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नृत्यः कथक में राधा के रंग

कथक नृत्य के क्षेत्र में वरिष्ठ कलाकारों के साथ युवा प्रतिभाएं भी अपने को स्थापित करने के लिए प्रयासरत हैं।

कथक डांसर उमा शर्मा

कथक नृत्य के क्षेत्र में वरिष्ठ कलाकारों के साथ युवा प्रतिभाएं भी अपने को स्थापित करने के लिए प्रयासरत हैं। इस क्रम में इस्कॉन आॅडिटोरियम में नृत्य समारोह में वरिष्ठ कथक नृत्यांगना उमा शर्मा और उनकी शिष्याओं ने नृत्य प्रस्तुत किया। उमा शर्मा ने अष्टछाप कवियों सूरदास, बिहारी, देव और अन्य कवियों की पदों और रचनाओं पर नृत्य पेश किया। ब्रज कला केंद्र की ओर से हुए कार्यक्रम में उमा शर्मा और शिष्याओं ने नृत्य रचना श्रीराधा पेश की। इसका आरंभ शरद पूर्णिमा को कृष्ण और गोपियों के रास नृत्य से हुआ। कीर्तन ’गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो, ‘नाचत लाल गोपाल रास में’ व ‘होली खेलत नंदलाल बृज में’ रचनाओं को आधार बना कर शिष्याओं ने नृत्य किया। इस प्रस्तुति के क्रम में कवित्त ‘झिझकत-झिझकत-ता-थेई-तत-थेई’ व ‘जगतगुरु जगदंबे राधा’ के बोलों पर भी उन्होंने राधा व कृष्ण के भावों को उकेरा।

नृत्य रचना में महारास के दृश्य को भी चित्रित किया गया। उमा शर्मा ने राधा के विरह भावों को उकेरा। इसके लिए कवि विद्यापति की रचना ‘माधव माधव सुमिरी सुंदर मेलि मंगाई’ और कवि देव ‘राधे कहिहें कित छमियों बृजनार’ का बखूबी चुनाव किया गया था। वहीं सूरदास के पद ‘अंगहि कोटि काम छवि लज्जित’ में राधा-कृष्ण के मिलन को उन्होंने दर्शाया।उन्होंने बिहारी की रचना ‘मेरी भव बाधा हरो’, सूरदास के पद ‘औचक हि देखी तहं राधा’ व ‘बूझत श्याम कौन तू गोरी’ पर राधा के अलग-अलग भावों को दर्शाया।

एक अन्य समारोह मावलंकर हॉल में विश्व मित्र परिवार और भारतीय कला विश्व की तरफ से किया गया था। इसमें जयपुर घराने की नृत्यांगना शांभवी शुक्ल ने कथक पेश किया। उन्होंने आगाज शिव स्तुति से किया। यह स्तुति छंद ‘जय शिव शंकर’ व रचना ‘शिवकांत शंभू’ पर आधारित थी। इसमें शिव के रूप निरू पण था। इसके बाद, शांभवी ने तीन ताल में शुद्ध नृत्य पेश किया। उन्होंने पंडित किशन महाराज की गणेश परण ‘गणानाम गणपति धिंन-धिंन-नग-नग’ में गणपति के रूप को हस्तकों व भंगिमाओं से दर्शाया। नृत्यांगना ने पंडित राजेंद्र गंगानी की रचना में ‘धा’ की कथा को पिरोया।

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