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Tarak Mehta Ka Ooltah Chashmah: ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के मुख्य किरदार शैलेश लोढ़ा से खास बातचीत

Tarak Mehta Ka Ooltah Chashmah: कवि से अभिनेता बने शैलेश लोढ़ा की यह पहचान टेलीविजन की बदौलत है। उनसे बातचीत के चुनिंदा अंश यहां पढ़ें..

Updated: November 22, 2019 7:04 PM
टीवी धारावाहिक ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के मुख्य किरदार तारक मेहता यानी शैलेश लोढ़ा हर घर में पहचाने जाते हैं।

Tarak Mehta Ka Ooltah Chashmah: टीवी धारावाहिक ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के मुख्य किरदार तारक मेहता यानी शैलेश लोढ़ा हर घर में पहचाने जाते हैं। शैलेश लोढ़ा की यह पहचान टेलीविजन की बदौलत है। शो में उनकी प्रेजेंटेशन शानदार होती है। उनके फैंस उनकी बोली भाषा को खूब पसंद करते हैं। शो तारक मेहता की पॉपुलैरिटी का एक बहुत बड़ा कारण शैलेश लोढ़ा भी हैं। शो में जिस तरह से वह तारक बन कर अपने प्रिय मित्र जेठा लाल का साथ देते हैं और हमेशा उनकी मुसीबत में काम आते हैं वह काबिल-ए-तारीफ है।

वहीं तारक मेहता शो में शैलेश की अदाकारी औऱ डायलॉग डिलीवरी भी दर्शकों का मन भा लेती है। शैलेश सिर्फ एक अदाकार ही नहीं बहुत अच्छे कवि भी हैं। इन्होंने सबसे पहले अपनी पहचान एक एक्टर के तौर पर नहीं बल्कि कवि के रूप में बनाई थी। आइए जानते हैं शैलेश लोढ़ा के बारे में, उनसे खास बातचीत की शंकर जालान ने। ये हैं उनके मुख्य अंश:

सवाल: आपकी पहचान कवि के रूप में थी फिर आपने अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा, दोनों में क्या फर्क महसूस किया?

’हां, यह बिल्कुल सही है कि मैंने अपनी पहचान कवि के रूप में बनाई थी और बतौर कवि मुझे श्रोताओं का खूब प्यार भी मिला। 2008 में मुझे ‘कॉमेडी सर्कस’ और इसके बाद ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में काम करने का प्रस्ताव मिला, जिसे मैंने मान लिया। सौभाग्य रहा कि लोगों ने कवि शैलेश लोढ़ा को अभिनेता के रूप में भी पसंद किया। कवि के रूप में मंच से सीधे श्रोताओं से जुड़ने और उनसे सीधे बात करने का मौका मिलता है। लेकिन अभिनय या धारावाहिक की दुनिया में ऐसा नहीं है। वहां वही बोलना पड़ता है, जो पटकथा में लिखा होता है और वही करना पड़ता है जो निर्देशक कहता है।

सवाल: मंच पर एकल कविता पाठ को बेहतर मानते हैं या चार-छह कवियों के साथ को?

’चार-छह कवि मंच पर रहें और दर्शकों को गुदगुदाने के लिए काव्यात्मक तरीके से एक-दूसरे की खिंचाई करें, ऐसे मंच से कविता पढ़ना ज्यादा बेहतर है।

सवाल: आपकी नजर में गंभीर कविता और हास्य कविता में क्या अंतर है?

’ हास्य कविता पल भर का आनंद देती है और इसका मकसद है लोगों को हंसाना। वहीं गंभीर कविता संबंधित व्यवस्था या व्यक्ति पर प्रहार करने के साथ ही श्रोताओं को गंभीरता से सोचने के लिए मजबूर भी करती है।

सवाल : कविता के भविष्य को लेकर आप क्या सोचते हैं?

’ जिस कविता ने मेरा वर्तमान और भविष्य सुधारा, उसके बारे में क्या बोलूं। कविता का भविष्य उज्ज्वल था और उज्ज्वल ही रहेगा।

सवाल: सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को आप किस नजर से देखते हैं?

’ इस सवाल का जवाब मैं काव्यात्मक तरीके से देता हूं, सहजता थी, सरलता थी, सादगी थी और बंदगी थी।
जब सोशल मीडिया का जमाना नहीं था तब जिंदगी थी।।

सवाल: कविता के मंच से टेलीविजन पर आने का अनुभव कैसा रहा?

’ बहुत अच्छा रहा। लोगों की खूब सराहना मिली। ‘कॉमेडी सर्कस’, ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’, ‘वाह! वाह! क्या बात है!’, ‘अजब गजब घर जमाई’, और ‘कॉमेडी दंगल’ में मुझे काम करने का अवसर मिला। जैसे-जैसे समय गुजरता गया अनुभव और बेहतर होते गए।

सवाल: क्या बड़े पर्दे पर जाने की हसरत है?

’ नहीं, अब छोटा पर्दा बड़े पर्दे से इतना बड़ा हो गया है कि बड़े पर्दे वालों को भी इसकी शरण लेनी पड़ रही है। यह कलाकारों को बड़ी कामयाबी और पहचान दिलाने का एक बेहतर मंच भी साबित हो रहा है।

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