The wonderful journey of theatre actor deepak dobriyal - कटवारिया सराय का वो लड़का जो दोस्तों के साथ तफरी में मुंबई आया और आज 'पप्पी भाई' बन बैठा - Jansatta
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कटवारिया सराय का वो लड़का जो दोस्तों के साथ तफरी में मुंबई आया और आज ‘पप्पी भाई’ बन बैठा

दीपक ने क्लास में पहली बार मॉनीटर की अनुपस्थिति में क्लास के बच्चों का रोल नंबर पूछा था तभी से वे पब्लिक डीलिंग को लेकर सहज थे। 12वीं तक साउथ दिल्ली के एक स्कूल से पढ़ाई की। फिर बारहवीं के बाद कंफ्यूज़न हुआ तो एक दोस्त ने थियेटर जॉइन करने की सलाह दी।

दीपक ने कभी नहीं सोचा था कि वे फ़िल्मों में एक्टिंग करेंगे।

तन्नु वेड्स मन्नु में पप्पी भाई की भूमिका निभाकर सुर्खियां बटोरने वाले दीपक डोबरियाल बड़ी कमर्शियल फ़िल्मों में भी अपने लिए एक स्पेस क्रिएट करने में सफल रहे हैं। दीपक दक्षिण दिल्ली के कटवारिया सराय में पले बढ़े और उन्होंने स्कूली पढ़ाई के बाद ही मंडी हाउस में मौजूद थियेटर जॉइन कर लिया था। दीपक ने कहा कि मुझे शुरूआत से ही स्टेज पर परफॉर्म करने में मज़ा आता था। इसकी शुरूआत भी स्कूल से हुई थी। क्लास में पहली बार मॉनीटर की अनुपस्थिति में क्लास के बच्चों का रोल नंबर पूछा था तभी से पब्लिक डीलिंग को लेकर सहज था। 12वीं तक साउथ दिल्ली के एक स्कूल से पढ़ाई की। फिर बारहवीं के बाद कंफ्यूज़न हुआ तो एक दोस्त ने थियेटर जॉइन करने की सलाह दी। मैंने दिल्ली में सात साल थियेटर किया।

दीपक का बचपन दिल्ली की गलियों में बीता है।

उन्होंने कहा कि  ‘दिल्ली में थियेटर को लेकर गंभीरता देखने को मिली। मुझे काम पसंद था लेकिन एक करियर के तौर पर इसे अपनाना मुश्किल था क्योंकि आर्थिक रूप से ये सेफ नहीं था।  हालांकि मैंने कभी नहीं सोचा था कि फ़िल्मों में आऊंगा पर दो दोस्तों के साथ एक बार मुंबई जाना हुआ और चीज़ें फिर ढर्रे पर आने लगी। मुंबई में लोग कई तरह की चीज़ों में मशगूल रहते हैं तो वहां थियेटर को लेकर डेडीकेशन थोड़ा कम देखने को मिला। इसलिए मैंने कभी मुंबई में थियेटर नहीं किया। दीपक ने फ़िल्म ओमकारा से अपने फ़िल्मी करियर की शुरूआत की थी। विशाल भारद्वाज की इस फ़िल्म में राजन रज्जू तिवारी का रोल निभाया था जो डॉली(करीना कपूर) के प्यार में पागल है और उसे पाने के लिए कुछ भी कर गुज़रने की कोशिश करता है।’

पेशवा बाजीराव की इस खूबसूरत एक्ट्रेस का सपना शाहरूख खान से जुड़ा है।

‘मैं ओमकारा के बाद काम ही नहीं करना चाहता था। इस फिल्म ने साफ संदेश दिया था कि मैं भी एक्टिंग कर सकता हूं और ये मेरे लिए राहत की बात थी कि मेरे किरदार को लोगों ने पसंद किया था। दरअसल मुझ पर, मेरे परिवार पर काफी दबाव था। फ़िल्म अच्छी हो गई तो मैंने अगले एक साल तक कोई काम नहीं किया। आज की जनरेशन भले मुझे पप्पी भैया के नाम से जानती हों लेकिन जो लोग 30 के आसपास की उम्र के हैं, वो मुझे आज भी ओंकारा के रज्जू के किरदार के तौर पर ही जानते हैं।’ दीपक ने कहा कि मैंने पिछले पांच सालों में कई प्रोड्यूसर्स और निर्देशकों को मना किया है। कई जगह पर एटीट्यूड की दिक्कत लगी तो कई जगह फीस की समस्या। चूंकि ये बैनर बड़े थे तो मुझसे फ्री में फिल्में करने को कहा गया। ये चीज़ें काफी नकारात्मक थी लेकिन इनका मुझ पर प्रभाव सकारात्मक ही पड़ा। दीपक ने कहा कि पिछले कुछ समय में कई प्रोडक्शन हाउस एक बार फिर मेरे पास आए हैं। ये दर्शाता है कि अगर आप अपना काम ईमानदारी से करते हो तो देर से ही सही लेकिन आपके काम को सराहा जरूर जाता है। दीपक ने आनंद एल राय की तन्नू वेड्स मन्नू के अलावा प्रेम रत्न धन पायो, हिंदी मीडियम और लखनऊ सेंट्रल जैसी फ़िल्मों में काम किया है।

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