स्टैंडअप कॉमेडियन प्रणित मोरे के वायरल वीडियो को लेकर विवाद अभी भी सोशल मीडिया पर चर्चा में है। हालांकि, अभिनेत्री कुनिका सदानंद का मानना है कि इस मुद्दे को सिर्फ मीम्स और गुस्से तक सीमित नहीं रखना चाहिए। प्रणित मोरे के दूसरे माफीनामे का समर्थन करने के एक दिन बाद कुनिका ने सोशल मीडिया पर एक और वीडियो शेयर कर कहा कि 370 रुपये वाली बिरयानी का विवाद समाज की एक बड़ी समस्या को उजागर करता है। उनके मुताबिक, यह मामला हक जताने की मानसिकता, सहमति (कंसेंट) और भावनात्मक दबाव (इमोशनल गिल्ट) जैसे गंभीर मुद्दों से जुड़ा हुआ है।

वीडियो में क्या बोलीं कुनिका

कुनिका ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए कहा, “अब जो सोशल मीडिया पर 370 रुपये की बिरयानी वाला वीडियो चल रहा है उसपर लोग मजाक बना रहे हैं, मीम्स बना रहे हैं। लेकिन मुझे लगता है कि इस विवाद के पीछे एक बहुत बड़ा गहरा सोशल समस्या छुपी हुई है। हमारी सोसाइटी में अब भी कई लोग यह समझते हैं कि अगर मैंने डिनर के लिए पैसे दिए, गिफ्ट दिया, ट्रिप स्पॉन्सर की, तो सामने वाले पर कोई एहसान या जिम्मेदारी आ गई।”

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इसके आगे उन्होंने कहा, “और बहुत सी लड़कियां बिना किसी दबाव के भी अपने अंदर ही अंदर गिल्टी फील करने लगती हैं। जैसे उनके ऊपर कोई कर्ज लिख दिया हो या वे इसकी हकदार नहीं हैं या वे इतनी अच्छी नहीं हैं कि कोई उनके लिए कुछ करे। लेकिन एक बात याद रखें कि 370 की बिरयानी से किसी इंसान की सहमति नहीं खरीदी जा सकती। एक कॉफी, एक गिफ्ट, एक महंगा डिनर या लाखों रुपये का खर्च भी किसी दूसरे व्यक्ति की आजादी, सम्मान और पसंद का प्राइस टैग नहीं बन सकता।”

सोसाइटी कैसे इस गिल्ट का करते हैं इस्तेमाल

कुनिका ने अपनी बात जारी रखते हुए आगे कहा, “आइए बात करते हैं कि समाज कैसे इस गिल्ट का इस्तेमाल करता है। सिर्फ रिश्तों में ही नहीं, बल्कि हर जगह। माता-पिता कहते हैं कि हमने तुम्हारे लिए इतना किया। रिश्तेदार कहते हैं कि हमने मदद की थी न। पार्टनर कहते हैं कि मैंने तुम्हारे लिए कुर्बानी दी, अपना करियर छोड़ा दिया, तुम्हारे घर को संभाला या मैंने तुम्हारे लिए इतनी मेहनत की, मैं थक गया काम करते-करते।

मैंने बच्चों का गुजारा करने के लिए कितना कुछ किया। कई बार ये प्यार से ज्यादा इमोशनल अकाउंटिंग बन जाता है। जैसे जिंदगी कोई बैलेंस शीट हो। डेबिट, क्रेडिट, रिटर्न, ब्याज और सबसे ज्यादा बोझ कौन उठाता है… औरतें। क्योंकि उन्हें बचपन से ही गिवर सिखाया जाता है। प्यार कोई लेन-देन नहीं है। अगर आप किसी को गिफ्ट देते हैं और बदले में कुछ उम्मीद रखते हैं, तो वह उदारता नहीं एक निवेश है। अगर किसी रिश्ते में हमेशा हिसाब-किताब चल रहा है कि मैंने इतना किया, तुमने इतना किया, तो वह शायद रिश्ता नहीं एक बिजनेस कॉन्ट्रैक्ट बन गया है।”

बेटे और बेटियों को सिखानी चाहिए ये बात

कुनिका ने लास्ट में कहा, “तो हमें अपनी बेटियों को क्या सिखाना चाहिए? शायद अब समय आ गया है कि हम अपनी बेटियों को कुछ नई बातें सिखाएं। उन्हें यह न सिखाएं कि किसी का एहसान मत रखना, बल्कि ये सिखाएं कि आभार और एहसान में फर्क होता है। किसी का शुक्रिया अदा करना और किसी का एहसानमंद महसूस करना, ये दो अलग-अलग बातें हैं। उन्हें सिखाएं कि अगर कोई आपको तोहफा देता है, तो बदले में कुछ भी देने की कोई मजबूरी नहीं है। मना करना बदतमीजी नहीं है। ‘ना’ कहना स्वार्थ नहीं है और सबसे जरूरी बात आपकी सहमति किसी की दरियादिली की EMI नहीं है।

हमें अपने बेटों को भी सिखाना चाहिए। सिर्फ बेटियों को ही नहीं, बल्कि हमें अपने बेटों को भी सिखाना होगा कि अगर तुम किसी को डिनर खिलाते हो, तो तुमने एक डिनर खिलाया है… तुमने कोई हक नहीं खरीदा। अगर आप कोई तोहफा देते हैं, तो वह प्यार जाहिर करने का एक जरिया हो सकता है, न कि उस व्यक्ति पर मालिकाना हक का कोई सर्टिफिकेट।”

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