फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को 7 दिसंबर 2025 को राजस्थान पुलिस ने मुंबई में 30 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया था। इस साल फरवरी में दोनों को जमानत मिल गई थी। अब अपने लेटेस्ट सोशल मीडिया पोस्ट में विक्रम ने उदयपुर सेंट्रल जेल में बिताए समय और जनवरी की कड़ाके की ठंड में अपनी बिगड़ती सेहत के बारे में खुलकर बात की है।

अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखे लंबे नोट में फिल्ममेकर ने बताया कि जेल में बंद रहने के तीन हफ्ते बाद एक रात बैरक नंबर 10 में उन्हें तेज बुखार और कंपकंपी के साथ नींद से जागना पड़ा। उन्होंने बताया कि चार कंबलों में लिपटने के बावजूद वे लगातार कांपते रहे। दूसरे कैदियों ने भी उन्हें कंबल देकर मदद की। इसके बाद उन्होंने पैरासिटामोल लिया, लेकिन बुखार कम नहीं हुआ।

विक्रम ने आगे बताया, “अगली सुबह मैं जेल अस्पताल गया। वहां थर्मामीटर नहीं था। उन्होंने मेरा ऑक्सीजन चेक किया और कहा कि सब ठीक है। मैंने कहा कि आप मजाक कर रहे हैं। मैं ऑटोइम्यून बीमारी ‘एक्सियल स्पॉन्डायलाइटिस’ से पीड़ित हूं और तेज बुखार मेरे लिए खतरनाक हो सकता है। डॉक्टर ने आखिरकार एक नोट लिखकर मुझे अस्पताल ले जाने की अनुमति दी, लेकिन कोई नहीं आया।”

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विक्रम भट्ट ने देरी का जिक्र करते हुए लिखा, “पहले पुलिस एक VIP की सुरक्षा में व्यस्त थी। फिर वे एक आदिवासी मेले के प्रबंधन में लगे थे। दिन बीतते गए और मैं बैरक में इंतजार करता रहा। मेरे दिन दर्द में और रातें बुखार में गुजर रही थीं।”

उन्होंने आगे लिखा कि उन्होंने अपनी डाइट से तेल और नमक हटा दिया, खूब पानी पीना शुरू किया और एक देवी की तस्वीर के सामने बैठकर प्रार्थना की। उन्होंने कहा, “मैंने कहा-अगर तुम हो… अगर मेरी प्रार्थनाओं का कभी कोई मतलब रहा है… तो कोई चमत्कार दिखाओ। मैं यहां मरना नहीं चाहता। मेरे बच्चे, मेरी पत्नी और मेरे 90 साल के पिता को मेरी जरूरत है।”

स्वास्थ्य में सुधार के बाद विक्रम भट्ट ने देवी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मुझे मेरी जिंदगी देने के लिए धन्यवाद।” उन्होंने यह भी बताया कि बाद में उन्होंने एक अधिकारी से इलाज में हुई देरी के बारे में पूछा। उन्होंने निष्कर्ष में कहा, “अगर यह इमरजेंसी होती तो क्या करते? अधिकारी ने कहा-ओह, तब हम आपको जेल गार्ड्स के साथ भेज देते। यानी वे पहले भी भेज सकते थे। शायद उन्होंने भेजना जरूरी नहीं समझा या फिर भगवान चाहते थे कि मैं कुछ सीखूं।”

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अंत में उन्होंने लिखा, “जब लोग कहते हैं कि भगवान नहीं है, मैं बहस नहीं करता। मैं बस मुस्कुरा देता हूं, क्योंकि कुछ चमत्कार सिर्फ वही देख सकता है जिसे उनकी जरूरत होती है।”

डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है और यह किसी भी तरह की चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए हमेशा योग्य डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें।