हिंदी सिनेमा की सदाबहार अभिनेत्री रेखा अपनी खूबसूरती के साथ-साथ बेहतरीन अभिनय के लिए भी जानी जाती हैं। भारतीय सिनेमा में उन्होंने हर तरह की भूमिकाओं में अपनी प्रतिभा साबित की और अपने दम पर एक अलग मुकाम हासिल किया। फिल्मों के अलावा उनकी निजी जिंदगी भी अक्सर सुर्खियों में रही, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने व्यक्तिगत उतार-चढ़ाव का असर अपने फिल्मी करियर पर नहीं पड़ने दिया। एक समय ऐसा था जब फिल्म इंडस्ट्री का लगभग हर निर्माता-निर्देशक उनके साथ काम करना चाहता था। दिवंगत फिल्मकार श्याम बेनेगल भी उनमें शामिल थे। रेखा और श्याम बेनेगल से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा आज भी काफी चर्चित है।
श्याम बेनेगल का 23 दिसंबर 2024 को निधन हो गया था। उनके निधन के बाद रेखा से जुड़ा यह पुराना किस्सा सोशल मीडिया पर फिर से वायरल होने लगा। जब फिल्म ‘कलयुग’ की डबिंग हो रही थी, तब रेखा उस समय की बहुत बड़ी फिल्म स्टार थीं। एक दिन वह डबिंग के लिए तय समय से करीब दो घंटे देर से पहुंचीं। यह देखकर निर्देशक श्याम बेनेगल बहुत नाराज़ हो गए, क्योंकि उन्हें लगा कि शूटिंग और डबिंग में समय की पाबंदी जरूरी होती है।
लेकिन जैसे ही रेखा ने डबिंग शुरू की, उन्होंने इतने शानदार ढंग से अपने संवाद बोले कि श्याम बेनेगल का गुस्सा तुरंत शांत हो गया। वह उनकी अभिनय क्षमता और आवाज़ पर इतनी अच्छी पकड़ देखकर बेहद प्रभावित हुए।
श्याम बेनेगल ने बाद में कहा कि रेखा सिर्फ खूबसूरत और ग्लैमरस अभिनेत्री ही नहीं थीं, बल्कि एक बेहतरीन कलाकार भी थीं। उनकी प्रतिभा इतनी असाधारण थी कि उनकी देर से आने की नाराज़गी भी कुछ ही मिनटों में खत्म हो गई। यही वजह है कि रेखा को हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में गिना जाता है।
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उन्होंने आगे बताया कि 1981 में जब उन्होंने फिल्म ‘कलयुग’ में रेखा को मुख्य भूमिका के लिए चुना, तो कई लोग हैरान रह गए। इसकी वजह यह थी कि श्याम बेनेगल आमतौर पर अपनी फिल्मों में बड़े स्टार कलाकारों को नहीं लेते थे।
रेखा की सबसे बड़ी खासियत बताते हुए उन्होंने कहा, “उनकी याददाश्त कमाल की थी। उनके पास फोटोग्राफिक मेमोरी थी। आप उन्हें डायलॉग दीजिए, वह उसे एक बार पढ़तीं और तुरंत याद कर लेती थीं। यहां तक कि अगर कोई उन्हें डायलॉग पढ़कर सुनाता, तब भी वह उसे आसानी से याद रख लेती थीं।”
श्याम बेनेगल ने ‘कलयुग’ की डबिंग से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया, “रेखा फिल्म की मुख्य कलाकार थीं, इसलिए मैंने डबिंग स्टूडियो तीन दिनों के लिए बुक किया था। उन्हें सुबह 9 बजे आने के लिए कहा गया था, लेकिन वह करीब 12:30 बजे पहुंचीं। उस समय मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था।”
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उन्होंने आगे कहा, “लेकिन जैसे ही रेखा ने डबिंग शुरू की, मेरा गुस्सा उनकी प्रतिभा देखकर सम्मान में बदल गया। वह 12:30 बजे आई थीं और 1 बजे लंच ब्रेक होना था, लेकिन हमने लंच नहीं किया। डबिंग सेशन करीब 20 मिनट और बढ़ाया गया और उन्होंने अपनी सारी लाइन्स पूरी कर दीं। उस दिन न सिर्फ हमने दोपहर का खाना छोड़ दिया, बल्कि पूरा काम भी उसी दिन समाप्त हो गया। हमने डबिंग के लिए जो तीन अतिरिक्त दिन स्टूडियो बुक किया था, उसे भी रद्द करना पड़ा। यह उनकी असाधारण प्रतिभा का प्रमाण था।”
गौरतलब है कि साल 1981 रेखा के करियर का सबसे यादगार दौर साबित हुआ। इसी वर्ष उन्होंने ‘कलयुग’ के अलावा ‘उमराव जान’ जैसी कालजयी फिल्म में भी शानदार अभिनय किया। ‘उमराव जान’ में उनके दमदार प्रदर्शन के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। यह फिल्म आज भी रेखा के करियर की सबसे यादगार और प्रतिष्ठित फिल्मों में गिनी जाती है।
