साउथ एक्टर विजय सेतुपति अपनी शानदार और इंटेंस एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं। ‘महाराजा’, ‘विक्रम वेधा’ जैसी शानदार फिल्मों में काम करने से पहले ही एक्टर ने अभिनय की दुनिया में अपना लोहा मनवा लिया था। विजय सेतुपति काफी जमीन से जुड़े एक्टर कहलाए जाते हैं, भले ही आज उन्होंने भरपूर कामयाबी हासिल कर ली हो लेकिन आज भी एक्टर को उसी सादगी भरे अंदाज में देखा जाता है। हाल ही में एक्टर ने अपने संघर्ष भरे दिनों को याद करते हुए बताया कि उनका बचपन पैसों की तंगी में गुजरा और कैसे उनके घर कर्जदार पैसे वसूलने के लिए आते थे।
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विजय सेतुपति काफी गरीब परिवार से थे, उन्होंने अपने बचपन में पैसे की तंगी को काफी करीब से देखा है। बड़े सेलिब्रिटी बनने से पहले वो एक ऐसे घर में बड़े हुए जहां हमेशा पैसे की कमी रहती थी। ट्रूली राम के साथ बातचीत में एक्टर ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि जब वो छोटे थे तो उन्होंने कभी भी एक्टर बनने के बारे में नहीं सोचा था।
विजय सेतुपति ने कहा, “सर, मुझे फिल्मों में काम करने की कभी कोई खास इच्छा नहीं थी। मुझे हमेशा से काम करना पसंद रहा है। स्कूल के दिनों में मैं दिहाड़ी मजदूरी किया करता था। इसके बाद मैंने एक टेलीफोन बूथ पर भी काम किया था।”
विजय सेतुपति ने कहा, “मैंने अपनी जिंदगी में रात की शिफ्ट और शूटिंग के दौरान कई दरवाजे खटखटाए हैं। जब भी मुझे किसी चीज की चाह होती है, तो मैं खुद से पूछता हूं कि मुझे उसकी जरूरत आखिर कितनी है। ऐसे समय में आपकी आर्थिक स्थिति ही तय करती है कि आप क्या चाह सकते हैं और क्या नहीं।”
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उन्होंने बताया कि उनके बचपन की यादें सिर्फ छोटे-मोटे काम करने तक सीमित नहीं हैं। अभिनेता ने उन मुश्किल दिनों को भी याद किया, जब कर्ज वसूलने वाले उनके घर पहुंच जाया करते थे। ऐसे हालात में भी वह हमेशा अपने पिता के साथ खड़े रहते थे और उन्हीं के साथ बैठकर उन परिस्थितियों का सामना करते थे
विजय सेतुपति ने कहा, “लोग कहते हैं कि युवावस्था गरीबी और संघर्ष से भरी होती है। मैंने बहुत छोटी उम्र से ही इन हालातों का सामना किया है। मेरी जिंदगी में उस समय यही सब था। जब भी कर्ज वसूलने वाले घर आते थे या कोई बातचीत के लिए बैठता था, तो मैं ही अपने पिता के साथ बैठता था और उन्हीं हालातों से निपटता था।”
अपने पिता को याद करते हुए अभिनेता ने कहा, “मेरे पिता का एक रोज का नियम था। वह रात करीब साढ़े नौ बजे घर लौटते, अपनी बुलेट बाइक खड़ी करते और फिर हम सबके साथ बांटकर खाने के लिए फ्राइड राइस लेकर आते थे।” इन सभी बातों को याद करते हुए एक्टर की आवाज यहां भारी भी हुई।
विजय सेतुपति तमिलनाडु में राजापलायम शहर के रहने वाले हैं और खुद को हमेशा से उन्होंने एक बिलो एवरेज छात्र माना है। एक ऐसा बच्चा जिसे किसी खेल में कभी कोई रुचि नहीं रही। बहुत कम उम्र में ही उन्हें इस बात का एहसास हो गया था कि जरूरत की चीजें जिंदगी में ना होने का मतलब क्या होता है।
