रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े थे, अब फिल्म का पार्ट 2 आ रहा है और फिल्म की एडवांस बुकिंग ने भी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस बीच फिल्म के कंटेंट ने लोगों के बीच नई बहस को जन्म दिया है, और इसका कनेक्शन क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी से है।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने रविवार, 15 मार्च 2026 को नई दिल्ली में खिलाड़ियों को ‘बीसीसीआई नमन अवॉर्ड्स’ दिए। यह सम्मान उन्हें 2024–2025 सीजन में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए दिये गए। इस दौरान वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन और हार्दिक पंड्या जैसे खिलाड़ियों से रैपिड सवाल भी पूछे गए।
जब पसंदीदा फिल्म की बात हुई तो वैभव सूर्यवंशी ने अपनी फेवरिट फिल्म के बारे में बात करते हुए ‘धुरंधर’ का जिक्र किया। अब यहीं से विवाद शुरू हो गया।
CBFC और नाबालिग नियम
CBFC (सेंसर बोर्ड) ने ‘धुरंधर’ को A रेटिंग दी है, यानी इसे 18 साल से कम उम्र के लोग नहीं देख सकते। सेंसर रेटिंग्स का उद्देश्य बच्चों को उनके उम्र के अनुकूल कंटेंट उपलब्ध कराना है।
वैभव सिर्फ 15 साल के हैं जबकि रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ को सेंसर बोर्ड ने A रेटिंग दी है, इसका मतलब है कि 18 साल से कम उम्र के लोग ये फिल्म नहीं देख सकते हैं।
सोशल मीडिया पर नैतिक और कानूनी बहस
सोशल मीडिया पर अब नैतिक और कानूनी बहस शुरू हो गई है और लोग इस घटना पर चिंता जता रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि सेंसर की रेटिंग विशेषज्ञों की देख-रेख में होती है और इस बात का ध्यान रखा जाता है कि नाबालिग, व्यस्क कंटेंट से दूर रहें।
मगर जब मशहूर हस्ती जिन्हें लाखों युवा फॉलो करते हैं वो ही इस तरह के कंटेंट से दूर नहीं रहेंगे और खुलकर इस बारे में बात करेंगे तो अभिभावकों की चिंता जायज हो जाएगी।
जहां कई यूजर्स ने नाबालिगों द्वारा एडल्ट कंटेंट देखने पर चिंता जताई। वहीं, कुछ लोगों के रिएक्शन्स अनुमान और अटकलों पर आधारित हैं, जैसे कि वैभव ने फिल्म कैसे देखी होगी? कई लोगों ने तो वैभव की उम्र पर भी सवाल किए हैं।
जहां कई लोगों का कहना है कि आजकल कोई सेंसर की बातों को नहीं मानता है और हर उम्र के लोग हर उम्र का कंटेंट कन्ज्यूम कर रहे हैं और ये हमारे समाज के लिए अच्छा नहीं है।
वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि सिर्फ वैभव ही नहीं पूरे भारत में ना जाने कितने बच्चे हैं जो अभी 18 साल के नहीं हैं मगर उन्होंने धुरंधर फिल्म देखी होगी।
वहीं सोशल मीडिया पर एक अभिभावक ने चिंता जताते हुए कहा है कि उनका बेटा 12 साल का है और उसने भी ये फिल्म देख ली है।
क्या कहती है रिसर्च?
विशेषज्ञों का मानना है कि 15 साल की उम्र में किशोरों का मस्तिष्क विकास के चरण में होता है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA, 2020) की रिसर्च बताती है कि इस उम्र में अत्यधिक हिंसात्मक या व्यस्क कंटेंट देखने से किशोरों के व्यवहार में आक्रामकता आ सकती है।
ओल्सेन एट अल., 2019 (Journal of Youth Studies) के अध्ययन में पाया गया कि 14–16 साल के किशोरों द्वारा 18+ कंटेंट देखने की वजह से वे वास्तविकता और काल्पनिक हिंसा के बीच अंतर करना भूल सकते हैं। यही वजह है कि सेंसर बोर्ड (CBFC) कड़े नियमों का पालन करता है।
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माता-पिता और अभिभावकों की जिम्मेदारी
बच्चों की ऑनलाइन और ओटीटी प्लेटफॉर्म गतिविधियों पर नजर रखें।
नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम और अन्य स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर ‘पेरेंटल कंट्रोल’ फीचर का उपयोग करें।
नाबालिगों के लिए एडल्ट कंटेंट से दूर रहने की शिक्षा दें।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जागरूकता के उद्देश्य से है। CBFC और कानूनी नियमों का पालन करना हर नागरिक और सिनेमाघर की जिम्मेदारी है।
