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अखिलेश यादव ने अपनी PC के दौरान BJP का नाम लेकर उड़ाया पत्रकार का मजाक, अब लोग यूं कर रहे कमेंट

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव द्वारा पत्रकार का मजाक उड़ाने का वीडियो सामने आया है। इस पर लोगों ने प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव पर तंज कसा है।

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सपा प्रमुख अखिलेश यादव(फोटो सोर्स: PTI/फाइल)।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है। चुनाव प्रचार में व्यस्त सपा प्रमुख अखिलेश यादव अक्सर मीडिया को घेरते और कटाक्ष करते भी देखे जा रहे हैं। चाहे वह किसी बड़े मंच पर हों या फिर अपने चुनावी रथ पर। हाल ही में एक चैनल पर इंटरव्यू के दौरान “ईमानदार पत्रकार’ कहकर जब अखिलेश ने एंकर पर कटाक्ष करने की कोशिश की थी तो दोनों में तीखी नोंक-झोंक भी हुई थी। ताजा मामला अखिलेश यादव की प्रेस कांफ्रेंस से जुड़ा है, जहां वे बीजेपी का नाम लेकर एक पत्रकार का मजाक बनाने लगे।

किसका इन्वेस्टमेंट है? अखिलेश यादव के इस बर्ताव पर तमाम लोग सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। पत्रकार प्रभाकर मिश्र ने अपने ट्विटर हैंडल पर अखिलेश यादव का एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में अखिलेश एक पत्रकार वार्ता में पार्टी के कई नेताओं के साथ बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान एक टीवी पत्रकार अखिलेश यादव से कुछ सवाल पूछने की कोशिश करते हैं तो अखिलेश उल्टा उन्हीं से सवाल करने लगते हैं।

सपा नेता पूछते हैं कि “ किस चैनल से हो? ये तो बीजेपी का है, किसका इन्वेस्टमेंट है? बीजेपी के खिलाफ सवाल पूछ रहे हो? तुम्हारी नौकरी चली जाएगी।” इसके बाद अखिलेश और वहां मौजूद तमाम लोग ठहाके लगाने लगते हैं।

लोग कर रहे ऐसे कमेंट: वीडियो देखने पर साफ़ पता चलता है कि सवाल पूछने वाले पत्रकार का अखिलेश यादव अपनी पीसी में एक तरीके से मजाक बना रहे हैं। पत्रकार के सवाल पूछने पर अखिलेश यादव के इस बर्ताव पर लोग अपनी राय दे रहे हैं। कुछ लोग आलोचना कर रहे हैं तो कुछ अखिलेश यादव पर तंज कस रहे हैं।

गणेश शर्मा नाम के यूजर ने कहा कि जिस इंसान को विदेश में पढ़ने के बाद सीधा वंशवाद रूपी राजनीति में एक परिवार की पार्टी को आगे बढ़ाना हो, उससे देश के चतुर्थ स्तंभ के मजाक के अलावा कोई भला क्या उम्मीद कर सकते हैं, परंतु 99 प्रतिशत बार बड़बोलापन इंसान को छोटा ही साबित करता है। पत्रकार अंजू निर्वाण ने लिखा कि मीडिया अपनी इज़्ज़त खुद तार-तार करवा रहा है, क्योंकि अब स्टैंड लेना, बॉयकॉट करना जैसे शब्द मीडिया की डिक्शनरी में नहीं रहे। किसी के लिए क्या आवाज़ उठाएंगे जब अपने लिये न कर सके!!

विनय सिंह नाम के यूजर ने पत्रकार के साथ अखिलेश यादव के इस व्यवहार को अति आत्मविश्वास करार दिया। वहीं अतुल तिवारी कहते हैं कि अगर दो दिन इनका कवरेज बंद हो जाये तो ये समझ जाएंगे कि कब/ किसे क्या कहना चाहिए! कल तक जो नेता इन्हें गरियाते थे, जिन पर दर्जनों केस हैं, आज सत्ता पाने के लिए उन्हें टिकट दे रहे हैं। तब आंखे क्यों बंद हो जाती हैं। खैर इनको कितना कहें, एकता की जरूरत यहां भी है।

(यह भी पढ़ें- आप योगी जी के साथ हैं? सवाल पर राकेश टिकैत ने कहा ‘बिल्कुल नहीं’, अखिलेश यादव का नाम लेने पर यूं दिया रिएक्शन)

विजय सोनगड़े नाम के यूजर ने लिखा कि मुलायम सिंह यादव नें पत्रकारों को भूखण्ड दिए, अखिलेश ने सत्ता में रहते पत्रकारों को 2-BHK दिये, पर अब कुर्सी से पैदल होने पर पत्रकारों को भाजपा का सर्टिफिकेट दे रहे हैं। योगी जी, किसी पत्रकार को कांग्रेसी या समाजवादी बोल देते तो अभी तक पूरे देश में आपातकाल लग जाता।

हालांकि कुछ लोग अखिलेश यादव के इस व्यवहार के लिए पत्रकारों को ही जिम्मेदार बता रहे हैं।रिंकू नाम के यूजर ने लिखा कि विगत कई सालों से लोग देख रहे हैं कि मीडिया जनता के साथ नहीं है। इसका एहसास विपक्ष को भी है और मीडिया के सुधरने के आसार तो दिख भी नहीं रहे, फिर ऐसी भाषा का सुना जाना लाजिमी है।

ऋषभ चौधरी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखते हैं कि कमी होना एक अलग बात है और स्वेच्छा से किसी पार्टी विशेष का माउथ पीस बन जाना एक अलग बात है। जब बन ही गए हैं तो अब सुनने की क्षमता तो रखनी पड़ेगी।

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