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Begum Jaan Box Office Collection: कलाकारों की दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद ढीली रही बेगम जान की शुरुआत

स्रीजीत मुखर्जी के डायरेक्शन में बनी विद्या बालन की बेगम जान की शुरुआत थोड़ी ढीली रही। पहले दिन यानी 14 अप्रैल को थिएटर 15 से 20 पर्सेंट भरे नजर आए।

फिल्म बेगम जान का पोस्टर।

स्रीजीत मुखर्जी के डायरेक्शन में बनी विद्या बालन की बेगम जान की शुरुआत थोड़ी ढीली रही। पहले दिन यानी 14 अप्रैल को थिएटर 15 से 20 पर्सेंट भरे नजर आए। अभी तक पहले दिन के फाइनल आंकड़े नहीं आए हैं। लेकिन रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म ने पहले दिन तीन से चार करोड़ रुपए का बिजनेस किया।

बेगम जान फिल्म की शुरूआत दिल्ली से होती है। दिल्ली में देर रात बस में हुई एक घटना आपको सीधे बेगम जान के घर तक ले जाती है और वहां पहुंचाते हैं अमिताभ बच्चन। जी हां इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ने अपनी आवाज दी है। वह कहानी सुनाने की शुरुआत करते हैं। सीन की शुरुआत में अगर विद्या बालन के बारे में सोच रहे हैं तो बता दें कि पहले सीन में इला अरुण एक बच्ची को कहानी सुनाती नजर आ रही हैं।

असल जिंदगी में चटक और वाइब्रेंट रंगों में नजर आने वाली इला अरुण फिल्म में सादी सफेद साड़ी और साधारण दिखी हैं। वह रानी लक्ष्मी बाई की कहानी सुना रही हैं और एंट्री होती है रानी लक्ष्मी बाई बनी विद्या बालन की। फिल्म में विद्या बालन कोठे की मालकिन के रोल में हैं। ‘बेगम जान’ ये ऐसी महिला है जो धंधे के अलावा अपने साथ रह रही सभी लड़कियों के लिए एक गार्जियन के तौर पर है। लड़कियों का ध्यान रखना उनकी जरूरतों का खयाल रखना उनका काम है।

कहानी की बात करें तो रेडक्लिफ लाइन खिंचने के साथ शुरू होती है बेगम जान और उनके कोठे की मुसीबत। सरकारी अफसर घर पहुंचते तो बताते हैं कि कोठे के बीचोंबीच एक तार खींची जाएगी जो देश को दो हिस्सों में बांटेगी। बेगम जान को यकीन होता है कि राजा साहब (नसीरुद्दीन शाह) उनका कोठा बचा लेंगे। उनको संदेश भेज कर बुलाया जाता है। उस दिन मदद का वादा कर लौटे राजा साहब निराश वहां आते हैं और बेगम जान को कोठा खाली करने की सलाह देते हैं। यहां से शुरू होती है अपने घर को बचाने की लड़ाई।

अब सब लड़कियां ठानती हैं कि वह मिल कर अपने घर को बचाएंगी। लेकिन वो नहीं जानतीं कि उनकी राह में मुसीबतों के लिए कबीर (चंकी पांडेय) को पैसे दिए जा चुके हैं। बाहर के अलावा बेगम जान के घऱ का और दुश्मन था जो दोस्त की शक्ल में अपनी चाल चल रहा था। राजा साहब के पीछे हटने के बाद अपने घर के लिए सभी महिलाओं का संघर्ष देखने लायक है।

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