इस साल 19 या 20 मार्च को ईद का त्योहार दुनियाभर में मनाया जा सकता है। हर साल इस खास मौके पर बॉलीवुड की कोई न कोई बड़ी फिल्म रिलीज होती रही है। जिसे न सिर्फ इंडिया में बल्कि UAE-GCC रीजन में रिलीज किया जाता है। ईद लंबे समय से मिडिल ईस्ट में बड़ी बॉलीवुड फिल्मों की रिलीज के लिए एक अहम समय माना जाता है। वहां बड़ी संख्या में रहने वाले साउथ एशियाई लोगों और भारतीय फिल्मों के दर्शकों की वजह से इस दौरान फिल्मों को अक्सर बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कलेक्शन मिलता है।

हालांकि, इस बार ऐसा होता हुआ नजर नहीं आ रहा है। दरअसल, 2026 की ईद पर भारत में दो फिल्में रिलीज होने वाली थी, जिसमें से एक रणवीर सिंह स्टारर ‘धुरंधर: द रिवेंज’ है। वहीं, दूसरी यश की ‘टॉक्सिक’ थी। ‘धुरंधर’ जहां भारत में 19 मार्च को ही आ रही है, लेकिन इसके प्रीक्वल की तरह ही इस पर भी गल्फ देशों में बैन लगने की संभावना है। तो वहीं यश की ‘टॉक्सिक’ पहले ही पोस्टपोन हो चुकी है। इस वजह से UAE-GCC रीजन में ईद पर छह साल में पहली बार बिना किसी बड़ी हिंदी फिल्म रिलीज के गुजरेगी। पिछली बार ऐसा 2020 में हुआ था, जब Covid-19 पैनडेमिक की वजह से थिएटर बंद थे।

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गल्फ देशों में इंडियन फिल्मों के लिए मुश्किल दौर

बता दें किइंडियन फिल्में पिछले छह महीनों से मिडिल ईस्ट में अच्छा रेवेन्यू कमाने के लिए पहले से ही स्ट्रगल कर रही हैं। बॉलीवुड हंगामा के अनुसार, ट्रेड सर्किल को उम्मीद थी कि ‘टॉक्सिक’ और ‘जना नायकन’ अच्छा प्रदर्शन करेंगी। लेकिन ‘जना नायकन’ की रिलीज सेंसर सर्टिफिकेशन में देरी के कारण फिलहाल अनिश्चित समय के लिए टाल दी गई है।

हाल के समय की कुछ बड़ी भारतीय बॉक्स ऑफिस हिट फिल्में जैसे ‘बॉर्डर 2’ और ‘धुरंधर’ का पहला भाग भी गल्फ क्षेत्र में रिलीज नहीं हो पाया था। साउथ इंडियन फिल्मों को भी वहां अच्छा रिस्पॉन्स मिलने में अक्सर मुश्किल होती है। हालांकि ‘कांतारा: चैप्टर 1’ ने उस बाजार में लगभग 4 मिलियन डॉलर की कमाई की थी।

वहीं, ‘धुरंधर’ के ओवरसीज डिस्ट्रीब्यूटर प्रणब कपाड़िया ने पहले दावा किया था कि फिल्म को गल्फ रीजन में रिलीज न होने से लगभग 10 मिलियन डॉलर तक का नुकसान हुआ है। सीक्वल के और भी बेहतर परफॉर्म करने की उम्मीद है, अगर ‘धुरंधर: द रिवेंज’ वहां रिलीज हो जाती तो वह मार्केट से और भी ज्यादा कमा सकती थी।

मिडिल ईस्ट मार्केट क्यों है जरूरी

गल्फ मार्केट भारतीय फिल्मों की इंटरनेशनल कमाई में अहम भूमिका निभाता है। यह इलाका विदेशों में होने वाले रेवेन्यू में खासकर साउथ इंडियन फिल्मों के लिए एक बड़ा हिस्सा दे सकता है। वहीं, ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने बताया था कि भारतीय सिनेमा के विदेशी बिजनेस के लिए UAE-GCC बेल्ट कितना जरूरी रहा है।

उन्होंने बॉलीवुड हंगामा से बातचीत में कहा, “UAE-GCC क्षेत्र विदेशी बॉक्स ऑफिस कमाई का बड़ा हिस्सा दे सकता है। हालांकि यह हर फिल्म और उसकी सफलता पर भी निर्भर करता है। मल्टीप्लेक्स और नई स्क्रीन आने से इस बाजार को और बढ़ावा मिला है। साथ ही फिल्मों की क्वालिटी भी बेहतर हुई है। इसी दौरान बड़ी संख्या में भारतीय, बांग्लादेशी, पाकिस्तानी और श्रीलंकाई लोग वहां हमारी फिल्में देखने लगे। यहां तक कि अरब दर्शकों को भी भारतीय फिल्में काफी पसंद आती हैं।”

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह इलाका बड़ी भारतीय रिलीज पर बहुत ज्यादा निर्भर है, क्योंकि छोटी हिंदी फिल्में शायद ही कभी कोई खास रेवेन्यू कमा पाती हैं, जिससे ईद पर कोई बड़ी रिलीज न होना थिएटर्स और बॉलीवुड के लिए एक झटका है।

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