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तमिल व बांग्ला मूल की कहानियों ने दर्शकों में बढ़ाया विविधता का दायरा, ओटीटी के हिंदी प्रसारण में बढ़ रहा दूसरी भाषाओं का दखल

‘मिरेंज’ रहस्य – रोमांच से भरी हुई है, जिसमें बंगलुरू के एक तकनीकिविद को कंपनी द्वारा चेन्नई भेजे जाने पर उसके साथ बीती हुई घटनाओं की प्रस्तुति है।

तमिल व बांग्ला मूल की कहानियों ने दर्शकों में बढ़ाया विविधता का दायरा, ओटीटी के हिंदी प्रसारण में बढ़ रहा दूसरी भाषाओं का दखल

राजीव सक्सेना

ओटीटी की वेब शृंखलाओं का दायरा यूं तो शुरुआत से ही दुनिया भर में फैला हुआ है, यानी भारतीय भाषाओं से लेकर विश्व भर में बनने वाली वेबसीरीज नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, डिजनी हाटस्टार से लेकर जी फाइव, सोनी लिव, वूट और हंगामा जैसे तमाम प्लेटफार्म पर मौजूद हैं, लेकिन हिंदी के दर्शकों के बीच बांग्ला, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ भाषाओं की उम्दा वेबसीरीज भी हिंदी में डब की जा रही हैं। तमिल मूल की विक्टिम, मीम बायज और बांग्ला मूल की लाल बाजार सरीखी वेब शृंखला खास चर्चा में हैं।

विक्टिम
विक्टिम यानी पीड़ित.. इस शीर्षक की सोनी लिव पर प्रदर्शित हुई वेब शृंखला का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार था। तमिल में बनी इस शृंखला में चार अलग – अलग कहानियों में नायक या उसके परिजन किसी न किसी रूप में पीड़ित हैं। चारों कहानियों के एपिसोड तमिल सिनेमा से जुड़े निर्देशकों ने निर्देशित किए हैं, जिनमें मशहूर फिल्मकार वेंकट प्रभु, पी रंजीत, शिम्बुदेवन और राजेश एम शामिल हैं।

विविध परिवेश की इन कहानियों में पहली कहानी ‘धम्मम’ गौतम बुद्ध के सिद्धांतों से प्रभावित कथानक पर आधारित है। नायक गुना के खेत में मिली बुद्ध की मूर्ति से शुरू हुई कहानी में उसकी बेटी को मूर्ति पर चढ़ते हुए देखकर गुना स्वाभाविक रूप से नाराजगी व्यक्त करता है कि बुद्ध भगवान हैं। बेटी का जवाब होता है, स्वयं गौतम बुद्ध कहते थे कि भगवान कहीं नहीं है। दूसरी कहानी, ‘मिरेंज’ रहस्य – रोमांच से भरी हुई है, जिसमें बंगलुरू के एक तकनीकिविद को कंपनी द्वारा चेन्नई भेजे जाने पर उसके साथ बीती हुई घटनाओं की प्रस्तुति है।

महानगर के बाहरी इलाके में नायक को दिए गए बंगले में कुछ माह पहले ही नौकरानी और उसके परिवार के सदस्यों ने सामूहिक आत्महत्या की थी। इस कहानी में निर्देशक रहस्य – रोमांच से ज्यादा इसे हारर बनाने में रूचि लेते नजर आए। बंगले में क्या हो रहा है, दर्शक अंत तक ये समझने में खुद को उलझा हुआ पाते हैं। निर्देशक एम राजेश, प्रभावित नहीं कर पाए।

तीसरी कहानी कोरोना के दौरान लगाई गई पूर्णबंदी से जुड़ी है। इसमें एक अखबार के रिपोर्टर को अपनी नौकरी इसलिए खोना पड़ती है, क्योंकि वह कोई सनसनीखेज या चटपटी खबर लाने में कामयाब नहीं होता। फेंटेसी में जी रहा नायक कल्पना में चार सौ साल उम्र के किसी आध्यात्मिक गुरु का किरदार गढ़ता है जो उसकी मदद करते हुए नए रास्ते सुझाता है। निर्देशक शिम्बुदेवन ने कहानी को दार्शनिक मोड़ देने की कोशिश की है।

सीरीज की चौथी कहानी ‘कन्फेशन’ यानी स्वीकारोक्ति फ़िल्मकार वेंकट प्रभु ने निर्देशित की है, जिसमें नायक तमाम घटनाक्रम के बाद अपना जुर्म स्वीकार करता है। ये कहानी खुद वेंकट प्रभु की तमिल फिल्म ‘लाकअप’ और जायल शूमाकर की फिल्म फोन बूथ का स्मरण कराती है। एक से बढ़कर एक सफल फिल्में देने वाले प्रभु इस लघु फिल्म में बिलकुल प्रभाव नहीं छोड़ पाए हैं।

दक्षिण के नामी कलाकारों गुरु सोमासुंदरम, कलैयारासन, नटराज कृष्णन, भवानी शंकर, अमाला पाल, प्रिया और प्रसन्ना एम ने वेब सीरीज की इन चार कहानियों पर आधारित एपिसोड में अपने अभिनय से प्रभावित किया है। लोकेशन, संगीत और छायांकन के मामले में भी शृंखला प्रशंसा के काबिल है।

लाल बाजार
यह सीरीज हालांकि कोरोना के पूर्णबंदी के दौरान जी फाइव ने प्रदर्शित की थी, लेकिन दो साल बाद इसे एक बार फिर भारी प्रचार के साथ दर्शकों के बीच लाने की पेशकश की गई है। कोलकाता के पुलिस मुख्यालय लालबाजार को केंद्र बनाकर रची गई कहानी में एक यौनकर्मी की हत्या के रहस्य को अंत तक बरकरार रखा गया है। थाना क्षेत्र वाटगंज से जुड़ी इस घटना के तार, पुलिस मुख्यालय से जाकर जुड़ते हैं और कथानक कई सारे दिलचस्प मोड़ से गुजरकर निष्कर्ष तक पहुंचता है।

बांग्ला सिनेमा और टेलीविजन के बहुत सारे जाने पहचाने चेहरे इस वेब शृंखला में विभिन्न किरदार निभाते दिखाई देते हैं। शक के घेरे में लाल बाजार के एक पुलिस अधिकारी सुरंजन सेन की भूमिका अभिनेता कौशिक सेन से शिद्दत से निभाई है। सहजीवन में उनके साथ रहने वाली तेज तर्रार टीवी पत्रकार के चरित्र में हिंदी फिल्मों की नायिका रही ह्रिशिता भट्ट ने भी न्याय किया है। अन्य प्रमुख भूमिकाओं में सौरासेनी मैत्रा, सव्यसाची चक्रवर्ती, दिव्येन्दु भट्टाचार्य, राब दे, गौरव चक्रवर्ती, विजय सिंह, अनिर्वाण और सुब्रत दत्ता ने भी उम्दा अभिनय से सीरीज को कामयाब अंजाम दिया है।

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