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सियासी हुआ मामला, हाई कोर्ट पहुंचे ‘उड़ता पंजाब’ के निर्माता

निर्माताओं ने अदालत से कहा कि वे समिति की ओर से सुझाए गए बदलावों का अध्ययन करेंगे और फिर तय करेंगे कि उन्हें चुनौती दी जाए या नहीं।

Author मुंबई | June 9, 2016 2:03 AM
फिल्म उड़ता पंजाब 17 जून को रिलीज होनी है।

मादक पदार्थ पर केंद्रित बॉलीवुड फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। सियासी रंग लेने के साथ अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है, जब कि केंद्र और पंजाब सरकार ने कहा कि इस विवाद से उनका कोई लेना-देना नहीं और किसी तरह का सियासी दबाव नहीं है। इस बीच फिल्म के निर्माता बुधवार को बंबई हाई कोर्ट पहुंचे और कहा कि उन्हें सेंसर बोर्ड की समीक्षा समिति के आदेश की प्रति मिल गई है और वे समिति की ओर सुझाए गए संशोधनों को चुनौती देने या नहीं देने का निर्णय करने के लिए इसका अध्ययन करना चाहते हैं।

इस फिल्म का निर्माण करने वाली कंपनी फैंटम फिल्म्स ने समीक्षा समिति के आदेश की प्रति की मांग करते हुए अदालत का रुख किया। समिति ने इस फिल्म में कांटछांट करने और पंजाब शब्द हटाने का सुझाव दिया है। हालांकि सुनवाई के दौरान उन्होंने न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी की अगुवाई वाले पीठ को सूचित किया कि वे याचिका में संशोधन करना चाहते हैं क्योंकि उन्हें उसी समय इस आदेश की प्रति मिली है। सेंसर बोर्ड की समीक्षा समिति का आदेश छह जून को जारी किया गया था जिसमें उसने फिल्म में 13 बदलाव करने का सुझाव दिया है।

निर्माताओं ने अदालत से कहा कि वे समिति की ओर से सुझाए गए बदलावों का अध्ययन करेंगे और फिर तय करेंगे कि उन्हें चुनौती दी जाए या नहीं। ऐसी स्थिति में वे याचिका में संशोधन करना चाहेंगे। तद्नुसार अदालत ने अनुराग कश्यप की निर्माण और वितरण कंपनी फैंटम फिल्म्स को याचिका में संशोधन करने का वक्त दे दिया और मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को करने का फैसला किया।

अदालत ने सेंसर बोर्ड से भी इस मामले के रिकार्ड उसके सामने पेश करने को कहा। सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि क्या पीड़ित फिल्मकार सिनेमाटोग्राफ अधिनियम के नियमों के अनुसार फिल्म प्रमाणन अपीलीय न्यायाधिकरण के पास गए बगैर सीधे हाई कोर्ट जा सकते हैं। न्यायाधिकरण संबंधी मुद्दा उठने पर फिल्म निर्माण कंपनी के वकील रवि कदम ने दलील दी कि न्यायाधिकरण के अध्यक्ष शहर से बाहर हैं और वए 14 जून तक नहीं उपलब्ध होंगे। चूंकि फिल्म 17 जून को रिलीज होनी है, इसलिए वे हाई कोर्ट पहुंचे।

उन्होंने कहा कि सिनेमाटोग्राफ अधिनियम भी यह व्यवस्था देता है कि अगर न्यायाधिकरण किसी कारणवश नहीं बैठता है तो पीड़ित पक्ष हाई कोर्ट जा सकता है। समीक्षा समिति ने हाल ही में ‘उड़ता पंजाब’ फिल्म देखी थी और फिल्मकारों को फिल्म से पंजाब शब्द हटाने के अलावा 13 बदलाव करने का सुझाव दिया था।

समिति के अनुसार बदलाव इसलिए सुझाए गए क्योंकि यह फिल्म सिनेमाटोग्राफ अधिनियम के अनुरूप नहीं है। अदालत के बाहर फिल्म निर्माण कंपनी के वकीलों ने कहा, हमने ए प्रमाणपत्र मांगा था और यह फिल्म किसी की भी गलत छवि नहीं पेश करती है। शाहिद कपूर, आलिया भट्ट, करीना कपूर खान, दिलजीत दोसांझ अभिनीत इस फिल्म में यह दर्शाया गया है कि कैसे पंजाब में युवक मादक पदार्थ के सामने घुटने टेक देता है। इस फिल्म से विवाद खड़ा हो गया है। कश्यप ने पार्टियों से सेंसरशिप विवाद से दूर रहने का आह्वान किया है। यह फिल्म 17 जून को रिलीज होने वाली है। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। इसलिए फिल्म को लेकर राजनीतिक दल नया बखेड़ा करना चाहते हैं।

