शशि कपूर हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा सितारों में थे जिन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। 1960 और 70 के दशक में उन्होंने ‘जब फूल खिले’, ‘दीवार’, ‘कभी कभी’ और ‘त्रिशूल’ जैसी हिट फिल्मों से स्टारडम हासिल किया।

जहां उनकी रोमांटिक और चार्मिंग इमेज दर्शकों को खूब पसंद आई। वहीं, एक्टर के साथ-साथ प्रोड्यूसर के रूप में उन्होंने जुनून, ’36 चौरंगी लेन’ और ‘कलयुग’ जैसी गंभीर और कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों को भी सपोर्ट किया जो भारतीय सिनेमा में क्लासिक मानी जाती हैं। शशि कपूर उन कलाकारों में रहे जिन्होंने सिर्फ लोकप्रियता ही नहीं, बल्कि सिनेमा के स्तर को ऊंचा उठाने में भी अहम योगदान दिया।

शशि कपूर एक बेहतरीन अभिनेता थे, लेकिन ये उनका सपना नहीं था। इस बात का खुलासा उन्होंने प्रसार भारती को दिए एक इंटरव्यू में किया था। इस इंटरव्यू में उन्होंने अपने करियर को लेकर हैरान करने वाली ईमानदार बातें कहीं थीं।

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किस्मत से एक्टर बने थे शशि कपूर, डायरेक्टर बनना था सपना

बातचीत के दौरान शशि कपूर ने खुद को आलसी और फ्लूक एक्टर बताया था। उन्होंने कहा था कि वह कभी अभिनेता बनना नहीं चाहते थे, बल्कि उनका असली सपना फिल्म निर्माण और निर्देशन में काम करने का था। हालांकि हालात ऐसे बने कि उन्हें एक्टिंग की दुनिया में कदम रखना पड़ा।

शशि कपूर ने साफ तौर पर माना कि उन्होंने अपने करियर में कई फिल्में सिर्फ पैसे कमाने के लिए कीं। उनका कहना था कि कमर्शियल फिल्मों से मिली कमाई का इस्तेमाल उन्होंने बाद में अच्छी और अर्थपूर्ण सिनेमा बनाने में किया। इस तरह वह अपने पैशन और प्रोफेशन के बीच संतुलन बना पाए।

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इंटरव्यू में उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी खुलकर बात की। शशि कपूर ने कहा कि उनके लिए परिवार सबसे पहले आता है और वह फिल्मी पार्टियों या ग्लैमर से दूर रहना पसंद करते थे। वह अपने परिवार के साथ समय बिताना ज्यादा अहम मानते थे।

इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय सिर्फ मेहनत को नहीं बल्कि किस्मत को भी दिया। उनके मुताबिक, उन्हें कई मौके भाग्य के चलते मिले, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी।