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अपने हक के लिए खड़े बैंक वालों को क्या नाम दिया जाएगा?- बोलीं उर्मिला मातोंडकर तो आने लगे ऐसे कमेंट्स

बैंक कर्मचारियों के हड़ताल पर बॉलीवुड अभिनेत्री और शिवसेना नेता उर्मिला मातोंडकर का कहना है कि इनके आंदोलन को नहीं दिखाया जा रहा। उनका कहना है कि डिमोनिटाइजेशन के दौरान इन्हीं कर्मचारियों की....

bank strike 2021, urmila matondkar, bank privatizationउर्मिला मातोंडकर ने बैंक हड़ताल पर अपनी राय दी है (Photo-Indian Express/File)

बैंकों के निजीकरण के विरोध में बैंक कर्मचारियों ने दो दिवसीय हड़ताल किया। सरकार द्वारा बैंकों के निजीकरण के फैसले से बैंक कर्मचारी काफी नाराज़ हैं और वो यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के तले लगातार आंदोलन कर रहे हैं। बैंकों में तालाबंदी से आम जनता को काफी परेशानी उठानी पड़ी है लेकिन बैंक कर्मचारियों के इस आंदोलन को नेशनल मीडिया में ज्यादा कवरेज नहीं दिया जा रहा जिस पर कई लोगों ने सवाल उठाए हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री और शिवसेना नेता उर्मिला मातोंडकर ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि इन्हीं चैनलों ने डिमोनिटाइजेशन के दौरान इन बैंक कर्मचारियों की वाहवाही की थी और अब इनके आंदोलन को नहीं दिखाया जा रहा। उर्मिला मातोंडकर ने अपने ट्विटर पर लिखा, ‘सारे बड़े मेनस्ट्रीम चैनलों को बैंक हड़ताल कवर करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। हालांकि इन्हीं चैनलों ने डिमोनिटाइजेशन के दौरान इन बैंक कर्मचारियों की वाह- वाह की थी। अब देखना है कि अपने हक़ के लिए खड़े बैंक वालों को क्या नया नाम दिया जाएगा।’

उर्मिला मातोंडकर के इस ट्वीट पर यूजर्स भी अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। पत्रकार रणविजय सिंह लिखते हैं, ‘देशद्रोही बैंककर्मी।’ प्रदीप मंडल नाम के यूजर ने व्यंग के अंदाज में लिखा, ‘भाइयों और बहनों, इन बैंक कर्मचारियों की वजह से ही जनता को 15 लाख नहीं मिला क्योंकि ये सब कर्मचारी डकैत हैं, इसलिए मैने भी बैंक अंबानी और अडानी को देने का निर्णय कर लिया है, सही किया है न।’

 

 

यादव भैया नाम के यूजर ने उर्मिला मातोंडकर को जवाब दिया, ‘किसानों को तो ये लोग बोल रहे थे कि असली किसान खेत में हैं, ये लोग खालिस्तानी और आतंकवादी हैं। अब इन बैंक वालों को बोल कर दिखाओ कि ये लोग आतंकवादी हैं, असली बैंक वाले तो बैंक में काम कर रहे हैं।’

 

मोदी भक्त नाम के यूजर ने लिखा, ‘ये विदेशी साजिश है मोदी को बदनाम करने की।’ विकास नाम के यूजर लिखते हैं, ‘आतंकवादी कह दिया जाएगा मैडम।’

 

सरकार ने बजट में दो बैंकों के निजीकरण का ऐलान किया था, हालांकि उनके नाम नहीं बताए थे, इसी को लेकर विरोध हो रहा है। हाल के दिनों में धरना प्रदर्शन किया गया लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो बैंक कर्मचारियों ने 15 और 16 मार्च को हड़ताल कर दिया।

बैंक कर्मचारियों के इस हड़ताल के बीच बुधवार को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने भरोसा दिलाया कि देश के सभी बैंकों का निजीकरण नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिन बैंकों का निजीकरण होगा, उनके सभी कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जाएगी।

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