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जब आशा पारेख डिप्रेशन में आकर करना चाहती थीं सुसाइड

आशा पारेख डिप्रेशन का शिकार तब हुईं जब उनके पेरेंट्स का निधन हुआ था।

फिल्म प्यार का मौसम के एक सीन में आशा पारेख।

बॉलीवुड में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट करियर की शुरुआत करने वाली आशा पारेख ने आसमान और बाप-बेटी जैसी फिल्मों से ही काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने बॉलीवुड में ही करियर बनाने के लिए बड़े होने के बाद काम ढूंढना शुरू किया। निर्देशक विजय भट्ट ने आशा पारेख को गूंज उठी शहनाई में लीड रोल के लिए कास्ट किया। इस फिल्म की एक-दो दिन शूटिंग होने के बाद अचानक विजय भट्ट ने ये कहकर आशा को निकाल दिया कि तूम हीरोइन बनने के काबिल नहीं हो।

इसके बाद नासिर हुसैन ने आशा पारेख को 1959 मे आई अपनी फिल्म ‘दिल देके देखों’ में शम्मी कपूर के अपोजिट कास्ट किया और ये फिल्म हिट हो गई। आशा पारेख ने अपने दौर में कई बड़े सितारों के साथ काम किया और कई हिट फिल्में भी दीं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आशा पारेख की जिंदगी में एक वक्त ऐसा भी था जब उन्हें सुसाइड करने के ख्याल आते थे? नहीं जानते तो कोई बात नहीं चलिए आज हम बताते हैं।

70 के दशक की हिंदी सिनेमा की मशहूर अदाकारा आशा पारेख ने अपने करियर में नाम, दौलत और शोहरत के साथ ही लोगों के दिलों में खास जगह बनाई है। लेकिन इतनी कामयाबी के बाद भी आशा पारेख की जिंदगी में भी एक ऐसा वक्त आया था जब वो डिप्रेशन का शिकार हो गईं थी और उनके मन में सुसाइड जैसे ख्याल आने लगे थे।

आशा पारेख डिप्रेशन का शिकार तब हुईं जब उनके पेरेंट्स का निधन हुआ था।

आशा पारेख का कहना है कि वह उनके लिए बहुत बुरा दौर था। उन्होंने बताया कि मैं अपने पेरेंट्स को खो चुकी थी और बिल्कुल अकेली पड़ गई थी। इसकी वजह से मैं डिप्रेशन में रहने लगी। मुझे बहुत बुरा लगता था और कई बार सुसाइड करने जैसे विचार मन में आते थे। यहां तक कि आशा को इतना डिप्रेशन हो गया था कि उन्हें डॉक्टरों की मदद लेनी पड़ी थी।

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