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सोनू सूद के लिए आसान नहीं था मोगा से मुंबई तक का सफर, पिता ने इस शर्त पर भेजा था माया नगरी; ऐसे कटते थे एक्टर के स्ट्रगल के दिन

सोनू बताते हैं कि उन्हें नहीं पता था कि कहां से शुरुआत करनी है। पंजाब से निकले इंजीनियर बनने के लिए, फिर इंजीनियर बने नागपुर में। वहां से एक्टर..

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लॉकडाउन में मजबूर लोगों के ‘मसीहा’ बनकर मदद को आगे आने वाले बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद (Sonu Sood) अभी भी लगातार लोगों की मदद के लिए हर दम तैयार रहते हैं। एक्टर सोनू सूद आज मुंबई में वेल सेटल्ड हैं। उनके पास नाम रुतबा दौलत शौहरत सब है। लेकिन एक वक्त था जब वो पंजाब के मोगा से खाली हाथ आए थे। मोगा से मुंबई 1,638.3 km का सफर तय करना उनके लिए इतना आसान नहीं था। एक्टर मोगा से सीधा बॉम्बे नहीं आए थे। इससे पहले उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की थी। बॉम्बे आने से पहले उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग पूरी की। इसके बाद सोनू सूद का असली स्ट्रगल शुरू हुआ। इस बारे में सोनू सूद ने खुद बताया।

एक इंटरव्यू में सोनू बताते हैं कि उन्हें नहीं पता था कि कहां से शुरुआत करनी है। पंजाब से निकले इंजीनियर बनने के लिए, फिर इंजीनियर बने नागपुर में। वहां से एक्टर बनने के लिए मुंबई गए। तब एक साल की महौलत लेकर आया था घर से। एक साल में सेट हो गया मामला तो ठीक है नहीं तो वापस आ जाऊंगा पंजाब, बिजनेस शुरू करेंगे। जब मैं बॉम्बे आया तो एक साल तो मुझे सड़के पता लगाने में लग गया।

सोनू ने कर्ली टेल्स को दिए इंटरव्यू में बताया था- ‘मैं स्टूडियो के आस पास के चक्कर ही काटता था कि क्या पता कब कॉल आ जाए तो मैं दौड़कर ऑडिशन दे सकूं। जब कॉल आता था तो मेरे साथ 200 और लोग खड़े होते थे। तो पता नहीं था कहां से शुरुआत करनी है। फिर सबसे पहले तमिल फिल्म मिली थी मुझे। मुझे याद है जब मैं चैन्नई गया तो वहां लगा कि हां जिंदगी की अभी शुरुआत हुई है। फिर तमिल के बाद कुछ तेलुगू फिल्में कीं फिर हिंदी फिल्में कीं। लेकिन मुझे लगता है जो दौर था साउथ का वहां से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। जितना भी मैं सिनेमा के बारे में जानता हूं वहां से मुझे पता चला। अभी भी सीख रहा हूं, जर्नी आगे बढ़ रही है।’

 

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कई बार हुए रिजेक्ट

उन्होंने आगे बताया- रिजेक्ट बहुत होते थे, रोज ही सलेक्ट नहीं होते थे ऑडिशन में। ऐसे में फिर भी टाइम बिताने के लिए स्टूडियो के आसपास ही घूमते रहते थे। मैं लोकल ट्रेन्स में बहुत घूमा हूं मैं। बोरीवली से चर्चगेट का एक पास बना हुआ था कि किसी भी स्टेशन पर उतरेंगे और किसी भी स्टूडियो में जाकर ऑडिशन देकर आएंगे। ऑडिशन देने का चाव बहुत था लेकिन काम नहीं मिलता था। हमेशा मन में एक सवाल रहता था काम तो बड़ा अच्छा करता हूं फिर क्यों काम नहीं मिलता। फिर समय बदला काम भी मिला और आज आपके सामने है।

नॉर्थ इंडिया से आए और साउथ में आकर छा गए थे सोनू सूद

साउथ में काम करने को लेकर एक्टर ने कहा- लैंग्वेज मैं समझ जाता हूं, बोल भी लेता हूं काफी हद तक। मैंने जो पहली साउथ की फिल्म की थी उसका डायलॉग मुझे आज भी याद है। मेरे मन में था कि कुछ भी हो मुझे इसडायलॉग से डायरेक्टर को इंप्रेस करना है। मैंने एक सिंसियर बच्चे की तरह वो डायलॉग याद रखा।

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