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जब किशोर की मसखरी से झल्लाए अशोक

बात उन दिनों की है जब बिमल राय के निर्देशन में ‘परिणिता’ (1953) बन रही थी, जिसके निर्माता अभिनेता अशोक कुमार थे।
(express Photo)

बात उन दिनों की है जब बिमल राय के निर्देशन में ‘परिणिता’ (1953) बन रही थी, जिसके निर्माता अभिनेता अशोक कुमार थे। वह फिल्म के हीरो थे और हीरोइन थीं मीना कुमारी। इसके गाने, ‘ऐ बांदी तुम बेगम बनो…’ गाने की रिकॉर्डिंग चल रही थी। किशोर कुमार और आशा भोंसले आ चुके थे। फिल्म के लिए मशहूर नर्तक गोपीकृष्ण को भी बुलाया गया था। गाने में रोशन कुमारी के साथ उनका डांस भी था लिहाजा गोपीकृष्ण को घुंघरू बजाने के लिए बुलाया गया था।

रिकॉर्डिंग पूरी हो गई और आशा भोंसले चली गईं। फिर रिकॉर्डिंग में उपस्थित वादकों को पैसा दिया जाने लगा। अचानक किशोर कुमार उछल कर सामने आए और कहा कि हमारा पइसा कहां है? प्रोडक्शन के लोगों ने उन्हें समझाने की कोशिश की मगर किशोर कुमार अपना मेहनताना लेने के लिए अड़ गए। बात अशोक कुमार को पता चली, तो आते ही उन्होंने किशोर कुमार को डांटना शुरू कर दिया। कहा, ‘चुप रह, क्या तू मेरी ही फिल्म के लिए मुझसे पैसा मांगेगा। मसखरी छोड़ दे और सीधे घर जा।’ लोगों को लगा कि किशोर कुमार चुपचाप वहां से चले जाएंगे। मगर किशोर कुमार लगातार कहते रहे कि मेरा पइसा किधर है। स्थिति इतनी बुरी हो गई कि सबके सामने किशोर कुमार की मसखरी के कारण अपने समय के सुपर स्टार अशोक कुमार झेंपने लगे। दबाव बढ़ाते हुए अब किशोर कुमार ने हाथ-पांव पटक कर लगातार अपने पैसे मांगने शुरू कर दिए। आखिर अशोक कुमार को उन्हें एक हजार रुपए देने ही पड़े। अपने करियर में मेहनताना पाने का किशोर कुमार ने यह तरीका खूब अपनाया। इसके ढेरों किस्से हैं। अशोक कुमार भी किशोर कुमार के इस तरीके को जानते थे और कई दफा इसका सामना भी उन्हें करना पड़ा।

1956 की ‘भाई भाई’ के समय भी कुछ ऐसा ही हुआ। फिल्म के निर्देशक एमवी रमन से शूटिंग के दौरान किशोर कुमार अपने पांच हजार रुपए की मांग करने लगे। पैसे नहीं मिले तो किशोर कुमार ने शू्टिंग करने से इनकार कर दिया। आखिर फिल्म के हीरो अशोक कुमार को हस्तक्षेप कर कहना पड़ा कि पैसे मिल जाएंगे, तुम शूटिंग करो। बड़े भाई के कहने पर किशोर कुमार शूटिंग करने जा पहुंचे। कैमरा शुरू हुआ तो किशोर कुमार ने उछलकूद शुरू कर दी और गाने लगे पांच हजार रुपया… फिर वे धीरे-धीरे खिड़की की ओर बढ़े और कूद कर बाहर निकल गए। अपने वॉर्डन रोड के बंगले के गेट पर किशोर कुमार ने लिखवा रखा था, ‘किशोर कुमार से सावधान’। ‘लैला मजनूं’ (1976) बनाने वाले एचएस रवैल एक दिन किशोर कुमार का मेहनताना देने उनके घर गए। रुपए लेने के बाद किशोर कुमार ने रवैल का हाथ पकड़ कर किसी कुत्ते की तरह काट खाया और गेट पर लिखे बोर्ड की तरफ इशारा करने लगे।

किशोर के मनमौजीपने के कई किस्से हैं। उन्होंने ‘शोले’ के निर्माता जीपी सिप्पी को घर बुलाकार पहचानने से इनकार कर दिया था। ‘आनंद’ के लिए साइन करने आए हृषिकेश मुखर्जी को तो उनके चौकीदार ने बंगले के बाहर से भगा दिया था। वह एक निर्माता के सेट पर चेहरे पर आधा मेकअप करके पहुंच गए थे क्योंकि उसने आधा मेहनताना नहीं दिया था। एक फाइनेंसर को अलमारी में बंद कर ताला लगा दिया था। किशोर अपनी इन हरकतों पर कहते थे कि वह पागल बनकर लोगों का मजा लेते हैं।

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