‘हे मां माताजी’ यह डायलॉग सुनते ही लोगों की आंखों के सामने एक चुलबुली, खुशमिजाज और मासूम महिला की तस्वीर उभर कर आती है, जो अपनी अनोखी बातों और भोलेपन से हर मुश्किल को आसान बना देती थी। वह कोई और नहीं, बल्कि ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की ‘दयाबेन’ ही हैं। टीवी पर आने वाले अनगिनत किरदारों के बीच दयाबेन ने अपनी अलग पहचान बनाई।

उनके पास न कोई सुपरपावर थी, न ही कोई असाधारण कहानी। उनकी सबसे बड़ी ताकत थी उनका सच्चा दिल, बेफिक्र अंदाज और हर हाल में मुस्कुराते रहने की आदत। यही वजह रही कि वह सिर्फ एक कॉमेडी किरदार बनकर नहीं रहीं, बल्कि घर-घर की पसंद और दर्शकों के दिलों का हिस्सा बन गईं। आज भी जब उनके पुराने सीन स्क्रीन पर आते हैं, तो वही हंसी, वही अपनापन और वही ताजगी महसूस होती है, जिसने उन्हें भारतीय टेलीविजन के सबसे यादगार किरदारों में शामिल कर दिया।

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साधारण किरदार से असाधारण लोकप्रियता तक

जब 2008 में ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की शुरुआत हुई, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि शो का एक किरदार भारतीय टीवी इतिहास के सबसे चर्चित किरदारों में शामिल हो जाएगा। ‘दयाबेन’ को शुरुआत से ही एक चुलबुली, बातूनी और दिल की बेहद साफ महिला के रूप में दिखाया गया।

उनकी गुजराती लहजे वाली हिंदी, हर बात पर उत्साहित हो जाना, छोटी-छोटी बातों में खुशी ढूंढ लेना और किसी भी समस्या का अनोखा समाधान निकालना दर्शकों को बेहद पसंद आया। ‘दयाबेन’ की दुनिया बहुत सरल थी। वह हर रिश्ते को पूरी ईमानदारी से निभाती थीं और हर परिस्थिति में सकारात्मकता ढूंढ लेती थीं। यही वजह थी कि दर्शकों ने उन्हें सिर्फ एक कॉमिक किरदार नहीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्य की तरह स्वीकार कर लिया।

‘हे मां माताजी’ बना पहचान का दूसरा नाम

दयाबेन की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण उनका फेमस डायलॉग ‘हे मां माताजी’ था। जब भी वह परेशान होतीं या फिर कोई हैरान कर देने वाली घटना होती, तो यह डायलॉग जरूर सुनाई देता था। धीरे-धीरे यह डायलॉग इतना फेमस हो गया कि यह सोशल मीडिया मीम्स, आम बातचीत और स्टैंड-अप कॉमेडी तक का हिस्सा बन गया।

लोग उनकी नकल करने लगे। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक उनके अंदाज को दोहराने लगे। यह किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़ी सफलता मानी जाती है, जब उसका किरदार लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाए।

गरबा, मस्ती और बेमिसाल ऊर्जा

दयाबेन का जिक्र हो और उनके मशहूर गरबा डांस का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। शो में जब भी कोई त्योहार आता, दयाबेन अपनी अनोखी ऊर्जा के साथ गरबा करती नजर आतीं। उनका डांस पारंपरिक होने के साथ-साथ मनोरंजन से भरपूर होता था। कई बार उनकी गरबा स्टेप्स सोशल मीडिया पर वायरल हुईं और लोगों ने उन्हें कॉपी करने की कोशिश की।

जेठालाल और दयाबेन की जोड़ी

अगर ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की सबसे पसंदीदा जोड़ियों की बात हो, तो जेठालाल और दयाबेन का नाम सबसे ऊपर आता है। जेठालाल की परेशानियां और दयाबेन के अनोखे समाधान अक्सर हास्य का कारण बनते थे। दोनों के बीच होने वाली नोकझोंक, प्यार और समझदारी ने दर्शकों को खूब हंसाया।

कई बार जेठालाल किसी समस्या में फंस जाते और दयाबेन अपनी मासूमियत में ऐसी बात कह देतीं कि स्थिति और भी मजेदार हो जाती। लेकिन अंत में वही दयाबेन परिवार को जोड़ने और समस्याओं को सुलझाने का काम भी करती थीं। उनकी केमिस्ट्री इतनी लोकप्रिय हुई कि कई दर्शक सिर्फ इन दोनों को देखने के लिए शो का इंतजार करते थे।

दिशा वकानी की मेहनत

‘दयाबेन’ का किरदार जितना आसान स्क्रीन पर दिखाई देता था, उसे निभाना उतना ही चुनौतीपूर्ण था। दिशा वकानी ने इस भूमिका के लिए अपनी आवाज, बोलने का तरीका, हाव-भाव और शारीरिक भाषा पर खास मेहनत की। उनका खास गुजराती एक्सेंट और ऊर्जा अभिनय इस किरदार की पहचान बन गया।

टीवी इंडस्ट्री में अक्सर कहा जाता है कि किसी कॉमिक किरदार को सफल बनाना सबसे कठिन कामों में से एक है। लेकिन दिशा वकानी ने दयाबेन को इतनी सहजता से निभाया कि दर्शकों को कभी यह अभिनय नहीं लगा। उनके हर एक्सप्रेशन में स्वाभाविकता नजर आती थी। यही कारण है कि दयाबेन का किरदार वर्षों बाद भी लोगों के दिलों में जिंदा है।

जब शो से दूर हुईं दयाबेन

2017 में दिशा वकानी अपनी मदरहुड जर्नी की वजह से ब्रेक पर चली गईं। उसके बाद लंबे समय तक शो में वापस नहीं लौटीं। उनके जाने के बाद दर्शकों ने लगातार उनकी वापसी की मांग की।शो में कई नए किरदार आए, कई पुराने कलाकार बदले, लेकिन दयाबेन की कमी दर्शकों को हमेशा महसूस हुई। सोशल मीडिया पर आज भी फैंस अक्सर पूछते हैं कि दयाबेन कब लौटेंगी। यह किसी किरदार की लोकप्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण है कि उसके जाने के वर्षों बाद भी लोग उसे याद करें और उसकी वापसी का इंतजार करें।

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