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‘सर, ये सीन हुआ तो गांव में गोलियां चल जाएंगी’ शेखर कपूर ने कुछ यूं फ़िल्माया था बैंडिट क्वीन का विवादित न्यूड सीन

शेखर कपूर की बैंडिट क्वीन को कई फ़िल्मकार भारतीय सिनेमा की एक महत्वपूर्ण फ़िल्म के रूप में शुमार करते हैं। बैंडिट क्वीन क्रूरता की हदें दिखाती है, कई दर्शकों को पोलाराइज़ करती हैं। ये एक ऐसी फ़िल्म है जिसे आप देखना भी चाहेंगे और शायद नहीं भी। इसी फ़िल्म के एक विवादास्पद सीन से जुड़ा एक किस्सा।

इस फ़िल्म को शेखर कपूर की सबसे महत्वाकांक्षी और विवादास्पद फ़िल्म माना जाता है।

बैडिंट क्वीन। एक ऐसी फ़िल्म जिसने भारत में लोगों के फ़िल्म देखने के अनुभव को बदल कर रख दिया था। कई लोगों के लिए ये पहली ऐसी फ़िल्म थी जिसमें भारत में फ़ैले जाति के जहर को लोगों ने पर्दे पर अनुभव किया था। इस फ़िल्म को निर्विवाद रूप से भारत की सबसे विवादास्पद और शॉकिंग बायोपिक में शुमार किया जाता है। तिग्मांशु धूलिया, दिबाकर बनर्जी, अनुराग कश्यप, राकेश ओमप्रकाश मेहरा जैसे कई निर्देशक इस फ़िल्म को भारत के सिनेमाई इतिहास में मील का पत्थर मानते हैं। यूं तो बैंडिट क्वीन के साथ कई विवाद जुड़े, लेकिन इस फ़िल्म में सीमा बिस्वास का न्यूड वॉक काफी विवादास्पद रहा था। शेखर कपूर के निर्देशन में बनने वाली इस फ़िल्म में तिग्मांशु धूलिया इस फ़िल्म में कास्टिंग डायरेक्टर की भूमिका निभा रहे थे। उन्होंने इस सीन से जुड़ी दिक्कतों के बारे में बात की।

तिग्मांशु ने बताया – ‘शेखर चाहते थे कि फ़ूलन देवी का बदला लेने का जो मोटिवेशन है, वो बेहद स्ट्रॉन्ग और ज़रूरी होना चाहिए। यही कारण था कि वो फ़िल्म में फ़ूलन का एक न्यूड वॉक चाहते थे ताकि फूलन के प्रतिशोध को दर्शक भी महसूस कर सकें। अब उस दौर में VFX या CGI जैसी कोई तकनीक तो होती नहीं थी कि फेक तरीके से इस न्यूड वॉक को अंजाम दे दिया जाए और चंबल जैसी जगह में कुएं के पास कोई लड़की नग्नावस्था में घूम रही है तो यकीनन गांव में गोलियां चल जानी हैं। हमें लगा कि कोई न कोई उसे उठा ले कर जाएगा।’

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इस फ़िल्म में शेखर के कास्टिंग डायरेक्टर तिग्मांशु धूलिया थे।

तिग्मांशु ने कहा कि ‘हमें शुरूआत में लगा कि ये नहीं हो पाएगा लेकिन शेखर भी अपनी ज़िद पर अड़े हुए थे। तो हम एक शेड्यूल करके वापस आए और फिर तैयारी करके दोबारा शेड्यूल करने गए। हमने एक योजना बनाई थी – हमारे पास दो कैमरे थे, हमने सोचा कि इससे पहले कोई गांववाला भड़के, हम शॉट लेने के तुरंत बाद लड़की को गाड़ी में बिठाकर फौरन रवाना हो जाएंगे। लेकिन अब शूटिंग थी तो कई रिटेक्स भी लिए गए। हैरत की बात थी कि वहां गांववाले मौजूद थे, लेकिन कोई अपनी जगह से हिला तक नहीं। न ही किसी तरह का सीन हुआ और न किसी तरह की भद्दी टिप्पणियां हुई। क्रू मेंबर्स हैरान थे कि कैसे इतनी शांति से सब कुछ निपट गया। लेकिन जब बाद में गांववालों से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि सर, सब झूठा ही तो था। मैंने उनसे पूछा – क्या झूठा था? वो बोले – ‘सर सब झूठा था, उन्होंने प्लास्टिक का कुछ लगाया हुआ था’

बैंडिट क्वीन आज भी कई मायनों में प्रासंगिक बनी हुई है।

तिग्मांंशु ने कहा कि ‘दरअसल वो लोग शूटिंग देख चुके थे। फ़िल्म में कई ऐसे तत्व थे जो क्रिएट किए गए थे। गांववालों को लगा कि ये सब कुछ नकली हैं और इसलिए उन्होंने फ़ूलन की न्यूड वॉक के दौरान किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसे आप सिनेमा का जादू कह सकते हैं।’

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