रील गाथा: आज जब भी श्रीदेवी का नाम लिया जाता है तो आंखों के सामने ‘चांदनी’ की मासूम मुस्कान, ‘मिस्टर इंडिया’ की हवा-हवाई और ‘चालबाज’ की डबल धमाल अदाएं घूम जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस एक्ट्रेस ने रोमांस, कॉमेडी और इमोशन में कमाल किया, उसने महज 13 साल की उम्र में पर्दे पर मां का किरदार निभाया था? सबसे मजेदार बात ये कि उनके बेटे के रोल में रजनीकांत थे। जी हां!ये किस्सा सिर्फ चौंकाने वाला नहीं, बल्कि ये दिखाता है कि श्रीदेवी बचपन से ही कितनी बड़ी कलाकार थीं।

बचपन से ही कैमरे से थी दोस्ती

श्रीदेवी का असली नाम श्री अम्मा यंगर अय्यप्पन था। उनका फिल्मी सफर चार साल की उम्र में शुरू हो गया था। साउथ सिनेमा में उन्होंने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम करना शुरू किया और जल्दी ही सबकी नजरों में आ गईं। उस दौर में बच्चों के लिए रोल सीमित होते थे, लेकिन श्रीदेवी के चेहरे की मासूमियत और अभिनय की समझ ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।

धीरे-धीरे वह तमिल, तेलुगु और मलयालम फिल्मों में लगातार काम करने लगीं। पढ़ाई और शूटिंग साथ-साथ चलती थी, लेकिन सेट ही उनका स्कूल और कैमरा उनका सबसे बड़ा टीचर था।

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13 साल की बच्ची बनी मां

1970 के दशक में एक फिल्म के दौरान ऐसा किरदार सामने आया, जहां उन्हें मां का रोल निभाना था। उम्र सिर्फ 13 साल, और जिम्मेदारी मां की! आम तौर पर इतनी कम उम्र की लड़की को इस तरह का रोल देना अजीब लगता है, लेकिन उस दौर में कलाकारों से हर तरह का किरदार निभाने की उम्मीद की जाती थी।

ये किस्सा है साल 1976 में आई तमिल फिल्म Moondru Mudichu का, दिलचस्प बात ये थी कि उसी फिल्म में उनके बेटे के किरदार में नजर आए रजनीकांत। आज जिन रजनीकांत को लोग ‘थलाइवा’ कहकर सिर-आंखों पर बैठाते हैं, उन्होंने कभी स्क्रीन पर श्रीदेवी के बेटे का रोल किया था। सोचिए, 13 साल की लड़की और सामने एक ऐसा एक्टर जो बाद में साउथ सिनेमा का भगवान कहलाया, लेकिन उस वक्त दोनों अपने-अपने करियर की शुरुआत कर रहे थे।

उम्र छोटी, अभिनय बड़ा

मां का रोल निभाना आसान नहीं होता। उसमें इमोशन, दर्द, ममता और जिम्मेदारी सब दिखाना पड़ता है और ये सब एक 13 साल की बच्ची ने इतनी सहजता से कर दिया कि दर्शक भी हैरान रह गए। कई लोगों ने बाद में कहा कि श्रीदेवी के चेहरे पर एक अलग ही गंभीरता थी। उनकी आंखें बहुत कुछ कहती थीं। शायद यही वजह थी कि उन्हें उम्र से बड़े किरदार भी दिए गए और उन्होंने उन्हें पूरी ईमानदारी से निभाया।

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श्रीदेवी और रजनीकांत बने सुपरस्टार

समय बदला, रोल बदले और दोनों की किस्मत भी बदल गई। श्रीदेवी ने धीरे-धीरे लीड रोल करना शुरू किया। साउथ सिनेमा में अपनी पहचान मजबूत करने के बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों की ओर रुख किया। फिर आया वो दौर जब श्रीदेवी हर डायरेक्टर की पहली पसंद बन गईं।

‘हिम्मतवाला’, ‘सदमा’, ‘नगीना’, ‘मिस्टर इंडिया’, ‘चालबाज’, ‘चांदनी’, उन्होंने एक के बाद एक सुपरहिट फिल्में दीं। उनकी डांसिंग, एक्सप्रेशन और कॉमिक टाइमिंग का कोई मुकाबला नहीं था। 80 और 90 के दशक में वह सचमुच हिंदी सिनेमा की पहली फीमेल सुपरस्टार कही जाने लगीं।

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दूसरी तरफ रजनीकांत ने भी साउथ इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना ली। उनका स्टाइल, डायलॉग डिलीवरी और स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें एक कल्ट स्टार बना दिया। आज उनकी फिल्म रिलीज होना किसी त्योहार से कम नहीं होता। किसे पता था कि एक समय स्क्रीन पर मां-बेटे बने ये दो कलाकार आगे चलकर भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े नाम बनेंगे?

अलग था वो दौर

आज के समय में 13 साल की लड़की से मां का रोल करवाना लगभग नामुमकिन है। लेकिन 70 का दशक अलग था। तब फिल्मों में किरदार की जरूरत के हिसाब से कलाकारों को ढाला जाता था। मेकअप और कॉस्ट्यूम के जरिए उम्र का फर्क दिखा दिया जाता था। श्रीदेवी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। कम उम्र के बावजूद उन्होंने खुद को किरदार के मुताबिक ढाल लिया। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी।

जिम्मेदारियों ने बना दिया समझदार

बहुत कम लोग जानते हैं कि श्रीदेवी ने बचपन से ही अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभाल ली थी। उनपर लिखी किताब ‘श्रीदेवी: द इटरनल स्क्रीन गॉडेस’ में इस बात का जिक्र है कि बेहद कम उम्र में लगातार काम करने के कारण स्कूल की मस्ती, दोस्तों के साथ वक्त बिताना, ये सब उनके हिस्से में बहुत कम आया। लेकिन शायद यही मेहनत आगे चलकर उनकी सफलता की नींव बनी। उन्होंने कभी शिकायत नहीं की, बल्कि हर रोल को एक चुनौती की तरह लिया।

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एक कलाकार जो उम्र से आगे थी

13 साल की उम्र में मां का किरदार निभाकर श्रीदेवी ने ये साबित कर दिया था कि वो अपनी उम्र से कई ज्यादा समझदार और जिम्मेदार इंसान थीं। वह सिर्फ डायलॉग बोलने वाली अभिनेत्री नहीं थीं, बल्कि किरदार को जीने वाली कलाकार थीं। बाद में जब उन्होंने ‘सदमा’ जैसी फिल्म में इमोशनल परफॉर्मेंस दी या ‘चालबाज़’ में कॉमेडी का तड़का लगाया, तो लोगों को लगा कि वह हर जॉनर में फिट बैठती हैं।

आज भी जिंदा है ये किस्सा

आज भी जब सिनेमा प्रेमी पुराने किस्से खंगालते हैं, तो ये बात जरूर सामने आती है कि श्रीदेवी ने कभी रजनीकांत की मां का रोल किया था। ये सुनकर लोग चौंक जाते हैं, लेकिन यही तो सिनेमा की खूबसूरती है, जहां किरदार बदलते हैं, वक्त बदलता है, और कलाकार इतिहास बन जाते हैं। अब श्रीदेवी आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्में, उनके डांस और उनके एक्सप्रेशन हमेशा जिंदा रहेंगे और ये अनोखा किस्सा भी उनकी विरासत का हिस्सा है। रजनीकांत के साथ जुड़ा था श्रीदेवी का नाम। पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…