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सूरमा: जिद और जुनून की दास्तां

इसमें संदेह नहीं कि यह फिल्म एक प्रेरणादायी कहानी है। किसी भी परिस्थिति में हार न मानने का हौसला देनेवाली। संदीप सिंह का जीवन कुछ ऐसा ही रहा।

फिल्म में संदीप सिंह की भूमिका गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने निभाई है और हरप्रीत की भूमिका तापसी पन्नू ने।
  • निर्देशक- शाद अली
  • कलाकार-दिलजीत दोसांझ, तापसी पन्नू, अंगद बेदी

पूर्व भारतीय हॉकी खिलाड़ी संदीप सिंह के जीवन पर बनी फिल्म ‘सूरमा’ एक प्रेम कहानी भी है और एक हॉकी खिलाड़ी के जीवट का किस्सा भी। इस तरह ये भी एक बॉयोपिक है। आजकल बॉलीवुड में बॉयोपिक फिल्में बनाने का सिलसिला चल पड़ा है। हाल ही में आई ‘संजू’ ही नहीं, लगभग दो साल पहले यानी 2016 में आई ‘एमएस धोनी एन अनटोल्ड स्टोरी’ और ‘अजहर’ भी बॉयोपिक थी। पहली फिल्म क्रिकेट खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी के जीवन पर तो दूसरी अजहरुद्दीन के जीवन पर आधारित थी। लेकिन जैसा कि हिंदी फिल्मों में होता है कोई बॉयोपिक पूरी तरह किसी के जीवन की कहानी नहीं होती। उसमें कल्पना का समावेश भी होता है। हिंदी फिल्मों में गाने भी जरूर होते हैं और इसके लिए प्रेम कहानी होनी चाहिए क्योंकि प्रेम कहानी होगी तभी प्रेम गीत यानी गाने होंगे। संदीप सिंह के जीवन पर आधारित इस फिल्म में एक अहम किरदार हीरो की प्रेमिका भी है और उसके साथ कई गाने भी हैं। हालांकि यह दीगर बात है कि इन गानों को शायद ही कोई याद रखे, लेकिन फिल्म में जो प्रेम दिखाया गया है उसमें सिर्फ कल्पना नहीं है। हकीकत भी है, बहुत हद तक।

इसमें संदेह नहीं कि यह फिल्म एक प्रेरणादायी कहानी है। किसी भी परिस्थिति में हार न मानने का हौसला देनेवाली। संदीप सिंह का जीवन कुछ ऐसा ही रहा। वे भारत के बेहतरीन हॉकी खिलाड़ी रहे। अक्सर किसी खिलाड़ी का उस खेल के प्रति बचपन से लगाव होता है, लेकिन यहां मामला जरा अलग है। बचपन में कोच के कड़े अनुशासन की वजह से संदीप सिंह को हॉकी से नफरत होने लगी थी, लेकिन युवावस्था में उनकी जिंदगी में आर्इं हरप्रीत कौर, जो खुद एक हॉकी खिलाड़ी थीं। हरप्रीत ही संदीप की जिंदगी में हॉकी का जज्बा पैदा करती हैं। लेकिन किस्मत देखिए, एक यात्रा के दौरान संदीप को गोली लगती है, वे बुरी तरह घायल हो जाते हैं और उन्हें लकवा मार देता है। ऐसा खिलाड़ी क्या फिर कभी हॉकी स्टिक लेकर मैदान में आ सकता है? लेकिन संदीप सिंह ऐसा करते हैं। यही उनकी जिंदगी का वो लम्हा है जहां एक खिलाड़ी की जिद और लगन की जीत होती है।

फिल्म में संदीप सिंह की भूमिका गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने निभाई है और हरप्रीत की भूमिका तापसी पन्नू ने। अंगद बेदी ने संदीप सिंह के बड़े भाई का किरदार निभाया है और विजय राज ने कोच का। दिलजीत और तापसी की भूमिकाएं अच्छी हैं। हालांकि दिलजीत अपनी भावनाओं को अपने चेहरे पर थोड़ी अधिक गहराई से पेश करते तो बेहतर होता। वे पंजाब और पंजाबी फिल्मों के बड़े स्टार तो हैं, लेकिन हिंदी फिल्मों उनकी बड़ी पहचान नहीं है। हालांकि वे इससे पहले ‘उड़ता पंजाब’ सहित कुछ हिंदी फिल्में कर चुके हैं। ‘सूरमा’ की कमजोरी यह है कि यह थोड़ी सुस्त है और इसमें एक बोर करनेवाला धीमापन है। गानों की वजह से यह धीमापन कुछ ज्यादा हो जाता है। अगर इस तथ्य तो नजरअंदाज कर दें तो ‘सूरमा’ जज्बा पैदा करने वाली फिल्म है। दो घंटे ग्यारह मिनट की इस फिल्म को अगर संपादित कर पौने दो घंटे या एक घंटा पचास मिनट का कर दिया जाता तो यह थोड़ी और चुस्त हो जाती।

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