यूम्मा… यूम्मा…

जम्मू-कश्मीर के जिक्र के साथ आज भले हाल और हवाले थोड़े बदल जाएं पर धरती पर जन्नत होने का खिताब आज भी भारत के इस सिरमौर प्रदेश के ही पास है।

जम्मू-कश्मीर के जिक्र के साथ आज भले हाल और हवाले थोड़े बदल जाएं पर धरती पर जन्नत होने का खिताब आज भी भारत के इस सिरमौर प्रदेश के ही पास है। गीतकार हसरत जयपुरी ने फिल्म ‘जब प्यार किसी से होता है’ में कश्मीरी रंगत बखूबी बिखेरी थी। एक टीवी कार्यक्रम ‘दिस वीक दैट इयर’ में उन्होंने इससे जुड़ा मजेदार किस्सा सुनाया था। एक बार वे (हसरत) संगीतकार जयकिशन के साथ घूमने के लिए कश्मीर गऐ। वहां जब कश्मीरी युवतियों को पता चला कि वे हसरत हैं, तो वे उन्हें घेर कर कहने लगीं, ‘क्या कहें हसरत साब, आप तो क्या लिखते हैं यूम्मा।’ ‘यूम्मा’ शब्द उन्हें जम गया और बाद में लोकप्रिय गीत की शक्ल में ‘ये आंखें उफ यूम्मा’ के तौर पर सामने आया।

बरसों बाद कश्मीर का लोकगीत फिल्म ‘मिशन कश्मीर’ में सुनने को मिला- बुंबरो-बुंबरो श्याम रंग बुंबरो, आए हो किस बगिया से। यह गीत मूल रूप में कश्मीरी भाषा का है। फिल्मांकन में भी कश्मीरी पोशाक और वहां के नृत्य की झलक दिखलाई पड़ती है।

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