सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कॉमेडियन और यूट्यूबर समय रैना सहित पांच कॉमेडियन्स के खिलाफ दर्ज FIR और आपराधिक मामलों को खत्म कर दिया। ये मामले दिव्यांग लोगों को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़े थे। जो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ से जुड़े विवाद के बाद दर्ज किए गए थे।

अदालत के फैसले से विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तंवर को भी बड़ी राहत मिली है। इन सभी पर दिव्यांग व्यक्तियों के बारे में कथित तौर पर आपत्तिजनक और संवेदनहीन टिप्पणी करने के आरोप लगाए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले समय रैना और दूसरे कॉमेडियन्स को हर महीने कम से कम दो कार्यक्रम करने का निर्देश दिया था। इन कार्यक्रमों के जरिए दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे दिव्यांग लोगों के इलाज के लिए पैसे जुटाने थे। इसके अलावा, उन्हें अपने सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिव्यांग लोगों को बुलाकर उनकी उपलब्धियों और संघर्षों के बारे में बताने को भी कहा गया था।

इन निर्देशों का पालन करने को लेकर मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। जुलाई 2026 में कोर्ट ने समय रैना पर 3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दर्ज सभी FIR और आपराधिक केस रद्द कर दिए। इससे समय रैना और अन्य कॉमेडियन्स को बड़ी कानूनी राहत मिली है।

हालांकि, अदालत ने समय रैना को कनाडा से जुड़े उनके बयान को लेकर चेतावनी भी दी। कोर्ट ने मामले में निर्देशों का पालन करने को लेकर समय रैना और रणवीर इलाहाबादिया की भी आलोचना की।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद कॉमेडी शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के एक एपिसोड के बाद शुरू हुआ, जिसमें दिव्यांग लोगों और SMA (स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी) जैसी गंभीर बीमारी को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी नाराजगी देखने को मिली।

विवाद बढ़ने के बाद समय रैना, विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर समेत कई लोगों के खिलाफ शिकायतें दर्ज की गईं और आपराधिक कार्रवाई शुरू हुई।

मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया, जब क्योर SMA इंडिया फाउंडेशन ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में आरोप लगाया गया कि इस तरह के मजाक और टिप्पणियां दिव्यांग लोगों की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचाती हैं। याचिका में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कंटेंट को लेकर स्पष्ट और प्रभावी नियम बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।