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आशा पारेख ने कहा- शोहरत के बावजूद इंसान पड़ जाता है अकेला, मुझे भी आया था सुसाइड का ख्याल

अदाकारा ने कहा कि कई बार अभिनेता लाखों प्रशंसकों का प्यार मिलने के बाद भी अकेले होते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वह अकेलापन होता है। शीर्ष स्थान पर आप हमेशा अकेले होते हो।

Author नई दिल्ली | April 6, 2017 5:22 PM
आशा पैरेख ने बताया जिंदगी का कड़वा सच। (Image Source: Express Archive)

अपनी बेहतरीन अदाकारी के दम पर विभिन्न किरदारों को बड़े पर्दे पर जीने वाली 1960 के दशक की प्रतिष्ठित अदाकारा आशा पारेख का कहना है कि शोहरत की गलियों में भी इंसान कई बार अकेला पड़ जाता है। अपने जमाने की सर्वश्रेष्ठ अदाकारा का कहना है एक दौर ऐसा भी था जब उन्हें अवसाद का सामना करना पड़ा। वर्ष 1959 से 1973 तक बॉलीवुड पर राज करने वाली अदाकारा ने शम्मी कपूर, देव आनंद, राजेन्द्र कुमार, राजेश खन्ना जैसे कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया है। आशा पारेख ने ‘पीटीआई भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘ मेरे लिए वह एक बेहद बुरा दौर था। मैंने अपने माता-पिता को खो दिया था। मैं बिल्कुल अकेली थी और मुझे सबकुछ खुद ही संभालना पड़ता था। मैं बेहद दुखी महसूस करती थी और कई बार ऐसे :आत्महत्या: ख्याल भी आते थे। फिर मैं उससे बाहर निकली। वह काफी संघर्ष भरा था, मुझे उन सब से निकलने के लिए डॉक्टर की मदद लेनी पड़ी। ’’

अदाकारा ने कहा कि कई बार अभिनेता लाखों प्रशंसकों का प्यार मिलने के बाद भी अकेले होते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वह अकेलापन होता है। शीर्ष स्थान पर आप हमेशा अकेले होते हो। मैं खुशकिस्मत थी कि मेरे प्यारे माता-पिता मेरे साथ थे। मेरे करियर, मेरी जिंदगी में मेरी मां हमेशा मेरा सहारा बनी रही। इसलिए उन्हें खोने के बाद, मैं तनाव का शिकार हो गई थी। यह एक बड़ी राहत की बात है कि वह दौर खत्म हो चुका है। ’’

आशा पारेख ने बतौर बाल कलाकार अपने करियर की शुरूआत 1992 में फिल्म ‘आसमान’ से की थी। ‘जब प्यार किसी से होता है’, ‘फिर वो ही दिल लाया हूं’, ‘तीसरी मंजिल’ ‘बहारों के सपने’, ‘प्यार का मौसम’, ‘कटी पतंग’ और ‘कारवां’ उनके करियर की बड़ी हिट फिल्मों में शुमार हैं। आशा पारेख इन दिनों अपने आत्मकथा ‘द हिट गर्ल’ की रिलीज होने की तैयारियों में जुटी हैं। इसके सह लेखक खालीद मोहम्मद हैं। यह 10 अप्रैल को लॉन्च होगी।

आशा पारेख ने कहा है कि केन्द्रीय मंत्री नितिन गड़करी का यह बयान कि पद्मभूषण पुरस्कार पाने के लिए मैं उनके ‘‘पीछे ’’पड़ी थी, काफी कष्टप्रद था। राष्ट्रीय राजमार्ग एंव परिवहन मंत्री ने पिछले वर्ष कहा था कि आशा पारेख ने इस पुरस्कार के लिए सिफारिश लगवाने के वास्ते उनसे मुलाकात की थी।

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