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‘उड़ता पंजाब’ विवाद: बॉम्बे हाई कोर्ट ने सेंसर बोर्ड से मांगा स्पष्टीकरण

बंबई उच्च न्यायालय ने गुरुवार (9 जून) को सेंसर बोर्ड से इस बात का स्पष्टीकरण देने को कहा कि वह फिल्म से ‘पंजाब’ शब्द हटाने पर जोर क्यों दे रहा है।

Author मुंबई/नई दिल्ली | June 9, 2016 10:12 PM
बंबई उच्च न्यायालय (फाइल फोट)

फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ को लेकर उठे विवाद के बीच बंबई उच्च न्यायालय ने गुरुवार (9 जून) को सेंसर बोर्ड से इस बात का स्पष्टीकरण देने को कहा कि वह फिल्म से ‘पंजाब’ शब्द हटाने पर जोर क्यों दे रहा है। इस पर नए सिरे से विवाद छिड़ गया है। हालांकि केंद्रीय फिल्म प्रमाण बोर्ड (सीबीएफसी) ने कहा कि फिल्म के नाम से पंजाब शब्द हटाने समेत उसकी समीक्षा समिति द्वारा सुझाए गए सभी 13 बदलाव समुचित और वैध है।

न्यायमूर्ति एस सी धर्माधिकारी की अध्यक्षता वाली पीठ ‘उड़ता पंजाब’ के निर्माता फैंटम फिल्म्स द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही थी। निर्माता बोर्ड की समीक्षा समिति के आदेश से असंतुष्ट हैं जिसने फिल्म के 17 जून को प्रदर्शन से पहले उसमें बदलाव करने का सुझाव दिया है।

न्यायमूर्ति धर्माधिकारी ने नशीले पदार्थों की लत पर बनी ‘उड़ता पंजाब’ की तुलना पूर्व में जारी एक अन्य फिल्म ‘‘गो, गोवा गोन’’ से करते हुआ कि फिल्म में गोवा की स्थिति दर्शायी है जहां लोग पार्टी में मेलजोल बढ़ाने के लिए जाते हैं तथा प्रतिबंधित ड्रग्स लेते हैं। न्यायाधीश ने कहा, ‘यदि गोवा को उस फिल्म में ड्रग के दुरूपयोग के स्थल के रूप में दिखाया जा सकता है तो ‘उड़ता पंजाब’ में पंजाब को दिखाने में क्या बुराई है।’

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सेंसर बोर्ड के वकील ने दलील दी कि फिल्म में 13 बदलाव करने का समीक्षा समिति का सुझाव संबंधी आदेश मनमाना नहीं है तथा समिति ने यह सुझाव देते समय अपना दिमाग लगाया है। वकील ने कहा, ‘हम पंजाब एवं उसके लोगों के सन्दर्भ तथा फिल्म में इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर आपत्ति कर रहे हैं।’

दलीलों को सुनते हुए अदालत ने कहा कि वह सेंसर बोर्ड द्वारा दिए गए दो सुझावों से संतुष्ट नहीं है। इन सुझावों में समिति ने चंडीगढ़, अमृतसर, तरनतारन, जशनपुरा, मोगा एवं लुधियाना जैसे स्थानों का सन्दर्भ हटाने को कहा है। समीक्षा समिति के अन्य सुझावों के बारे में सेंसर बोर्ड के वकील ने कहा कि वह इस बारे में कल अपनी दलील देंगे। इसके बाद अदालत ने मामले को टाल दिया।

बहरहाल, अनुराग कश्यप की प्रोडक्शन कंपनी फैंटम फिल्म्स के वकील रवि कदम ने कहा कि आदेश बिना सोचे समझे जारी किया गया और यह मनमाना है। उन्होंने कहा, ‘पंजाब अवधारणा का अभिन्न अंग है तथा इसे फिल्म से अलग नहीं किया जा सकता।’ कश्यप ने अलग से कहा कि उन्हें ‘उड़ता पंजाब’ के लिए प्रमाणपत्र पाने के लिए सेंसर बोर्ड के साथ अपनी पूरी लड़ाई में लग रहा है कि उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पहले कभी भी बोर्ड या सरकार के साथ उनके झगड़ों में उन्होंने कभी यह महसूस नहीं किया कि उन्हें चुप किया जा रहा है, लेकिन यह मामला अलग है। पंजाब में विपक्षी दल जहां सत्तारूढ़ अकाली दल-भाजपा पर ‘उड़ता पंजाब’ पर रोक लगाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि सरकार को फिल्म से कोई लेना देना नहीं है और यह फिल्म निर्माताओं और सेंसर बोर्ड के बीच का मामला है।

बादल के विरोधी और पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने ‘उड़ता पंजाब’ के निर्माताओं को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि 17 जून को इसे अमृतसर में रिलीज करने के लिए इसकी बिना सेंसर वाली सीडी उन्हें मुहैया कराएं। कश्यप को बसपा अध्यक्ष मायावती का समर्थन मिला जिन्होंने कहा कि ‘उड़ता पंजाब’ में कुछ गलत नहीं है और पार्टी इसका समर्थन करती है।

उधर अशोक पंडित के बाद सेंसर बोर्ड के एक और सदस्य चंद्रमुख शर्मा ने भी इसके प्रमुख पहलाज निहलानी के कामकाज के खिलाफ सामने आते हुए कहा कि वह उनसे अनुरोध करेंगे कि सरकार के पास जाएं और सीबीएफसी का नाम बदलकर ‘सरकार का पीआरओ’ करने के लिए कहें।

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