शिक्षाविद और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक पिछले 20 दिन से भूख हड़ताल पर थे लेकिन 21वें दिन उन्हें जंतर मंतर से जबरन उठाकर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में ले जाया गया। सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो लगातार वायरल हो रहा है और तमाम सेलेब्स इस पर अपनी आवाज बुलंद करते दिखाई दे रहे हैं। इस मामले पर शेखर सुमन का कहना है कि ये सिस्टम गूंगा और बहरा है।

एक्टर और कॉमेडियन शेखर सुमन ने अपने शो शेखर टूनाइट में सोनम वांगचुक का साथ देते हुए उनके अनशन का समर्थन किया और साथ ही सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ये व्यवस्था गूंगी, बहरी और संवेदनहीन हैं।

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शेखर सुमन ने दिया सोनम वांगचुक का साथ

शेखर सुमन ने अपने शो के हालिया एपिसोड में सोनम वांगचुक का साथ देते हुए कहा कि ‘सोनम वांगचुक कई दिनों से जंतर मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए अनशन पर बैठे हैं। मैं हैरान हूं ये देख कर कि कोई हैरान क्यों नहीं है।’

शेखर सुमन वे कहा कि ‘एक इंसान देश की बेहतरी के लिए अनशन पर बैठा है। विद्यार्थियों के भविष्य के लिए अनशन पर बैठा है, शिक्षा के चरमराते ढांचे को संभालने के लिए अनशन पर बैठा है और व्यवस्था चैन से लेटी हुई है। वो व्यवस्था जो ना सिर्फ गूंगी, बहरी और संवेदनहीन है बल्कि तंग दिल, संग दिल और बेदिल है।’

शेखर सुमन ने सरकार पर साधा निशाना

‘थके हुए ऊर्जाहीन शरीर में भले ही शक्ति ना हो लेकिन देश के लाखों युवाओं की वो ताकत है, और गौर से देखा जाए तो हम सब जिंदा लाशों में वो एक अकेला ही जीवित है। मैं हैरान हूं ये देखकर कि कोई हैरान क्यों नहीं हैं।’ शेखर ने अपना ये मोनोलॉग इस लाइन के साथ खत्म किया।

बता दें कि शेखर के अलावा सोनम वांगचुक पर कई सेलेब्स के रिएक्शन देखने मिल रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियोज में साफ देखा जा सकता है कि दिल्ली पुलिस सोनम वांगचुक को जबरदस्ती सफेद चादर के पीछे छिपाते हुए लेकर जा रही है।

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इन सितारों ने भी किया सोनम वांगचुक का समर्थन

प्रकाश राज, विशाल ददलानी, काम्या पंजाबी जैसे एक्टर्स के रिएक्शन इस मामले पर देखने मिल रहे हैं। इन सभी एक्टर्स ने सरकार की जमकर आलोचना की है। इस घटना को लोकतंत्र की हत्या और तानाशाही का नाम दिया है। 20 दिन का अनशन पूरा करने के बाद सोनम वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर देशभर के लोगों से 20 जुलाई को होने वाले CJP के ‘चलो संसद’ मार्च में शामिल होने की अपील की।

उन्होंने इसे एक शांतिपूर्ण जनआंदोलन बताते हुए कहा कि इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने नागरिक छात्रों के समर्थन में आगे आते हैं और संसद तक मार्च में भाग लेते हैं।