फिल्म ‘हनुमान अंश’ को दर्शकों के साथ-साथ अब कई खास लोगों से भी सराहना मिल रही है। सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि जे. आंग्मो ने भी फिल्म देखने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी जमकर तारीफ की है। उन्होंने फिल्म की कहानी, सिनेमैटोग्राफी और आध्यात्मिकता की प्रशंसा करते हुए इसे बेहद भारतीय और ईमानदार कहानी बताया।
उन्होंने लिखा एक्स पर फिल्म की तारीफ करते हुए लिखा, “मैंने कल ‘हनुमान अंश’ देखी। इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा को लेकर मेरी उम्मीद फिर जगा दी। ईमानदार कहानी कहने का अंदाज, शानदार सिनेमैटोग्राफी। बिना किसी झिझक के आध्यात्मिक और पूरी तरह भारतीय। फिल्म में कोई सुपरस्टार नहीं है, फिर भी पूरी कास्ट ने अपनी प्रामाणिकता और गरिमा के साथ कहानी का भार बखूबी संभाला है। लेखक-निर्देशक विशाल चतुर्वेदी को सलाम, जिन्होंने हमारी आध्यात्मिक जड़ों से इतनी गहराई से जुड़ी कहानी कहने का साहस दिखाया।”
उन्होंने आगे लिखा, “मैं फिल्म देखते हुए कई बार रोई। ये वो आंसू थे, जो तब निकलते हैं जब इंसान किसी बेहद सच्ची, अच्छी या खूबसूरत चीज से रूबरू होता है। कभी-कभी सिनेमा हमें पहले से ज्यादा शांत, भीतर से समृद्ध और खुद के और करीब छोड़ जाता है। ‘हनुमान अंश’ ने मेरे साथ बिल्कुल ऐसा ही किया।”
पू्र्व IAS अधिकारी शैलजा चंद्रा ने भी की फिल्म की तारीफ
पू्र्व IAS अधिकारी शैजला चंद्रा ने भी फिल्म की तारीफ करते हुए अपने अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने लिखा कि करीब 2 करोड़ रुपये में बनी यह फिल्म बिना बड़े प्रमोशन के सिर्फ वर्ड ऑफ माउथ के जरिए दर्शकों तक पहुंची और उन्हें इसकी सबसे खास बात इसकी शांति लगी।
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शैजला ने फिल्म में दिखाए गए गांव, साधारण जीवन और आध्यात्मिकता की तारीफ की। उनके मुताबिक फिल्म आस्था को चमत्कार या आक्रामकता के बजाय दया, सेवा और इंसानियत के जरिए दिखाती है। हालांकि, उन्होंने माना कि फिल्म का कुछ हिस्सा दोहराव वाला है और बाबा के जीवन के कुछ और पहलुओं को दिखाया जा सकता था।
शैजला ने बताया कि उनका फिल्म से जुड़ाव निजी भी है। करीब 19 साल की उम्र में वह अपनी मां के साथ नीम करौली बाबा से मिली थीं। उनकी मां बाबा में गहरी आस्था रखती थीं। शैजला ने लिखा कि उनकी मां का निधन 102 साल की उम्र में हुआ, लेकिन नीम करौली बाबा में उनका विश्वास हमेशा बना रहा।
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उन्होंने 1979 की एक घटना भी याद की, जब गर्भावस्था के दौरान उनकी मां उन्हें नीम करौली बाबा से जुड़े एक हनुमान मंदिर ले गई थीं। अगले दिन उनके बेटे का जन्म हुआ। शैजला ने कहा कि वह इसे चमत्कार या कारण-परिणाम के तौर पर नहीं देखतीं, लेकिन उनके लिए यह याद हमेशा हनुमान, नीम करौली बाबा और उनकी मां के आशीर्वाद से जुड़ी रहेगी।
शैजला के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ ने उन्हें कुछ नया मानने के लिए मजबूर नहीं किया, बल्कि उनके भीतर मौजूद एक बहुत पुरानी आस्था की याद को चुपचाप फिर से जगा दिया।
