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इस तरह से निकला कार्तिक आर्यन की मुश्किल का हल

स‍िनेमा कारोबार में जब हितों का टकराव होता है तो दोनों पक्ष मिल बैठकर हल निकाल लेते हैं।

कार्कित आर्यन।

स‍िनेमा कारोबार में जब हितों का टकराव होता है तो दोनों पक्ष मिल बैठकर ऐसा रास्ता निकालते हैं, जिससे उनका कम से कम नुकसान हो। 26 जनवरी को हिंदी में डब तेलुगु फिल्म ‘अला वैकुंठपुरमुलु’ को सिनेमाघरों में दिखाने की घोषणा से ऐसी ही स्थिति बनी थी। इसके रिलीज होने से ‘शाहजादा’ के निर्माता अलु अरविंद और हीरो कार्तिक आर्यन का नुकसान होता। शाहजादा ‘अला वैकुंठपुरमुलु’ पर ही बन रही है। रिलीज न करने पर गोल्डमाइंस कंपनी के हाथ से कमाई का एक मौका निकल रहा था। आखिर दोनों पक्षों ने बैठकर मामला सुलझाया।

अभिनेता और निर्माता कमल हासन ने 90 के दशक में एक साक्षात्कार में कहा था कि मुंबई फिल्म इंडस्ट्री किसी मछुआरे की तरह व्यवहार करती है। वह कहती है यहां मछलियां मत मारो, मछलियां कम हो जाएंगी। मगर हासन की टिप्पणी के उलट आज मुंबई और दक्षिण भारतीय फिल्म कारोबारी मिलकर कारोबार कर रहे हैं। उनके हित आपस में इतने जुड़ गए हैं कि बिना तालमेल के दोनों का कारोबार करना मुश्किल हो जाए।

बीते सप्ताह ऐसी ही स्थिति तब बनी जब ‘शाहजादा’ के हीरो कार्तिक आर्यन ने कहा कि अलु अर्जुन की हिंदी में डब ‘अला वैकुंठपुरमुलु’ 26 जनवरी पर सिनेमाघरों में रिलीज की जाती है, तो वह ‘शाहजादा’ फिल्म छोड़ देंगे। ‘अला वैंकुंठपुरमुलु’ पर ही हिंदी में ‘शाहजादा’ बनाई जा रही है। ऐसे में नवंबर में जब ‘शाहजादा’ रिलीज होगी तो उसे कौन देखेगा। ‘शाहजादा’ के निर्माताओं में से एक अलु अरविंद (‘पुष्पा’ के हीरो अलु अर्जुन के पिता) भी हैं। कार्तिक के‘शाहजादा’ से निकलने पर 30-35 करोड़ का नुकसान होता क्योंकि कार्तिक इसकी काफी शूटिंग कर चुके हैं।

सैटेलाइट चैनलों, ओटीटी और सिनेमाघरों में ‘अला वैकुंठपुरमुलु’ को हिंदी में रिलीज करने के अधिकार इसके निर्माता अलु अरविंद के पास नहीं है। वे यह अधिकार मुंबई के निर्माता मनीष शाह की कंपनी गोल्डमाइंस के पास है, जिसने अलु अर्जुन की हिंदी में डब ‘पुष्पा’ सिनेमाघरों में रिलीज की। अगर शाह 26 जनवरी को ‘अला वैकुंठपुरमुलु’ को हिंदी में रिलीज करते तो उन्हें अच्छा फायदा होता। वजह, ‘अला वैकुंठपुरमुलु’ के हीरो अलु अर्जुन इन दिनों हिट हैं। 26 जनवरी को ‘अला वैकुंठपुरमुलु’ सिनेमाघरों में रिलीज नहीं करने पर शाह को बीसेक करोड़ का नुकसान होना है। उन्होंने दो करोड़ खर्च कर इसकी हिंदी डबिंग भी की है। वह अपना नुकसान क्यों करते!

अलु अरविंद 1974 से तेलुगु और हिंदी फिल्में बना रहे हैं। ‘गजनी’ भी उन्होंने बनाई। दूसरी ओर मनीष शाह दक्षिण की फिल्मों को हिंदी में डब करके सिनेमाघरों में रिलीज करने के साथ उन्हें टीवी चैनलों को भी बेचने का काम भी करते रहे हैं। सैकड़ों हिट फिल्मों के हिंदी डब अधिकार शाह के पास हैं। ‘शोले’,से लेकर ‘बाहुबली’ं इनमें शामिल हैं। बीते कुछ सालों से टीवी पर डब फिल्मों की जो बाढ़ आई है, उससे शाह की कंपनी ने अच्छा पैसा बनाया। कई फिल्मों के तो 99 साल के अधिकार उनके पास हैं। दूरदर्शिता से शाह ने सैकड़ों दक्षिण भारतीय फिल्में खरीदीं। जो फिल्में कभी वे चैनलों को सात करोड़ में देते थे, आज वे 20 करोड़ की हो गर्इं।

शाह और अरविंद ने बीते सप्ताह एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि वे 26 जनवरी को हिंदी में डब ‘अला वैकुंठपुरमुलु’ को सिनेमाघरों में रिलीज नहीं कर रहे हैं। शाह का कहना था कि अगर वे हिंदी ‘अला वैकुंठपुरमुलु’ को सिनेमाघरों में रिलीज करते और कार्तिक आर्यन इसी पर बन रही हिंदी फिल्म ‘शाहजादा’ छोड़ देते तो अलु अरविंद को 40 करोड़ का फटका बैठता। अलु उनके मित्र हैं। दोनों साथ में सालों से धंधा कर रहे हैं। ‘पुष्पा’ के हिंदी डब अधिकार भी अलु ने शाह को दिए। इसलिए वे 26 जनवरी को हिंदी में डब अलु अर्जुन की ‘अला वैकुंठपुरमुलु’ नहीं दिखाएंगे।

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