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नृत्यः कथक में शिव परण का सुंदर अंदाज

कथक नृत्य को विश्वस्तर पर लोकप्रियता दिलाने में पंडित बिरजू महाराज का अनुपम योगदान है। इतना ही नहीं, उन्होंने देश के कोने-कोने के युवा कलाकारों को कथक सीखने के लिए प्रेरित किया है।

कथक डांसर सोनाली रॉय

कथक नृत्य को विश्वस्तर पर लोकप्रियता दिलाने में पंडित बिरजू महाराज का अनुपम योगदान है। इतना ही नहीं, उन्होंने देश के कोने-कोने के युवा कलाकारों को कथक सीखने के लिए प्रेरित किया है। ऐसे ही कथक नृत्यांगना सोनाली रॉय ने भी पंडित बिरजू महाराज और शाश्वती सेन से प्रेरित होकर कथक नृत्य सीखा। नृत्यांगना सोनाली ने शुरू में आशीष कुमार सरकार और संतोष कुमार चटर्जी से कथक के शुरुआती ककहरे को सीखा। फिर, वह कलाश्रम में अपने वर्तमान गुरुओं से जुड़ीं।

इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हुए समारोह में नृत्यांगना सोनाली ने कथक नृत्य पेश किया। लखनऊ घराने की बारीकियों को उन्होंने पूरी तन्मयता से पेश किया। उन्होंने परंपरागत नृत्य की बानगी की शुरुआत शिव स्तुति से की। ध्रुपद पर आधारित इस स्तुति में शिव और पार्वती के मोहक रूप को हस्तकों, मुद्राओं और भंगिमाओं से विवेचित किया। रचना ह्यशिव शिव महादेव में शिव के शांत रूप का निरूपण सहज था। सोनाली ने नृत्य के क्रम में शिव परण को सुंदर अंदाज में पेश किया।

नृत्य प्रस्तुति के अगले अंश में सोनाली ने शुद्ध नृत्त पेश किया। विलंबित लय तीन ताल में आमद, परण, उठान और तिहाइयों को नृत्य में पिरोया। परण धा-धिंन-ता-धा-तक-थुंगा के बोल पर पैर और हाथों का दुरुस्त काम दिखा। वहीं तबले के कायदे ह्यधा-किट-धा में पैर के काम को पेश किया। उन्होंने एक अन्य चक्रदार तिहाई ह्यधा-किट-धा में बारह चक्करों का सुंदर प्रयोग किया। मध्य लय में अष्टमंगल ताल को सोनाली ने नृत्य में बांधा। शुरुआत रचना ह्यता-थेई-तत-ताह्ण में पैर का काम पेश किया। उन्होंने टुकड़े, तिहाई, परण में कथक की तकनीकी बारीकियों को दर्शाया। तीन धा से सजे तिहाई को दमदार अंदाज में पेश किया। सोनाली ने तीन ताल में द्रुत लय में गत निकास पेश की। गत निकास में सादी गत में नायिका के भावों को पेश किया। दूसरी गत निकास में देवी पार्वती के शृंगार को निरूपित किया। वहीं, बांसुरी की गत के प्रस्तुति के क्रम में राधा-कृष्ण के छेड़छाड़ और होली खेलने के दृश्य को चित्रित किया। द्रुत लय में राग बहार और तीन ताल में निबद्ध तराने पर शुद्ध नृत्त को चरम पर पहुंचाया।

कथक नृत्य प्रस्तुति का एक मुख्य अंश होता है, भाव अभिनय पक्ष। इसे पेश करने के लिए सोनाली ने पंडित बिंदादीन महाराज की होली की ठुमरी का चयन किया था। इसके बोल थे-ह्यकान्ह खेलो कहां ऐसी होरी गुइयां। नृत्यांगना ने नायिका राधा और गोपिकाओं के भावों को आंखों व मुख के भावों के जरिए दर्शाया।
यह सराहनीय है कि सोनिया ने मंच का सम्मान करते हुए, लाइव म्यूजिक पर कथक नृत्य पेश किया। कथक नृत्य के बोलों के पढ़ंत के लिए संगतकार का होना जरूरी होता है। अगर, कोई उनकी प्रस्तुति के साथ तिहाइयों, टुकड़ों आदि का पढ़ंत भी करता तो शायद, उनकी प्रस्तुति और निखर जाती है। यह सच है कि आज के युवा कलाकारों को कड़ी मशक्कत के बाद ही कोई कार्यक्रम मिल पाता है। अपने कार्यक्रम को अपनी श्रेष्ठ प्रस्तुति बनाने की उनके सामने चुनौती होती है। सोनाली ने इस चुनौती को पूरे मनोयोग से स्वीकार किया।

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