गौरतलब है कि कश्यप ने मंगलवार को सेंसर बोर्ड के प्रमुख पहलाज निहलानी को ‘तानाशाह’ करार देते हुए उन पर हमला किया था और कहा था कि यह ऐसा है जैसे हम उत्तर कोरिया में रह रहे हों। कश्यप को करण जौहर, महेश भट्ट , रामगोपाल वर्मा और मुकेश भट्ट समेत कई फिल्मकारों का समर्थन मिला है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने पंजाब के सत्तारूढ़ अकाली-भाजपा गठबंधन पर इस फिल्म पर सेंसर करने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था जिससे राज्य सरकार ने इनकार किया है।

‘सरकार प्रमाणन प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकती’-

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि प्रमाणन प्रक्रिया स्वतंत्र है। साथ ही अदालती आदेशों में यह स्पष्ट है कि सरकार की इसमें अधिक भूमिका नहीं है। इस मामले में एक अधिकारी ने भारत सरकार बनाम के एम शंकरप्पा मामले में नवंबर 2000 में सुप्रीम कोर्ट के एक पीठ के फैसले का जिक्र किया जिसमें कहा गया है कि ऐसा प्रावधान जिसमें केंद्र को प्रमाणन बोर्ड या अपीलीय अधिकरण के समक्ष लंबित मामले में हस्तक्षेप व समीक्षा करने का अधिकार दिया गया है, वह कानून के शासन का उपहास है।

मुझ पर कोई राजनीतिक दबाव नहीं : पहलाज निहलानी

सेंसर बोर्ड के प्रमुख पहलाज निहलानी ने उन आरोपों को खारिज कर दिया कि उनपर ‘उड़ता पंजाब’ फिल्म की रिलीज को लेकर पंजाब सरकार की तरफ से किसी तरह का राजनीतिक दबाव है। अभिषेक चौबे द्वारा निर्देशित फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ को लेकर सेंसर बोर्ड और फिल्म से जुड़े लोगों के बीच ठनी हुई है। वहीं कुछ राजनीतिक दलों ने भी निहलानी पर पंजाब सरकार के निर्देशानुसार काम करने का आरोप लगाया है।

फिल्म के निर्माता अनुराग कश्यप ने फिल्म में कथित रूप से 89 जगह कांट-छांट करने और साथ ही फिल्म के शीर्षक एवं फिल्म से ‘पंजाब’ शब्द हटाने को कहने को लेकर सेंसर बोर्ड और उसके प्रमुख निहलानी की खुलेआम आलोचना की है। निहलानी से जब पूछा गया कि क्या वह पंजाब सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। मुझ पर कोई राजनीतिक दबाव नहीं है।

निहलानी ने कश्यप पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने सुना है कि फिल्मकार ने पंजाब को खराब तरीके से दिखाने के लिए आम आदमी पार्टी से पैसे लिए हैं। कश्यप द्वार तानाशाह की तरह काम करने की बात कहने पर निहलानी ने कहा कि मैं किसी की निजी राय पर टिप्पणी नहीं कर सकता। यह उनकी अपनी पसंद है। लोग भाषण एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे हैं। यह उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन फिल्म को लोग देखते हैं और हम सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुरूप काम करते हैं।

फिल्म के शीर्षक से ‘पंजाब’ शब्द हटाने की बात को लेकर निहलानी ने कहा कि वह डिस्क्लेमर दे रहे हैं कि फिल्म में काल्पनिक किरदार हैं लेकिन पूरी फिल्म पंजाब पर आधारित है और उन्होंने पंजाब से नाम लिए हैं तो हमारे पास कारण है। हम दिशा निर्देशों के अनुरूप कांट-छांट कर सकते हैं।

फिल्मकारों ने आरोप लगाया था कि निहलानी ने जानबूझकर उन्हें वह पत्र नहीं दिया जिसमें कांट-छांट का उल्लेख है। निहलानी ने इसे लेकर कहा कि निर्माताओं ने खुद ही अब तक पत्र नहीं लिया है और इसकी जगह मीडियाकर्मियों के पास जाकर मामले को सार्वजनिक कर दिया।
उन्होंने कहा कि हम सोमवार को निर्माताओं से मिले थे और कांट-छांट की जानकारी ली। उन्होंने पूछा था कि अगर हम कांट-छांट करते हैं तो क्या आप हमें प्रमाणपत्र दे देंगे? मैंने कहा, ‘बिल्कुल।’ लेकिन वे पत्र लेने नहीं आए।

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