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मेरी फिल्मों को बैन कर देना चाहिए- एक्ट्रेस नहीं बल्कि यह बनना चाहती थीं ट्विंकल खन्ना, मां-बाप के कारण रखा था फिल्मों में कदम

ट्विंकल खन्ना अपने एक्टिंग करियर से बिल्कुल भी खुश नहीं थीं। इतना ही नहीं, वह एक्टर से इतर चार्टर्ड एकाउंटेंट बनना चाहती थीं। इस बात का खुलासा उन्होंने अपने इंटरव्यू के दौरान किया था।

एक्टिंग करियर से खुश नहीं थीं ट्विंकल खन्ना (फोटो क्रेडिट- इंडियन एक्सप्रेस)

बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस ट्विंकल खन्ना ने फिल्म ‘बरसात’ से डेब्यू किया था। इसके बाद उन्होंने ‘बादशाह’, ‘मेला’, ‘खिलाड़ी’, ‘जब प्यार किसी से होता है’ और ‘इतिहास’ जैसी कई फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई। जहां कुछ फिल्में ट्विंकल खन्ना की हिट साबित हुईं तो वहीं कुछ फिल्में बुरी तरह से फ्लॉप भी रही। फिल्मी दुनिया में नाम कमाने के बाद भी ट्विंकल खन्ना अपने एक्टिंग करियर से खुश नहीं थीं। इतना ही नहीं, वह एक्टर से इतर चार्टर्ड एकाउंटेंट बनना चाहती थीं।

ट्विंकल खन्ना ने इस बात का खुलासा पीटीआई को दिये इंटरव्यू में किया था। उन्होंने समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने अपने माता-पिता के कारण बॉलीवुड में डेब्यू किया था। लेकिन उनका मकसद कभी भी एक एक्टर बनने का नहीं था।

इस बारे में बात करते हुए ट्विंकल खन्ना ने कहा, “जब मैंने अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी तो मैं एक चार्टर्ड एकाउंटेंट बनना चाहती थी। लेकिन मेरे माता पिता एंटरटेनमेंट बिजनेस में थे तो वह हमेशा से ही यह चाहते थे कि मैं उनके नक्शे कदम पर चलूं और मैंने किया भी।”

ट्विंकल खन्ना ने इस सिलसिले में आगे कहा “एक्टिंग में 8 सालों के करियर के बाद मुझे इस बात का एहसास हुआ कि मैं एक अभिनेत्री के तौर पर फेल साबित हुई हूं। हालांकि, यह थोड़ा दिल तोड़ने वाला है, लेकिन मैं इस बात से इतनी परेशान नहीं हुई थी। मेरी परवरिश मेरी मां ने की थी और मुझे यह भी मालूम था कि किसी चीज में फेल होना आपकी असफलता नहीं होता।”

इससे इतर अपनी बुक लॉन्चिंग के दौरान ट्विंकल खन्ना ने कहा था कि मैंने एक भी हिट फिल्म नहीं दी है। उन्होंने कहा, “जो भी फिल्में मैंने की हैं, उन्हें बैन कर देना चाहिए। मुझे अपना फिल्मी करियर बिल्कुल भी याद नहीं है, साथ ही इसने मुझे कभी खुश तक नहीं किया है।”

बता दें कि फिल्मों के अलावा ट्विंकल खन्ना ने एक लेखक और प्रोड्यूसर के तौर पर भी जबरदस्त पहचान बनाई है। उन्होंने ‘द लेजेंड ऑफ लक्ष्मीप्रसाद’, ‘मिसेज फनीबोन्स’ और ‘पायजामा आर फरगिविंग’ जैसी किताबें लिखी हैं। वह अपने विचारों को लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब बेबाक नजर आती थीं।

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