ताज़ा खबर
 

अफसोस है कि हमें सीबीएफसी द्वारा फिल्मों को बैन और सेंसर किए जाने की आदत पड़ती जा रही हैः राजकुमार राव

सेंसर बोर्ड के अलीगढ़ और शाहिद जैसी फिल्मों को लेकर रवैये के सवाल पर बॉलीवुड एक्टर राजकुमार राव ने कहा- यह बहुत बुरा है कि हमें इसकी आदत पड़ती जा रही है।

Author नई दिल्ली | March 15, 2017 7:52 PM

सेंसर बोर्ड के अलीगढ़ और शाहिद जैसी फिल्मों को लेकर रवैये के सवाल पर बॉलीवुड एक्टर राजकुमार राव ने कहा- यह बहुत बुरा है कि हमें इसकी आदत पड़ती जा रही है। लेकिन हमें इसकी आदत नहीं पड़नी चाहिए। प्रत्येक तीसरी फिल्म या कुछ को सेंसर या बैन कर दिया जा रहा है। यह समस्या सभी के साथ है। मैं खुद प्रत्येक फिल्म को सर्टिफिकेट दिए जाने और फिर इसे सेंसर किए जाने पर कड़ाई से यकीन करता हूं। हमें क्या देखना है और क्या नहीं इसका फैसला करने के लिए हम पर्याप्त रूप से परिपक्व हैं। इंटरनेट मौजूद है, लोगों को जो देखना है वह देख लेंगे। मुझे नहीं लगता कि सिनेमा हमारे समाज को बाधित करता है।

मालूम हो कि राजकुमार राव जल्द ही उनकी अगली फिल्म ट्रैप्ड में नजर आएंगे। यह फिल्म एक थ्रिलर ड्रामा है। विक्रमादित्य मोटवानी के डायरेक्शन में बनी फिल्म ट्रैप्ड को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। कहा जा रहा है 105 मिनट की यह फिल्म बिना इंटरवल के दिखाई जाएगी। फिल्म का थ्रिल बनाए रखने के लिए फैंटम फिल्म्स ने अपने एग्जिबिशन पार्टनर्स से रिक्वेस्ट की है वह इस फिल्म को बिना इंटरवल रिलीज करें। आईनॉक्स के सीईओ आलोक टंडन ने कहा, फैंटम फिल्म्स का पार्टनर बनकर आईनॉक्स खुश है। भारतीय दर्शकों के लिए नई तरह की फिल्में बनाने की उनकी कोशिश तारीफ के काबिल है। स्ट्रटेजिक इनिशिएटिव, सिनेपोलिस के डायरेक्टर दिवांग संपत का कहना है कि, ट्रैप्ड आपको कुर्सी छोड़ने नहीं देगी, नो इंटरवल थ्रिलर। सिनेपोलिस को खुशी है कि वह यह फिल्म एक बार में दिखाएंगे।

मनोरंजन जगत की खबरों के लिए क्लिक करें

विक्रमादित्य मोटवानी के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म एक सर्वाइवल ड्रामा है। इसमें एक शख्स की कहानी दिखाई जाएगी जो अपने ही घर में कैद हो जाता है और आसमान छूने वाली इस बिल्डिंग से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचता। राजकुमार ने बताया, करीब 18 से 20 दिनों तक उसी जगह पर रहना शारीरिक और दीमागी रूप से थकाने वाला था। यह नर्क की तरह डरावना था। अगर आप दो दिन तक खाना ना खाएं तो फ्रस्ट्रेट होने लगते हैं। कई बार मेरी आंखों के आगे अंधेरी भी हो जाता था। मैं उठता था और चुपचाप बैठ जाता था। लेकिन शायद यही एक ऐक्टर होने का मजा है। मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझे इस तरह के रोल करने को मिलते हैं और ऐसे फिल्म मेकर्स के साथ काम करने का मौका मिलता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App