Reel Gatha: आज की फिल्मों में एक्टिंग काफी ज्यादा नेचुरल हो चुकी है। अब फिल्मों में तेज तर्रार डायलॉग, कैजुअल बातचीत और रियलिस्टिक अंदाज को पसंद किया जाता है, वहीं 1960 के दशक की फिल्मों की डायलॉग डिलीवरी बिल्कुल अलग हुआ करती थी।

उस दौर के कलाकार सिर्फ सिर्फ नहीं बोलते थे, बल्कि हर शब्द को अभिनय का हिस्सा बना देते थे। उनकी आवाज का उतार-चढ़ाव, शब्दों का ठहराव और चेहरे के भाव मिलकर ऐसा असर पैदा करते थे कि साधारण लाइन भी यादगार बन जाती थी।

60 के दशक में फिल्मों का माहौल थिएटर से काफी प्रभावित था। उस समय के कई बड़े कलाकार रंगमंच से आए थे, इसलिए उनके डायलॉग बोलने के अंदाज में गहराई साफ दिखाई देती थी। कलाकार लंबे-लंबे डायलॉग बिना रुके बोलते थे और हर शब्द को इतनी स्पष्टता से पेश करते थे कि दर्शक किरदार की भावनाओं से जुड़ जाते थे।

उस दौर में आवाज ही कलाकार की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती थी। कलाकारों की भारी और दमदार आवाज उनकी पहचान बन जाती थी। चाहे गुस्से का सीन हो, रोमांस हो या दर्द, हर भावना को सिर्फ चेहरे से नहीं बल्कि आवाज के जरिए भी महसूस कराया जाता था। यही वजह है कि उस समय के कई डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर हैं।

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60 के दशक में अभिनेता डायलॉग समय उर्दू और हिंदी के कठिन शब्दों का भी बेहद खूबसूरती से इस्तेमाल करते थे। उस दौर की फिल्मों में भाषा की मिठास और तहजीब देखने को मिलती थी। शब्दों के उच्चारण पर खास ध्यान दिया जाता था।

हर एक्टर का स्टाइल था अलग

उस दौर के कलाकारों में अलग-अलग डायलॉग स्टाइल देखने को मिलती थी। कोई धीमी आवाज में गहरी बात कहकर असर छोड़ता था तो कोई दमदार अंदाज में स्क्रीन पर छा जाता था। दिलीप कुमार, देव आनंद, राजेश खन्ना समेत कई एक्टर्स अपने अलग अंदाज में डायलॉग बोलने के लिए मशहूर थे।

दिलीप कुमार

दिलीप कुमार को ट्रेजेडी किंग के नाम से भी जाना जाता था। उनकी धीमी, भावुक और बहुत सहज तरीके से डायलॉग बोलने का अंदाज दर्शकों को उनके किरदार के दर्द से जोड़ देती थी।

राज कुमार

राज कुमार अपने दमदार और रॉयल अंदाज के लिए मशहूर थे। उनका डायलॉग बोलने का तरीका इतना अलग था कि उनकी हर लाइन सीटी और तालियां बटोर लेती थी। “जानी…” वाला उनका अंदाज आज भी आइकॉनिक माना जाता है।

बलराज साहनी

बलराज साहनी की डायलॉग डिलीवरी बेहद नैचुरल और सादगी भरी थी। वह किरदार को इतना वास्तविक बना देते थे कि डायलॉग, एक्टिंग नहीं बल्कि असली बातचीत लगते थे।

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देव आनंद

देव आनंद के बोलने का तेज और स्टाइलिश तरीका युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय था। उनकी आवाज में एक अलग ही ऊर्जा और रोमांटिक अंदाज दिखाई देता था।

अशोक कुमार

अशोक कुमार अपनी सहज और ठहराव के साथ डायलॉग बोलने के लिए जाने जाते थे। उनकी बातचीत में अनुभव और गहराई साफ नजर आती थी।

संजीव कुमार

संजीव कुमार ने 60 के दशक के अंत में अपनी पहचान बनाना शुरू किया। उनके गंभीर और इमोशनल डायलॉग डिलीवरी ने उन्हें अलग मुकाम पर पहुंचा दिया था।

महमूद और असित सेन

महमूद और असित सेन जैसे कलाकारों ने कॉमेडी फिल्मों को नई पहचान दी। उनकी आवाजें, रुक-रुक कर बोलना और टाइमिंग लोगों को खूब हंसाती थी।

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प्राण

प्राण विलेन के रोल में उनके खतरनाक और दमदार डायलॉग के लिए मशहूर थे। उनकी आवाज में ऐसा असर हुआ था कि स्क्रीन पर ही तूफान आ गया था।

राजेश खन्ना

राजेश खन्ना ने 60 के दशक के आखिरी दौर में रोमांटिक और नरम आवाज के साथ एक नई शैली की शुरुआत की, जो आगे चलकर सुपरस्टार इमेज का हिस्सा बनी।

आज तकनीक, बैकग्राउंड म्यूजिक और एडिटिंग फिल्मों को बड़ा बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन 60s के दौर में कलाकारों की आवाज और अभिनय ही सीन की जान हुआ करते थे। बिना ज्यादा तकनीकी सहारे के भी कलाकार सिर्फ अपनी डायलॉग डिलीवरी से दर्शकों को बांधे रखते थे।