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मोदी सत्ता के लिए सीख है, ये भारत के ट्रांसफॉर्मेशन का दौर- शत्रुघ्न सिन्हा ने किसानों के प्रति जताई चिंता तो बोले पुण्य प्रसून बाजपेयी

शत्रुघ्न सिन्हा के ट्वीट पर पुण्य प्रसून बाजपेयी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है और कहा है कि मोदी सत्ता के लिए एक सीख है।

शत्रुघ्न सिन्हा का कहना है कि किसानों की स्थिति बहुत गंभीर है (Photo-Indian Express Archive)

किसान आंदोलन को 100 दिन पूरे हो चुके हैं लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक किसानों की मांगों को पूरा करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। दिल्ली की अलग- अलग सीमाओं पर किसान आंदोलन कर रहे हैं और उनके नेता विभिन्न राज्यों में किसान महापंचायतों के जरिए किसानों को संगठित कर रहे हैं। किसान नेता राकेश टिकैत की भूमिका इसमें सबसे अहम दिख रही रही। बॉर्डर पर बैठे किसानों ने अपना आंदोलन सर्दियों की शुरुआत में किया था। दिल्ली की कड़कड़ाती सर्दी और बारिश में भी उनका हौसला नहीं टूटा और अब सूरज की तपिश बढ़ने लगी है।

इन सबके बावजूद किसान डटे हुए हैं कि जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं हो जाते और MSP पर कानून नहीं बनता, वो अपने घर नहीं जाएंगे। आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी किसानों के बीच पहुंचे और वहां से उन्होंने आंदोलन से जुड़ी बातें वीडियो के माध्यम से लोगों से शेयर की। उनके वीडियो को देखकर दिग्गज अभिनेता और कांग्रेस नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने किसानों के प्रति चिंता जताई है और एक ट्वीट के द्वारा अपनी बात रखी है।

शत्रुघ्न सिन्हा के ट्वीट पर पुण्य प्रसून बाजपेयी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है और कहा है कि मोदी सत्ता के लिए एक सीख है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, ‘बंधुवर..जैसे मोदी सत्ता के लिए सीख है, वैसे ही किसान आंदोलन राजनीतिक सत्ता के लिए एक सीख है। ये भारतीय समाज के ट्रांसफार्मेशन का दौर है।’

 

 

शत्रुघ्न सिन्हा ने जो ट्वीट किया था, वो कुछ इस प्रकार है- ये बहुत ही गंभीर और परेशान करने वाली स्थिति है। जितनी जल्दी उपाय किया जाएगा, शायद कुछ बचाया जा सके।’ किसानों के मुद्दे पर आम लोगों की प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है। पुण्य प्रसून बाजपेयी के ट्वीट पर भी लोगों ने अपनी राय दी है।

 

संजय शर्मा नाम के यूजर ने लिखा, ‘मोदी जी गोदी मीडिया के भरोसे और गोदी मीडिया मोदी जी के भरोसे- ये एक- दूसरे के भरोसे। लेकिन देश की आम जनता अपने भरोसे है। आम आदमी ही आम आदमी का दुख समझ सकता है। यही है आज का भारत और किसान आंदोलन इसका उदाहरण है।’

 

प्रकाश नाम के यूजर लिखते हैं, ‘किसान आंदोलन न सिर्फ़ सत्ता के लिए अपितु उन तमाम वोटरों के लिए भी सीख है जो चुनावी वादों पर भरोसा कर वोट डालते हैं। फिर 5 साल तरसते हैं। किसान आंदोलन चुनावी वादों के सहारे सत्ता में आनेवाली पार्टियों से हिसाब मांगने का साहस और रास्ता दिखा रहा है।’

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