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फिल्मों में पिटकर गांव आते हो, शर्म नहीं आती? जब छोटे रोल के लिए नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को सुनने पड़े ताने, छोड़ दिया था गांव जाना

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को शुरू में अक्सर छोटे रोल मिलते जिनमें उन्हें मार खाना होता था। इसके बाद जब वो गांव जाते तो गांव वाले उन्हें ताने देते थे कि हर फ़िल्म में वो पिटकर गांव आ जाते हैं।

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को गैंग्स ऑफ़ वासेपुर से बड़ा ब्रेक मिला था (File Photo)

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने एक चरित्र अभिनेता के रूप में खुद को बॉलीवुड में स्थापित किया है। वो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी काफी लोकप्रिय हैं। लेकिन नवाज़ुद्दीन सिद्दिकी को ये लोकप्रियता मिलने में सालों लग गए। संघर्ष में दिनों में उन्होंने वॉचमैन तक की नौकरी की और कई ऐसी फिल्मों में काम किया जिनमें वो काम करना ही नहीं चाहते थे। नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को बाद के वर्षों में कुछ काम मिलना शुरू हुआ था। अक्सर उन्हें छोटे रोल मिलते जिनमें उन्हें मार खाना होता था।

इसके बाद जब वो अपने गांव जाते तो गांव वाले उन्हें ताने देते थे कि हर फ़िल्म में वो पिटकर गांव आ जाते हैं। नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने इस बात का खुलासा रजत शर्मा के शो ‘आपकी अदालत’ में किया था। रजत शर्मा ने उनसे सवाल किया कि जब उन्हें फिल्में नहीं मिलती थी तो उनके मन में ये ख्याल नहीं आया कि गांव चले जाएं?

जवाब में नवाज़ ने कहा, ‘कई बार मेरे दिमाग के आया कि गांव चला जाऊं क्योंकि गुजारा करना मुश्किल हो गया था। लेकिन गांव जब वापस जाता तो लोग बोलते कि हमने तो बोला था, शक्ल तो देख लेते अपनी। कुछ नहीं होगा वहां तुम्हारा। ये सोच के शर्म आती थी कि मैं वापस नहीं जाऊंगा।’

उन्होंने आगे बताया था, ‘शुरू में जब मैं छोटे-छोटे रोल कर रहा था। वो रोल करके जब मैं अपने गांव जाता था तो मुझे बहुत बेइज्जती महसूस होती थी क्योंकि लोग बोलते थे- यार पिटते हो हर फिल्म में और पिटकर गांव आ जाते हो, शर्म नहीं आती? तो बहुत बुरा लगता था। फिर मैंने सोचा कि जब तक कोई ऐसा रोल नहीं मिलेगा जिसमें मैं सबको पीट रहा हूं, तब तक गांव नहीं जाऊंगा।’

 

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को इसके कुछ समय बाद फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर मिल गई थी और तब जाकर वो गांव गए थे। गांव में लोगों ने उन्हें खूब प्यार दिया था और कहा था, ‘अब आया न शेर का बच्चा।’

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने इस फ़िल्म से पहले कोई रोमांटिक सीन नहीं किया था। फ़िल्म की हीरोइन हुमा कुरैशी उन्हें सेट पर भाईजान कहकर पुकारती थीं। ऐसे में जब उन्हें रोमांटिक सीन करना पड़ा हुमा के साथ तो उन्हें दिक्कतें आई थीं।

 

नवाज़ुद्दीन ने अपने संघर्ष के दिनों में सी ग्रेड की फिल्में भी की जिसका खुलासा उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान किया था। उन्होंने बताया था कि ऐसी फिल्मों में वो भीड़ का हिस्सा बनते थे और जब भी कैमरा उनके सामने आता तो वो मुंह छुपा लेते थे ताकि उन्हें कोई पहचान न पाए।

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