बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री में ऐसे कई स्टार्स रहे हैं, जिन्होंने अपनी पहचान बनाने से पहले खूब मेहनत की। उनका जीवन मुश्किलों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज हम आपको अपने एक्टर अनकट कॉलम में एक ऐसी ही अभिनेत्री की कहानी बताते हैं, जिन्होंने अपने बचपन में काफी दुख देगा। इसके बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में काम किया, लेकिन वहां भी बात नहीं बन पाई और फिर वह छोटे पर्दे पर आ गईं, जहां उन्हें खूब नाम और शोहरत मिली। यह अभिनेत्री कोई और नहीं, बल्कि ‘शक्तिमान’ में ‘गीता विश्वास’ का किरदार निभा चुकीं वैष्णवी मैकडोनाल्ड हैं।

कैसा था वैष्णवी का बचपन

वैष्णवी मैकडोनाल्ड अब लोगों के लिए गीता विश्वास ही हैं। मुकेश खन्ना के शो में उन्होंने एक निडर पत्रकार का किरदार निभाया था। चलिए पहले आपको उनकी लाइफ के मुश्किल दौर के बारे में बताते हैं, जहां उन्होंने हार नहीं मानी। वैष्णवी ने सिद्धार्थ को दिए इंटरव्यू में बताया था कि माता-पिता के बीच होने वाले झगड़ों की वजह से उन्हें काफी कुछ झेलना पड़ा था।

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‘गीता विश्वास’ ने कहा था कि मम्मी और पापा के बीच झगड़ों की वजह से हम होटलों में रहते थे। हम एक होटल से दूसरे होटल जाते रहते थे। मैं स्कूल कैसे जा पाती? चौथी और दसवीं क्लास के बीच छह साल की फॉर्मल स्कूलिंग मिस करने के बावजूद वैष्णवी पढ़ाई में तेज थी। वह एक्ट्रेस नहीं, बल्कि साइंटिस्ट बनना चाहती थी।

जब गायब हो गए वैष्णवी के पिता

हालांकि, किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। जब ‘गीता’ का परिवार हैदराबाद में किराए के एक घर में शिफ्ट हुआ, तो उन्हें लगा कि लाइफ थोड़ी ठीक होने लगी है, लेकिन कुछ समय बाद ही उनके पिता बिना कुछ बताए गायब हो गए। वैष्णवी ने इसके बारे में बताते हुए कहा, “14 साल की उम्र में मैंने भगवान से बात करना शुरू किया, उनसे पूछा कि क्या वह हमारी परेशानियां नहीं देख सकते। दो या तीन महीने के अंदर मेरे पिता गायब हो गए। हम उन्हें ढूंढ भी नहीं पाए।”

जब मां देने वाली थीं जहर

इनकम और सपोर्ट सिस्टम न होने की वजह से उनकी मां ने कुछ पैसे उधार लिये। फिर वैष्णवी और उनकी छोटी बहन को लेकर मुंबई आ गईं ताकि उनके पिता को ढूंढ सके। इस दौरान वह एक लॉज में रहते थे और अपने पिता को ढूंढने लगे। कुछ समय बाद किराए और खाने के पैसे न होने की वजह से वैष्णवी की मां काफी परेशान हो गईं और उन्होंने सभी जिंदगी खत्म करने का सोचा।

वैष्णवी ने बताया, “मेरी मां ने सुसाइड करने और हमें मारने के बारे में सोचा। उन्होंने बाद में हमें बताया था कि मैं तुम्हें खाने में कुछ मिलाकर को देने वाली थी। उस समय मैं 16 साल की थी और मेरी बहन 12 साल की। ​​वह नहीं चाहती थीं कि हम गलत हाथों में पड़ें।” इसके बाद उनकी मां उन्हें एक चर्च में ले गई। वैष्णवी ने बताया कि वहां से उनकी लाइफ हमेशा के लिए बदल गई।

अभिनेत्री ने कहा, “मुझे एक सुपरनैचुरल अनुभव हुआ। मैंने भगवान की शक्ति महसूस की और रोने लगी। जब हम अपने लॉज लौटे, तो उन्हें अपने दरवाजे के बाहर 100 रुपये के नए नोटों का एक बंडल मिला, उतने ही जितने उनके बिल चुकाने के लिए जरूरी थे। तब से मैंने भगवान पर विश्वास करना शुरू कर दिया। दो हफ्ते के अंदर हम एक पूरी तरह से फर्निश्ड 1-BHK में शिफ्ट हो गए। यह सब एक चमत्कार था।”

इसके दो साल बाद वह अपने पिता से मिली, जो गायब हो गए थे। उन्होंने दूसरी शादी कर ली थी, दूसरा धर्म अपना लिया था। ऐसे में उन्हें समझ आ गया कि आखिर क्यों उनके पिता ने उन्हें छोड़ा था। एक्ट्रेस ने बताया कि मैंने उन्हें माफ कर दिया था… जब वह मौत के बिस्तर पर थे, तब मैं उनके साथ थी।

इस फिल्म से किया वैष्णवी ने डेब्यू

‘गीता’ को पहली बार रामसे ब्रदर्स की कल्ट हॉरर फिल्म वीराना (1988) में एक चाइल्ड एक्टर के तौर पर पहचान मिली, जहां उन्होंने जैस्मीन के बचपन का किरदार निभाया था। हालांकि, इसमें काम करना उनके लिए श्राप साबित हुआ। अभिनेत्री ने बताया कि इसमें काम करने के बाद मेरे साथ अजीब-अजीब अनुभव होने लगे। मैं उठकर चलने लगती थी। मैं जाग रही होती थी, लेकिन चलना बंद नहीं कर पाती थी। ऐसा करीब एक महीने तक चला।

इसके बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने की काफी कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो पाईं। उनकी झोली में कई फिल्में भी आई, लेकिन सभी ठंडे बस्ते में चली गईं। इसके अलावा उनकी कई मूवीज में कास्ट करने के बाद किसी न किसी वजह से बाहर कर दिया। एक्ट्रेस ने बॉलीवुड पर रैगिंग करने का आरोप लगाया। इसके बाद उन्होंने टीवी की तरफ रुख किया।

टीवी ने दिलाई वैष्णवी को पहचान

फिल्म इंडस्ट्री की टॉक्सिसिटी से तंग आकर वैष्णवी ने फैसला किया और वह टीवी इंडस्ट्री में चली गईं। उनकी मां को डर था कि उनका करियर खत्म हो जाएगा। इसके बाद वैष्णवी को ‘शक्तिमान’ में ‘गीता विश्वास’ का रोल ऑफर हुआ और उन्होंने मान लिया। एक्ट्रेस का यह फैसला उनके लिए बेहतरीन साबित हुआ और यह रोल एक कल्चरल फ़िनॉमिना बन गया, जिसने उन्हें 90 के दशक के टेलीविजन का आइकॉन बना दिया।

इसके बाद उन्होंने कई शो किए, जिसमें ‘मिले जब हम तुम’, ‘सपने सुहाने लड़कपन के’, ‘टशन-ए-इश्क’, ‘क्यों उठे दिल छोड़ आए’, ‘मीत’ और ‘परिणीति’ जैसे शो में काम किया। बता दें कि ‘शक्तिमान’ शो साल 1997 में शुरू हुआ था और इसका आखिरी एपिसोड साल 2005 में आया। इस शो ने लगभग 8 सालों तक लोगों के दिलों पर राज किया। आज भी इसके डायलॉग और किरदार लोगों के दिलों में जिंदा हैं।

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