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‘उड़ता पंजाब’ विवाद पर बोले अनुराग कश्यप : हमें ब्लैकमेल किया जा रहा है

अनुराग कश्यप ने लिखा, ‘फिल्म की रिलीज तारीख आगे बढ़ाने का उनका (सेंसर बोर्ड) दबाव, और इसके हटाए गए दृश्यों को मान लेना, एक सोची समझी साजिश थी।'
Author मुंबई | June 9, 2016 14:48 pm
बॉलीवुड फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप।

फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप का कहना है कि वह अपनी आगामी फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ के लिए सेंसर बोर्ड के प्रमाणपत्र पर शुरू हुए विवाद में ‘ब्लैकमेल’ किया हुआ मससूस कर रहे हैं। कश्यप ने कहा कि अब से पहले के सभी मामलों में, चाहे वह सेंसर बोर्ड का रहा हो अथवा सरकार के साथ का, उन्हें कभी नहीं लगा कि उन्हें खामोश किया जा रहा था, लेकिन इस विशेष मामले में स्थिति अलग है। अनुराग ने कहा, ‘….मुझे कभी नहीं लगा कि मुझे चुप कराया जा रहा है अथवा मर्जी के बगैर कुछ करने के लिए ब्लैकमेल किया जा रहा है। प्रचलित और मान्य व्यवस्था में यह पूरी लड़ायी साफ-सुथरी थी। लेकिन इस मामले में पता नहीं क्या चल रहा है ..?’

कश्यप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ‘इन सभी विवादों में एक व्यक्ति के तौर पर हमें पता होता था कि विवाद में हमारा सामना किस से हो रहा है चाहें वह कोई व्यक्ति है या उसके विचार अथवा बोर्ड की समझ से उसकी असहमति है। प्रेस में जाने के एक दिन बाद और अदालत में पहली सुनवाई के तुरंत बाद हमें एक आधिकारिक चिट्ठी मिली है।’

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उल्लेखनीय है कि उड़ता पंजाब के लिए प्रमाणपत्र पर सेंसर बोर्ड की ओर से उठाई गई आपत्तियों से नाराज फिल्म जगत के कुछ विशिष्ट कलाकारो की अगुवाई में एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन बुलाया गया था, जिसमें कलाकारों ने सेंसर बोर्ड के रवैये और आपत्तियों पर नाराजगी जताई थी। कश्यप का यह ताजा पोस्ट उसीके कुछ घंटों बाद आया है। ‘बांबे वेल्वेट’ जैसी फिल्म बनाने वाले निर्देशक ने कहा कि पहलाज निहलानी झूठ बोल रहे हैं और फिल्म रिलीज करने की तिथि आगे बढ़ाने का दबाव डाल रहे हैं। फिल्म की रिलीज तारीख 17 जून को निर्धारित है।

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उन्होंने लिखा, ‘मुझे निहलानी के कार्यालय से सात जून की तारीख वाली बुधवार (8 जून) को एक चिट्ठी मिली है, जिसमें उनसे इसकी आधिकारिक प्रति हमें देने की गुजारिश की गई है। इसलिए उनका यह कहना कि उन्होंने सोमवार (6 जून) को मुझे चिट्ठी भेजी थी, सरासर झूठ है और उनके द्वारा दिए गए सारे प्रमाण भी झूठ हैं।’ कश्यप ने लिखा, ‘फिल्म की रिलीज तारीख आगे बढ़ाने का उनका दबाव, और इसके हटाए गए दृश्यों को मान लेना, एक सोची समझी साजिश थी। उनका मेरे ऊपर आम आदमी पार्टी से पैसे लेने का आरोप भी झूठा है और यह असली मुद्दे को भटकाने और इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश है। इसमें सभी लोग शामिल हैं जोकि वास्तविक मुद्दे को राजनीति के इस आरोप प्रत्यारोप के खेल में गुम करने में लगे हैं।’

कश्यप ने अपने प्रशंसकों से ऑनलाइन फैलाई जाने वाली अफवाहों पर भरोसा नहीं करने की अपील की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका राजनीति की ओर कोई झुकाव नहीं है।

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अनुराग कश्यप ने लिखा, ‘मैं आपसे किसी तरह की अफवाह में नहीं पड़ने की विनती करता हूं और अभिव्यक्ति की आजादी के असली मुद्दे पर डटे रहने, खुली सोच रखने और फिल्म निर्माताओं के तौर पर सेंसरशिप के साथ विवादों में अपने अधिकारों के लिए लड़ने को कहता हूं।’ उन्होंने लिखा, ‘नहीं, मैं आम आदमी पार्टी अथवा कांग्रेस का सदस्य नहीं हूं और न ही मैं किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ा हूं। मैंने बिना पैसे लिए भी कई फिल्में बनाई हैं। मैं हराम के पैसे स्वीकार नहीं करता।’

अपनी पहली फिल्म ‘ब्लैक फ्राइडे’ को रिलीज करने के लिए बहुत कठिनाई झेलने वाले अनुराग ने कहा, कि वह अपना पक्ष रखने के लिए फेसबुक पर यह सब लिख रहे हैं क्योंकि ऑनलाइन माध्यम में उत्तेजक टिप्पणियां करने वाले लोग इस पूरे मसले को ‘‘जबर्दस्त झूठ और आरोपों के साथ’ भटकाने की कोशिश में हैं। सेंसरशिप के साथ अपने पुराने झगड़ों का उदाहरण देते हुए अनुराग ने कहा, ‘पांच’, जिसके बारे में लोगों को लगता है कि सेंसर ने उसे प्रतिबंधित कर रखा है, वास्तव में रिव्यू कमेटी ने कुछ मामूली दृश्यों को हटाकर और कुछ स्पष्टीकरण लगाने के बाद उस फिल्म के लिए अपनी मंजूरी दे दी थी।
जबकि सेंसर बोर्ड वालों ने ‘ब्लैक फ्राइडे’ के किसी भी दृश्य को हटाये बगैर मंजूरी दे दी थी, लेकिन अदालत ने इसकी सुनवाई के दौरान फिल्म के रिलीज पर रोक लगा दी।

हालांकि दो साल के बाद जस्टिस सब्बरवाल ने इस फिल्म को महोत्सवों मे दिखाए जाने की अनुमति दे दी थी। उन्होंने कहा, कि फिल्म में ‘शिवसेना के संदर्भ वाले केवल कुछ दृश्यों, जिन्हें दबाव में हटाया गया था, को छोड़कर फिल्म की चीजों को बरकरार रखते हुये इसके प्रदर्शन की मंजूरी मिल गई थी। कश्यप ने कहा, ‘गुलाल निर्माण में ही अटक गई और केवल एक संवाद के कुछ संदर्भो को ही मूक करना पड़ा।’ निर्देशक ने कहा, कि ‘अग्ली’ के प्रदर्शन की तारीख में देरी एक अच्छा निर्णय था, क्योंकि वह लोग धूम्रपान-रोधी प्र्रतीक को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय से लड़ना चाहते थे। उन्होंने कहा कि ‘वाटर’ को तो बनाने ही नहीं दिया गया। अनुराग ने ‘वाटर’ फिल्म की पटकथा लिखी है।

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