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Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah: बबीता के रंग लगा रहे बका को देख चढ़ा जेठालाल का पारा, बालकनी से ही लगा दी ‘पार्टी’ की क्लास

Taarak Mehta ka Ooltah Chashmah: तारक मेहता... में बबीता के साथ होली खेलने को बेताब जेठालाल को दया बालकनी में बंद कर देती है। जिसके बाद नाराज़ टप्पू के पापा जब बका को बबीता के रंग लगाते देखते हैं तो आग बबूला हो...

TMKOC: बबीता के रंग लगा रहे बका को देख चढ़ा जेठालाल का पारा

Taarak Mehta ka Ooltah Chashmah: तारक मेहता शो में जेठालाल और बबीता की जोड़ी को फैंस खूब पसंद करते हैं। लेकिन अय्यर नहीं चाहता की जेठालाल और बबीता का सामना भी हो। ऐसे ही एक बार शो में दिखाया गया था कि ‘होली’ के मौके पर सोसायटी कंपाउंड में सभी का साथ में होली खेलने का प्रोग्राम रखा जाता है। जिसे लेकर जेठालाल काफी एक्साइटेड होते हैं। लेकिन उनकी तबीयत खराब होने के कारण सुबह होली खेलने के वक्त पर बापू जी और दया जेठालाल को होली खेलने से मना करते हैं। लेकिन जेठालाल ज़िद करते हैं कि उनकी तबीयत ठीक है वो होली खेलेंगे।

लेकिन बापू जी जेठालाल की बात मानने को तैयार ही नहीं होते। वहीं दया भी टप्पू के पापा को उनकी तबीयत की वजह से होली खेलने से रोकती हैं। जिसके बाद भी जब जेठालाल ज्यादा ज़िद करते हैं तो दया बहाने से जेठालाल को बालकनी में बंद करके होली खेलने चली जाती हैं। जिससे जेठालाल बुरी तरह तमतमा जाते हैं। क्योंकि एक तो वो होली नहीं खेल सकते दूसरा बालकनी में खड़े हो कर उन्हें सबको होली खेलते हुए देखना पड़ता है।

इस दौरान जेठालाल को सबसे ज्यादा ये बुरा लगता है कि वो अपनी प्यारी पड़ोसन बबीता के साथ होली नहीं खेल पा रहे हैं। अभी जेठालाल इस गम से उभर भी नहीं पाए थे कि वो देखते हैं। सुंदरलाल का दोस्त बका बबीता जी को रंग लगा रहा है। जेठालाल को पार्टी-पार्टी कह कर बुलाने वाले बका को बबीता जी के रंग लगाता देख जेठालाल का पारा चढ़ जाता है और वो बालकनी से खड़े-खड़े ही बका की क्लास लगाने की कोशिश करते हैं। लेकिन होली के हुड़दंग में कोई जेठालाल की बात नहीं सुनता जिससे बैठे बैठ टप्पू के पापा का खून और जल जाता है।

इसके बाद जब होली खत्म हो जाती है तब दया, दरवाज़ा खोल देती है। जिसके बाद टप्पू के पापा नीचे कंपाउंड में आकर सबके साथ होली खेलने को कहते हैं। लेकिन भिड़े कहता है कि होली खेलने का टाइम अब खत्म हो गया है अगली साल खेलना जेठालाल। जिसके बाद टप्पू के पापा मायुस मन से जाने लगते हैं। तभी सब सोसायटी वाले कहते हैं कि हम मज़ाक कर रहे थे। चलो एक घंटा और होली खेली जाए। जिसके बाद जेठालाल खुशी-खुशी बबीता और सभी सोसायटी वालों के साथ जमकर होली खेल लेते हैं।

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