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मुंबई में गुरबत में ज़िंदगी बीती, फुटपाथ पर रातें गुज़ारी, पर एक्टिंग के जुनून के चलते सब झेल गए कवि कुमार आज़ाद

जब वे मुंबई पहुंचे तो उनके पास कुछ नहीं था, ज्यादातर स्ट्रग्लर्स की तरह उन्होंने भी फुटपाथ पर रात गुज़ारी और कुछ समय संघर्ष के बाद आखिरकार उन्हें काम मिलना शुरू हुआ था।

कवि ने 2010 में सर्जरी से अपना वजन भी घटाया था।

‘डॉ. हाथी’ यानि कवि कुमार आज़ाद के निधन के बाद से पूरी टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर है। उनकी मौत की वजह हार्ट अटैक बताई जा रही है। डॉ. हाथी लंबे समय से तारक मेहता का उल्टा चश्मा शो से जुड़े हुए थे। उनका किरदार लोगों को इतना पसंद था कि कई लोग तो उनके असली नाम जानते तक नहीं थे और उन्हें डॉ हाथी कह कर ही पुकारा करते थे। कवि कुमार आजाद का जन्म बिहार के भोजपुर के आरा में बाबू बाजार में 12 मई 1972 को हुआ था। उनके पिता का नाम भरत बाधवानी था। 1970-80 के दशक में उनका परिवार भोजपुर से कारोबार के लिय सासाराम आ गया था। उनका परिवार सिंधी समाज से ताल्लुक रखता था।बिहार के सासाराम के रहने वाले कवि कुमार आज़ाद को बचपन से ही एक्टिंग में रूझान था और उन्हें कविताएं लिखने का भी शौक था लेकिन कवि कुमार का परिवार उनके एक्टर बनने के भी खिलाफ थे, पर हमेशा से ही सकारात्मक रवैया अपनाने वाले कवि अपने इस सपने को पूरा करने  के लिए मुंबई भाग गए।

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जब वे मुंबई पहुंचे तो उनके पास कुछ नहीं था, ज्यादातर स्ट्रग्लर्स की तरह उन्होंने भी फुटपाथ पर रात गुज़ारी और कुछ समय संघर्ष के बाद आखिरकार उन्हें काम मिलना शुरू हुआ था।  साल 2010 में कवि कुमार आजाद उर्फ डॉ. हाथी ने अपना 80 किलो वजन सर्जरी से कम किया था। पहले वह लगभग 200 किलो के थे। इस सर्जरी के बाद उन्हें रोजाना की जिंदगी थोड़ी आसान हो गई थी।  तारक मेहता में डॉ. हाथी का किरदार भी उन्हें अचानक मिल गया था। मुंबई में अपने स्ट्रग्ल के दौरान उन्हें एक प्रोडक्शन हाउस से कॉल आया। डॉ. हाथी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘जैसे ही मैं केबिन के अंदर गया तो उन्होंने देखते ही डॉक्टर हाथी के रोल के लिए मुझे सेलेक्ट कर लिया था।’

42 साल के कवि खुशमिजाज स्वभाव के थे।  ‘तारक मेहता का उलटा चश्मा’ सारियल ने सोमवार दस साल पूरे किए। इस अवसर पर कार्यक्रम रखा गया था। कवि कुमार सिंह ने फोन कर बीमार होने के कारण नहीं आने की बात कही। इसके कुछ ही देर बाद उनके मौत की खबर मिली। एक्टिंग के अलावा कवि कुमार की मीरा रोड और मलाड में दो खाने पीने की दुकानें भी थी।

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