विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना शादी के बाद अपनी नई ज़िंदगी की शुरुआत कर चुके हैं। उदयपुर में 26 फरवरी को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह के बाद विजय अपनी नई नवेली दुल्हन को तेलंगाना के नागरकुर्नूल ज़िले के थुम्मनपेट लेकर पहुंचे, जो उनका पैतृक स्थान है।

गांव में उनका स्वागत बड़े उत्साह के साथ किया गया। विजय के पैतृक घर को फूलों और रोशनी से सजाया गया था। ढोल-नगाड़ों की आवाज़ और पारंपरिक नृत्य के बीच नवविवाहित जोड़ा गांव पहुंचा। वहां उन्होंने सत्यानारायण स्वामी की पूजा की, जो दक्षिण भारत में किसी शुभ काम की शुरुआत पर के लिए किया जाने वाला ये एक पवित्र अनुष्ठान माना जाता है।

पूजा के समय विजय और रश्मिका दोनों ने सफेद और लाल पारंपरिक वस्त्र पहने हुए थे। पूरे विधि-विधान से कथा और पूजा संपन्न हुई। शादी और बहू के गृह प्रवेश के बाद इस पूजा को करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। माना जाता है कि इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

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गांव के लोगों की बड़ी संख्या इस मौके पर मौजूद रही। बताया गया कि पूजा के बाद करीब दो हजार लोगों के लिए सामूहिक भोज भी रखा गया। यह उनके परिवार की ओर से आभार और खुशी साझा करने का तरीका था।

इससे पहले दोनों ने हैदराबाद में मंदिर जाकर भी दर्शन किए थे। अब उनकी शादी का रिसेप्शन 4 मार्च को हैदराबाद में आयोजित होने वाला है, जिसे निजी और सीमित रखा गया है। हालांकि इस रिसेप्शन में भारतीय सिनेमा के कई कलाकार और देश के बड़े नेता शामिल हो सकते हैं।

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