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जब राजेश खन्ना से चुनाव के साथ दोस्ती भी हार गए शत्रुघ्न सिन्हा, ‘काका’ जीवन भर रहे नाराज

Shatrughan Sinha: ढाई दशक पहले शॉटगन की पॉलिटिकल एंट्री कांग्रेस के खिलाफ हुई थी लेकिन आज (06 अप्रैल) को भाजपा के स्थापना दिवस पर वह भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए।

राजेश खन्ना् और शत्रुघ्न सिन्हा।

Shatrughan sinha – Rajesh khanna: बॉलीवुड में दोस्ती की कई मिसालें दी जाती हैं। बिग बी अमिताभ बच्चन की धर्मेंद्र और शत्रुघ्न सिन्हा से दोस्ती से कौन वाकिफ नहीं होगा। ऐसी ही दोस्ती शत्रुघ्न सिन्हा और राजेश खन्ना के बीच थी। दोनों के बीच ये दोस्ती उनकी फिल्म ‘आज का MLA रामअवतार’ से शुरु हुई थी लेकिन एक ऐसा वक्त आया जब दोनों के बीच की ये दोस्ती हमेशा के लिए खत्म हो गई।

साल 1991 के आम चुनाव में लालकृष्ण आडवाणी ने गुजरात के गांधीनगर और नई दिल्ली दोनों सीटों से चुनाव जीता था। आडवाणी ने तब नई दिल्ली की सीट से इस्तीफा दे दिया। जून 1992 में इस सीट पर उपचुनाव होना था। आडवाणी के कहने पर भाजपा ने इस सीट से शत्रुघ्न सिन्हा को टिकट दिया तो वहीं कांग्रेस ने सुपर स्टार राजेश खन्ना को मैदान में उतारा। दोनों सितारों के चुनाव मैदान में उतरने से पूरी दिल्ली सिनेमाई हो गई थी। दोनों ही सितारों के ‘खामोश’ और ‘आई हेट टीयर पुष्पा’ जैसे फिल्मी डॉयलॉग दिल्ली में गूंज रही थी। इसी दौरान शॉटगन के मुंह से ऐसी बात निकल गई कि राजेश खन्ना ने फिर कभी शत्रुघ्न से बात तक नहीं की।

चुनावी कैम्पेन के दौरान शत्रु ने राजेश खन्ना को मदारी का खिताब दे दिया। इसका जवाब राजेश खन्ना ने उस चुनाव को 25 हजार से भी ज्यादा वोटों से जीत कर दिया। राजेश खन्ना को इस चुनाव में 52.51 प्रतिशत के साथ 101,625 वोट मिले थे। जबकि शत्रुघ्न सिन्हा को सिर्फ 37.91 प्रतिशत के साथ 73369 वोट ही पड़े थे। राजेश खन्ना इस चुनाव को जीत गए लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा का उनको मदारी कहना जिंदगी भर नहीं भूले। ऐसा भी नहीं था कि शत्रुघ्न ने राजेश खन्ना से मांफी नहीं मांगी लेकिन खन्ना ने शत्रु से मरते दम तक शत्रुता निभाई।

सिन्हा ने इस बात का जिक्र अपनी किताब ‘एनीथिंग बट ख़ामोश’ में भी किया है। सिन्हा ने लिखा है कि ‘उस चुनाव में हारना मेरे लिए निराशा के दुर्लभ क्षणों में से एक था। वह लिखते हैं, ‘वह पहला मौका था, जब मैं रोया था। आगे लिखते हैं कि राजेश खन्ना से इस बात के लिए माफी भी मांगी थी लेकिन राजेश खन्ना ने उनसे कभी बात ही नहीं की। मुझे इस वजह से भी निराशा हुई कि आडवाणी जी मेरे लिए एक दिन भी चुनाव प्रचार करने नहीं आए।’

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