एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे हमेशा से अपनी सेहत और फिटनेस का खास ध्यान रखती हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि फिट रहने के लिए वह रोज की अच्छी आदतों पर भरोसा करती हैं। वह समय पर खाना खाती हैं, संतुलित डाइट लेती हैं और अपनी लाइफस्टाइल को अनुशासित रखती हैं।

उनका कहना है कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी अच्छी आदतें ही लंबे समय तक शरीर को स्वस्थ और फिट रखने में सबसे ज्यादा मदद करती हैं। सोनाली ने खुलासा किया कि वह इंटरमिटेंट फास्टिंग करती हैं और खाने की मात्रा पर भी विशेष ध्यान देती हैं।

उनका मानना है कि सिर्फ क्या खाया जाए, यह ही नहीं बल्कि कितना खाया जाए, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है। साल 2018 में स्टेज-4 मेटास्टेटिक कैंसर का पता चलने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। उन्होंने बताया कि उस मुश्किल दौर ने उन्हें अपने शरीर की जरूरतों को समझना और मानसिक रूप से मजबूत रहना सिखाया। इलाज के दौरान और उसके बाद उन्होंने अपनी सेहत को सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाया।

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सोनाली के मुताबिक, बेहतर स्वास्थ्य के लिए कोई शॉर्टकट नहीं होता। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त आराम और सकारात्मक सोच ही लंबे समय तक फिट रहने का सबसे प्रभावी तरीका है।

सोनाली बेंद्रे ने मैशेबल इंडिया के साथ खास बातचीत में अपनी डाइट का राज बताया। जब उनसे कहा गया कि वह बहुत कम खाती हैं, तो उन्होंने बताया कि इंटरव्यू से पहले उन्होंने अपना लंबा फास्ट खत्म किया था। उन्होंने कहा कि वह पिछले कुछ समय से इंटरमिटेंट फास्टिंग फॉलो कर रही हैं और रोजाना 18 से 20 घंटे तक फास्ट रखती हैं।

सोनाली ने बताया कि वह ज्यादातर दिनों में सिर्फ डेढ़ बार खाना खाती हैं। कभी-कभी दो बार भी खाती हैं, लेकिन आमतौर पर 18–20 घंटे फास्ट करने के बाद ही खाना खाती हैं। उनका कहना है कि वह बार-बार खाने की बजाय उतना ही खाती हैं, जितनी शरीर को जरूरत होती है।

इंटरव्यू में सोनाली बेंद्रे ने अपने कैंसर के दौर को भी याद किया। उन्होंने बताया कि जब साल 2018 में उन्हें स्टेज-4 मेटास्टेटिक कैंसर होने का पता चला, जो दिमाग तक फैल चुका था, तो शुरुआत में वह भी डर गई थीं।

सोनाली ने कहा, “डर लगना स्वाभाविक है, लेकिन वह डर थोड़ी देर का ही होना चाहिए।” उनके मुताबिक, अगर इंसान डर में ही फंसा रहे तो उसका कोई फायदा नहीं होता। इसलिए उन्होंने अपने डर को स्वीकार किया, लेकिन उसे खुद पर हावी नहीं होने दिया।

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उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और अपना पूरा ध्यान उन चीजों पर रखा, जिन्हें वह बदल सकती थीं। यही सोच उन्हें मुश्किल दौर से बाहर निकलने और पूरे इलाज के दौरान मजबूत बने रहने में मदद करती रही।

इससे पहले सोनाली बेंद्रे ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में बताया था कि कैंसर के इलाज के दौरान ऑटोफैजी (Autophagy) ने उनकी रिकवरी में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने लिखा था कि साल 2018 में कैंसर का पता चलने के बाद उनके नेचुरोपैथ ने उन्हें ऑटोफैजी के बारे में बताया। इसके बाद उन्होंने खुद इस पर जानकारी जुटाई और इसी तरीके को अपनाया। सोनाली ने कहा कि वह आज भी अपनी दिनचर्या में ऑटोफैजी से जुड़ी आदतों का पालन करती हैं।

Note: यह लेख केवल जानकारी देने के उद्देश्य से है और पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी चिकित्सीय स्थिति के बारे में कोई भी सवाल होने पर हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।