भारतीय सिनेमा की शानदार एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर ने साल 1968 में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और नवाब मंसूर अली खान पटौदी के साथ शादी कर ली थी। जिसके बाद उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया था। शादी के बाद उन्होंने अपने तीनों बच्चों की परवरिश एक नवाबी अंदाज में की।

हाल ही में उनकी सबसे बड़ी बेटी सबा अली खान ने एक बयान में बताया कि उनकी मां ने हमेशा से उन्हें इस्लाम के बारे में ही सिखाया। सबा ने ये भी साफ कहा कि उन्होंने कभी भी हिंदू धर्म को फॉलो नहीं किया और वो कभी भी मंदिर नहीं गई हैं।

यह भी पढ़ें- ‘रामायण’ के 4000 करोड़ के बजट पर यश का दो टूक बयान, बोले- ‘जब बाजार ग्लोबल है तो बजट भी’

शर्मिला टैगोर ने बच्चों को नहीं सिखाया हिंदू धर्म

यूट्यूब चैनल बिग बॉलीवुड बफ के साथ बातचीत में शर्मिला टैगौर की बेटी सबा ने कहा वो हमेशा इस्लाम से ही जुड़ी हैं। जब उनसे पूछा गया कि उनके माता पिता दो अलग धर्मों से थे तो उन्होंने किस धर्म को ज्यादा जाना और किसका पालन किया तो सबा ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि मेरे लिए, मैं कहूंगी कि मेरा धर्म इस्लाम है। मैं इससे जुड़ाव महसूस करती हूं।”

“मैं आध्यात्मिक भी हूं, क्योंकि अगर मुझे ईश्वर के बारे में सोचना हो, तो मैं शायद अल्लाह कहूंगी। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मैं दूसरे धर्मों का सम्मान नहीं करती, ऐसा बिल्कुल नहीं है।” सबा ने कहा

इस्लाम, रमजान की दी सीख

सबा ने आगे बताया कि उनकी मां उनके पिता से शादी करने के बाद अपना धर्म बदल चुकी थीं। उन्होंने इस्लाम अपना लिया था और हम सब भाई बहनों को भी यही सिखाया लेकिन साथ ही बाकी धर्मों की इज्जत करना भी सिखाया और इजाजत दी कि ये फैसला हम खुद ले।

यह भी पढ़ें- ‘ये जेन-जी के लिए है’, ‘टॉक्सिक’ में भरभर कर इंटिमेट सीन्स करने के बाद यश ने कहा- अश्लीलता गलत है

सबा कहती हैं- “जब अम्मा और अब्बा की शादी हुई, तो अम्मा ने वास्तव में इस्लाम धर्म अपना लिया था और उन्होंने हमें भी इस्लाम के बारे में बताया और राह दिखाई। शायद ऐसा इसलिए किया ताकि हम कंफ्यूज न हों और हमें एक तरह का आधार मिल सके। हमारे घर में न तो कोई मंदिर था और न ही हम हिंदू धर्म का पालन करते थे। असल में, अम्मा ने मुझे मेरे धर्म के बारे में सिखाया और इस्लाम, रमजान जैसी चीजों की समझ दी। इसके बाद हमने क्या अपनाना है, यह हमारी अपनी पसंद थी।”

किसी एक धर्म को फॉलो करने कोई प्रैशर नहीं

इसके अलावा सबा ने सैफ और सोहा की अंतरधार्मिक शादियों के बारे में बात करते हुए कहा- “मेरे भाई-बहन भी इंटरफेथ मैरिज में हैं और मुझे नहीं लगता कि हममें से कोई भी किसी एक धर्म का बहुत सख्ती से पालन करता है। मेरे लिए आस्था बेहद निजी चीज है। इसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता। इंसान किस धर्म या विश्वास की ओर रुख करता है, यह पूरी तरह उसकी अपनी पसंद और व्यक्तिगत फैसला है।”