Kissa Court Kacheri Ka Review: आजकल फिल्मों की बात होती है तो ज्यादातर चर्चा बॉक्स ऑफिस और बड़े बजट की होती है। लेकिन इन्हीं सब के बीच एक फिल्म है ‘किस्सा कोर्ट कचहरी का’, जो थोड़ी अलग है। यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि देश के कानूनी सिस्टम की सच्चाई और आम आदमी की परेशानी को दिखाने की कोशिश नजर आती है।

क्या है कहानी?

फिल्म की कहानी किसी एक आदमी तक सीमित नहीं है। दरअसल यह उस पूरे सिस्टम की बात करती है, जहां इंसाफ पाने की उम्मीद में आम आदमी सालों-साल भटकता रहता है। ये कहानी है उन लोगों की जो कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाते-लगाते अपनी जवानी ही नहीं, पूरी उम्र गुजार देते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिल पाता।

यह कहानी ऐसे ही अनगिनत लोगों की तकलीफ और इंतजार पर आधारित है, जिनकी जिंदगी तारीखों और फाइलों के बीच उलझ कर रह जाती है। फिल्म एक मुश्किल कानूनी केस के इर्द-गिर्द घूमती है, लेकिन इसे सिर्फ कानून की धाराओं या भारी-भरकम शब्दों तक सीमित नहीं रखा गया। राइटर और डायरेक्टर ने कोशिश की है कि कहानी के जरिए उन संघर्षों को दिखाया जाए, जो हर उस इंसान के दिल में होते हैं जो इंसाफ के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाता है।

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फिल्म का निर्माण और निर्देशन

फिल्म को लवली फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड बैनर तले बनाया गया है। फिल्म को देखकर ये तो पता चलता है कि निर्माता अरुण कुमार ने कमाई करने से ज्यादा समाज को संदेश देने पर ज्यादा फोकस रखा है। फिल्म के निर्देशक रजनीश जायसवाल ने भी इसे बहुत सादगी से लेकिन असरदार तरीके से बनाया है। उन्होंने कोर्टरूम को सिर्फ बहस और कानूनी शब्दों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसमें इंसानी भावनाएं भी दिखाईं। कई जगह ऐसा लगता है कि बिना ज्यादा डायलॉग के भी कहानी बहुत कुछ कह रही है।

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फिल्म के किरदार

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके कलाकार हैं। राजेश शर्मा ने अपने किरदार को बहुत गंभीर और असरदार तरीके से निभाया है। वहीं बृजेंद्र काला अपने शांत और सधे हुए अभिनय से अलग छाप छोड़ते हैं। नीलू कोहली और सुशील चंद्रभान ने भी अपने किरदारों में अच्छी भावनाएं दिखाई हैं, जिससे कहानी और मजबूत बनती है। इसके अलावा कृष्ण सिंह बिष्ट और अंजू जाधव ने आम लोगों की परेशानी और उम्मीद दोनों को अच्छे से दिखाया है। संजीव जायसवाल और लोकेश तिलकधारी का अभिनय भी काफी वास्तविक लगता है। फिल्म में नन्हीं अवन्या कुमारी की मासूमियत कहानी को एक अलग भावनात्मक रंग देती है।

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी धर्मेश बिस्वास ने की है, जिन्होंने कोर्ट का माहौल काफी असली और सादा तरीके से दिखाया है। वहीं प्रवेश मलिक का बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म की भावनाओं को और गहरा बना देता है।

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क्यों देखें फिल्म

कुल मिलाकर ‘किस्सा कोर्ट कचहरी का’ उन लोगों की कहानी है जो सालों तक अदालत के चक्कर लगाते रहते हैं और इंसाफ का इंतजार करते हैं। यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं बताती, बल्कि दर्शकों को सोचने पर भी मजबूर करती है। अगर आप ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जो सिर्फ टाइमपास नहीं बल्कि समाज की सच्चाई दिखाए, तो ‘किस्सा कोर्ट कचहरी का’ जरूर देख सकते हैं। यह फिल्म आपको सोचने पर मजबूर कर देगी।