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Vat Savitri Vrat 2020: ‘संतोषी मां’ बनीं ग्रेसी सिंह ने बताई सावित्री सती की कथा, बताया वट सावित्री व्रत का महत्व

Vat Savitri Vrat 2020: वट पूर्णिमा के अवसर पर ग्रेसी सिंह और तन्वी डोगरा बताती हैं कि वट सावित्री व्रत का महत्व क्या है और इसे कैसे रखा जाता है।

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Vat Savitri Vrat 2020, Santoshi Maa – Sunayein Vrat Kathayein: बॉलीवुड एक्ट्रेस ग्रेसी सिंह इन दिनों टेलीविजन पर ‘संतोषी मां’ के रूप में नजर आ रही हैं। ‘संतोषी मां- सुनाएं व्रत कहानियां’ (Santoshi Maa – Sunayein Vrat Kathayein) शो को दर्शकों के बीच इन दिनों काफी पसंद किया जा रहा है। शो में एक्ट्रेस तन्वी डोगरा भी हैं जो ‘संतोषी मां’ में स्वाति की भूमिका निभा रही हैं। वट पूर्णिमा के अवसर पर ग्रेसी सिंह और तन्वी डोगरा बताती हैं कि वट सावित्री व्रत का महत्व क्या है और इसे कैसे रखा जाता है।

एण्ड टीवी के शो‘संतोषी मां सुनाएं व्रत कथाएं’में संतोषी मां की भूमिका निभा रहीं ग्रेसी सिंह कहती हैं ”महान सती के रूप में ख्यात यह दिन सावित्री के अपने पति के प्रति अगाध समर्पण का है। अश्वपति की बेटी को सत्यवान से प्रेम हो जाता है और यह जानते हुए कि उसका जीवनकाल छोटा है फिर भी उससे शादी कर लेती है। शादी के बाद वह हर दिन अपने पति की लंबी आयु के लिये प्रार्थना करना शुरू कर देती है। एक दिन जब सत्यवान वट वृक्ष के नीचे आराम कर रहा था, अचानक ही उसकी मृत्यु हो जाती है।’

‘जब यम उसकी आत्मा लेने पहुंचते हैं तो सावित्री सामने खड़ी हो जाती है। यम उसके पति की आत्मा के बदले तीन वरदान देते हैं, एक के बाद एक अपने तीसरे वरदान में वह सत्यवान से अपने बच्चे का वरदान मांग लेती है और उसे वह वरदान मिल जाता है। चतुराई भरे जवाब और अपने पति के प्रति प्रेम से हैरान यमराज उसके पति को जीवनदान दे देते हैं। सत्यवान उसी वट वृक्ष के नीचे जीवित खड़ा हो जाता है और उस दिन से ही उस दिन को ‘वट सावित्री व्रत’ के नाम से जाना जाता है।’

वहीं ‘संतोषी मां सुनाएं व्रत कथाएं’ की एक्ट्रेस तन्वी डोगरा भी कहती हैं, ‘उत्तर भारत में शादीशुदा महिलाएं अपने पति की अच्छी सेहत, सफलता और लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। यह व्रत सावत्री का अपने पति सत्यवान को यम के चंगुल से छुड़ा लाने की लगन और इच्छाशक्ति पर आधारित है। व्रत सावित्री से जुड़ी पूजा और व्रत कम्युनिटी स्तर पर या अकेले घर पर भी रखा जाता है। पत्नियां व्रत रखती हैं और दुल्हन की तरह तैयार होकर वट वृक्ष की पूजा करती हैं।’

उन्होंने आगे बताया- ‘वट वृक्ष पर जल, अक्षत, धूपबत्ती, दीया, कुमकुम और फूल चढ़ाया जाता है। उसके बाद महिला पेड़ के इर्द-गिर्द लाल या पीले रंग का धागा बांधती हैं। मंत्रों के उच्चारण के साथ वृक्ष की परिक्रमा करती हैं। यह चार दिनों का व्रत होता है, जिसमें पहले तीन दिन फल खाया जा सकता है और चैथे दिन चांद को जल चढ़ाया जाता है। महिलायें अपना व्रत खोलती हैं और एक साथ मिलकर सावित्री की पूजा करती हैं। साथ ही महिलाएं सावित्री तथा सत्यवान की कथा सुनती हैं।’

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