हैं, इसी से तय होता है कि आप कितने सफल होंगे।”
मेरे मुंह पर जोरदार तमाचा था: माधवन
उन्होंने बताया कि उन्हें जो सलाह मिली थी, वह पूरी तरह गलत नहीं थी, लेकिन गलती यह थी कि उन्होंने उसे बहुत ज्यादा मान लिया। एक्टर ने कहा, “तो वे जो कुछ भी कह रहे थे, वह सच था, लेकिन मुझे वह नहीं करना था। मुझे डेटा को अलग तरह से समझना था और B और C सेंटर के लिए अपनी तरह की फिल्में बनानी थीं। उस फिल्म ने मुझे जोरदार सबक सिखाया, मानो मेरे मुंह पर जोरदार तमाचा पड़ा हो कि मुझे आगे क्या करना है।”
