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फिल्म समीक्षा: दर्शकों को ठगती फिल्म

बेशक यह एक आलीशान फिल्म है। सारे सेट भव्य हैं। वेशभूषा (कॉस्ट्यूम) शानदार हैं। तीरंदाजी के दृश्य लाजवाब हैं। कैटरीना कैफ का नृत्य दमदार है। खासकर पहला वाला। इतने के बाद भी यह फिल्म दिल को नहीं छू पाती। भव्यता के बावजूद इसमें विश्वसनीयता की कमी है।

Author November 10, 2018 5:39 AM
Thugs of Hindostan Movie: कैटरीना कैफ, आमिर खान, अमिताभ बच्चन और फातिमा सना शेख

रवींद्र त्रिपाठी

बेशक यह एक आलीशान फिल्म है। सारे सेट भव्य हैं। वेशभूषा (कॉस्ट्यूम) शानदार हैं। तीरंदाजी के दृश्य लाजवाब हैं। कैटरीना कैफ का नृत्य दमदार है। खासकर पहला वाला। इतने के बाद भी यह फिल्म दिल को नहीं छू पाती। भव्यता के बावजूद इसमें विश्वसनीयता की कमी है। और हां, यहां ये कहना भी जरूरी है कि ये फिल्म भारत में एक जमाने में प्रचलित ठगी प्रथा पर भी आधारित नहीं है। हां, इसमें एक ठग जरूर है जिसका नाम है फिरंगी मल्लाह (आमिर खान)। फिरंगी ठगी में माहिर है। वह इतना माहिर है कि वह ठगों को भी ठगता है और अंग्रेजों को भी। एक दिन उसका सामना होता है खुदाबख्श जहाजी उर्फ आजाद (अमिताभ बच्चन) से। कंपनी राज के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद किए हुए है आजाद। फिल्म की कहानी 18वीं सदी के उस दौर की याद दिलाती है जब ईस्ट इंडिया कंपनी भारतीय रियासतों को फरेबी ढंग से हड़प रही थी। ऐसे ही दौर में जॉन क्लाइव (ये राबर्ट क्लाइव नहीं है) नाम का अंग्रेज कंपनी अफसर रौनकपुर रियासत को अपने कब्जे में करता है और वहां के नवाब सिकंदर मिर्जा (रोनित राय), उसके बेटे और बीवी की हत्या कर देता है। परिवार में सिर्फ एक बेटी जफीरा (फातिमा सना शेख) बच जाती है क्योंकि उसी वक्त वहां आजाद आ जाता है। आजाद जफीरा को पालता है और उसे बड़ा तीरंदाज बनाता है। आजाद के अपने गुप्त ठिकाने हैं और विश्वस्त साथी जो उस पर जान देने को तैयार रहते हैं। ईस्ट इंडिया कंपनी आजाद और उसके साथियों को पकड़ने के लिए फिरंगी का इस्तेमाल करना चाहती है। क्या फिरंगी आजाद को पकड़वाएगा या उसके भीतर भी आजादी का जज्बा पैदा होगा?

फिल्म के कुछ रोचक पहलू हैं। एक तो यह कि फिल्म आजादी के विचार को आगे बढ़ाती है। इसमें एक दृश्य है जिसमें आजाद एक उसर जमीन पर बीज बोने के बाद एक बड़े लठ को रस्सी के सहारे घसीटते हुए खेती की जमीन को समतल कर रहा है। वह ऐसा क्यों कर रहा है – यह पूछने पर वह जो जवाब देता है, उसका मतलब है कि असल चीज तो बीज बोना है, शायद वहां फल उग आए। बाद में फिरंगी यह देखता भी है कि वहां कुछ समय बाद फल उग आए हैं। यह एक तरह से फिल्म का सकारात्मक संदेश है। आमिर खान ठग के रूप में मजेदार लगे हैं। अवधी-भोजपुरी शैली में हिंदी बोलते हुए भी वे एक अलग तरह का पर देसी हास्य पैदा करते हैं। जो लोग दो बड़े सितारों – अमिताभ बच्चन और आमिर खान – के प्रशंसक हैं उनके लिए यह फिल्म एक अवसर है दोनों को साथ काम करते हुए देखने का। हालांकि यह अमिताभ की यादगार फिल्म नहीं कही जाएगी। कैटरीना कैफ ने सुरैया नाम की जिस नर्तकी की भूमिका निभाई है, वह दिलकश तो है लेकिन फिल्म की कहानी में बड़ी भूमिका अदा नहीं करती। ‘ठग्स ऑफ हिंदुस्तान’ के रिलीज होने के बाद इसके निर्देशक विजय कृष्ण आचार्य को इतना तो महसूस होना चाहिए कि बड़े सितारों का जमघट सफलता की गारंटी नहीं है। ढंग की कहानी भी होनी चाहिए।

 

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